सरोकार की मीडिया

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Wednesday, March 21, 2018

संपर्क करें.... डॉ. गजेन्‍द्र प्रताप सिंह, मो. 09889994337


संपर्क करें.... डॉ. गजेन्‍द्र प्रताप सिंह, मो. 09889994337




मीडियाकर्मी, सोशल वर्कर, एन.जी.ओ., राजनैतिक पार्टी, एम.फिल व पी.एच-डी. (किसी भी विषय के ) शोधार्थियों को यदि अपने शोध कार्य हेतु लिकर्ट पद्धति द्वारा 13 स्‍केल, 11 स्‍केल, 7 स्‍केल, 5 स्‍केल व 3 स्‍केल पर प्रश्‍नावली तथा अनुसूची का निर्माण व उनका चार्ट तथा 3 डी. ग्राफ (पाई चार्ट, कॉलम चार्ट, लाइन चार्ट, बार चार्ट) के माध्‍यम से विश्‍लेषण एवं सांख्‍यकीय विधि द्वारा (काई स्‍कवायर, कोरलेशन, रिग्ररेशन, मीन, मीडियन और बहुलक) आदि करवाना चाहते हो... तो संपर्क करें..... डॉ. गजेन्‍द्र प्रताप सिंह, मो. 09889994337


Monday, March 5, 2018

जयकारा करनी है तो जवानों और किसानों की कीजिए...


जयकारा करनी है तो जवानों और किसानों की कीजिए...

देश में जातिवाद और धर्मवाद में लिप्‍त हर इंसान से अब बू आने लगी है....जिसे देखों अपना-अपना धर्म, अपनी-अपनी जाति का राग अलापता दिखाई  दे  रहा  है... सब के सब अपने धर्म की जयकार करने में लगे हुए हैं...... कोई जय श्रीराम, कोई जय शिवाजी, कोई जय भवानी, कोई जय भीम, कोई जय बौद्ध, कोई जय हनुमान, कोई अल्‍लाह हू अकबर, कोई वाहे गुरू, कोई यीशु, कोई जय जिनेन्‍द्र की जयकार करने में लगा हुआ दिखाई दे रहा है...परंतु सन् 1964 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिया गया नारा जय जवान-जय किसान को सब भूल चुके हैं... जवान जो देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को निछवर कर देते हैं ताकि हम और आप चैन से अपने-अपने घरों में सो सके... और किसान दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाता है ताकि हम और आप अपने परिवार को भोजन दे सके..... अगर जवान और किसान भी सिर्फ जयकारा करने में लग जाए तो देश का उद्धार हो गया.....
जयकारा करने वालों गोली का कोई धर्म न होता... भूख का कोई मजहब नहीं होता..... अगर जवान और किसान नहीं रहेगें तो  जय श्रीराम, जय शिवाजी, जय भवानी, जय भीम, जय बौद्ध, जय हनुमान, अल्‍लाह हू अकबर, वाहे गुरू, यीशु, जिनेन्‍द्र न तो अपनी रक्षा करने के लिए आएंगे और न ही आपको भोजन देने...... अगर वास्‍तव में आपके भगवान, अल्‍लाह, वाहे गुरू, जीजस, बौद्ध, जिनेन्‍द्र यह सब हैं जिनके पीछे आप इंसान को इंसान नहीं समझ रहे....धर्म ने नाम पर एक दूसरे का गला कटते पर उतारू दिखाई देते हो....तो जवानों को शरहदों से वापस क्‍यों नहीं बुला लेते.... और अपने-अपने भगवानों, अल्‍लाहों, गुरूओं, जीसस, बौद्ध, जिनेन्‍द्र से कहो की वो ही शरहदों पर आपकी रक्षा करें....वो ही तुमको खाने के लिए अनाज मुहैया कराए.... तो बगले झांकते दिखाई दोगें.....क्‍योंकि सबको पता है कि बिना जवानों के आप सुरक्षित नहीं है और बिना किसान के आप जिंदा नहीं रह सकते... अब तो हालात किसी ने छुपे नहीं है जवान देश के लिए शहीद हो रहे हैं और किसान आत्‍महत्‍या करते जा रहे हैं.... इनका सहयोग और बल देने के बजाय अपने-अपने धर्म और जातियों को बढ़ावा दे रहे हो...कुछ तो शर्म करो...अपने ऊपर धर्म और जाति को इतना हावी न होने दे कि आप इंसान को इंसान ही न समझे.....जयकारा करनी है तो जवानों और किसानों की कीजिए... और उनका सहायोग और उनको बढ़ावा दे.. ताकि देश उन्‍नत के मार्ग पर अग्रसरित हो जाए....

Saturday, March 3, 2018

पत्‍नी की फटकार का महत्‍व


पत्‍नी की फटकार का महत्‍व
पत्‍नी की फटकार सुनी जब,
तुलसी भागे छोड़ मकान
राम चरित मानस रच डाला
जग में बन गए भक्‍त महान....

पत्‍नी छोड़ भागे थे जो-जो
वही बने विद्वान महान
गौतम बुद्ध, महावीर तीर्थकर
पत्‍नी छोड़ बने भगवान....

पत्‍नी छोड़ जो भागे मोदी
हुए आज हैं पंत प्रधान
अडवाणी ना छोड़ सके तो
देख अभी तक हैं परेशान

नहीं कि है शादी पप्‍पू ने
नहीं सुनी पत्‍नी की तान
इसलिए फिरते हैं भटकते
बन न सके राजनेता महान.....

हम भी पत्‍नी छोड़ न पाए
इसलिए तो हैं परेशान
पत्‍नी छोड़ बनो संयासी
पाओं मोक्ष और निर्वाण.....

नोट... हास्‍य कविता का आनंद लीजिए.. रिस्‍क केवल अपने दम पर लें।

राम राज्‍य की वास्‍तविक हकीकत....


राम राज्‍य की वास्‍तविक हकीकत....

कभी भूल कर राम राज्‍य फिर से मत ले आना, एक बार जो भूल हो गई वो दुबारा मत करना। राम के राज्‍य में आदमी बाजारों में गुलामों की तरह बिकते थे, कम से कम आज तो आदमी बाजारों में गुलामों की तरह तो नहीं बिकते। और आदमी जब बाजारों में गुलामों की तरह बिकते रहे होगें, तो दरिद्रता निश्चित रही होगी, कोई बिकेगा कैसे, किसलिए बिकेगा।  दीन और दारिद्र ही बिकते होगें, कोई टाटा बिरला, डालमिया बाजारों में बिकेगें नहीं। स्त्रियां  बाजारों में  बिकती थी, वे स्त्रियां ‍गरीबों की ही रही होगी, उनकी ही बेटियां होगी। कोई सीता तो बाजार में बिकती नहीं थी। उसका तो स्‍वयंवर होता था। गरीबों की बच्चियां बिकती थी बाजारों में। और हालात निश्चित ही भयानक रहे होगें। क्‍योंकि बाजारों  में  बिकती ये स्त्रियां और  लोग, आदमी और औरतें दोनों विशेषकर औरतें। राजा तो खरीदतें ही  खरीदतें थे, धनपति खरीदतें ही थे, जिनको तुम ऋषिमुनि कहते हो वो भी खरीदते थे। गजब की दुनिया थी। ऋषिमुनि भी बाजारों में बिकती हुई औरतों को खरीदते थे। अब तो हम भूल ही गए, वधू शब्‍द का असली अर्थ। अब तो हम शादी होती है नई-नई तो वर-वधू को आशीर्वाद देने जाते हैं। हमको पता ही नहीं था किसको आशीर्वाद देने जा रहे हैं। राम के समय में और राम के पहले भी, वधु का अर्थ होता था खरीदी गई स्‍त्री। जिसके साथ तुमको पत्‍नी जैसा व्‍यवहार करने का हक है। लेकिन उसके बच्‍चों को तुम्‍हारी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा। पत्‍नी और वधू में यही फर्क था। सभी पत्नियां वधू नहीं थी, सभी वधू पत्नियां नहीं थी। वधू नंबर दो की पत्‍नी थी। जैसे नंबर दो की बही होती है जिसमें चोरी चपाटी को लेखा जोखा होता था ऐसे नंबर दो की पत्‍नी थी वधू। ऋषिमुनि भी वधुएं रखते थे और तुमको ऐसी भ्रंति थी कि ऋषिमुनि गजब के लोग थे। कुछ खास गजब के लोग नहीं थे... वैसे ऋषिमुनि तुमको आज भी मिल जाएंगे।
और आप कहते हैं मौजूद हालत खराब है...इतना बुरा आदमी तो आज पाना मुश्किल है जो बाजार से औरतें खरीद के लाए, आज यह बात ही अमानवीय प्रतीत होगी.... मगर यह जारी थी राम राज्‍य में। शुद्रों को हक नहीं था वेद पढ़ने का, यह तो कल्‍पना के बाहर की बात है कि डॉ. अंबेडकर जैसा शुद्र और राम के समय में भारत के विधान का रचियता हो सकता था.... असंभव। खुद राम ने एक शुद्र के कानों में शीशा पिघलवाकर डलवा दिया था...गर्म शीशा, उबलता हुआ शीशा... क्‍योंकि उसने चोरी से कहीं वेद के मंत्र पढ़ें जा रहे थे जिसको छुप कर सुन लिया था... यह उसका पाप था यह उसका अपराध था। राम तुम्‍हारे मर्यादापुरूषोत्‍तम.. राम को तुम अवतार कहते हो, महात्‍मा गांधी राम राज्‍य को फिर से लाना चाहते थे.... क्‍या करना चाहते थे शुद्रों के कानों में फिर से शीशा डलवाना चाहते थे... फिर इस गरीब पर क्‍या गुजरी होगी किसी फर्क पड़ता है... धर्म का कार्य पूर्ण हो गया, ब्राहम्‍णों ने आशीर्वाद दिया कि राम ने धर्म की रक्षा की... यह धर्म की रक्षा है... तुम कहते हो मौजूदा हालत खराब है ..
यदुष्ठिर जुआं खलते थे और तुम उन्‍हें धर्मराज कहते हो..आज किसी जुआरी को धर्मराज कहने की हिम्‍मत कर सकोंगे.. और जुआंरी भी छोटे-मोटे नहीं, सब जुएं पर दांव पर लगा दिया... पत्‍नी तक को दांव पर लगा दिया...यह तो बात भी अशोभनीय थी. क्‍योंकि पत्‍नी कोई संपत्ति नहीं थी...मगर उन दिनों यही धारणा थी स्त्री संपत्ति थी...उसी धारणा के अनुसार आज जब एक बाप अपनी बेटी का विवाह करता है तो उसे कहते हैं कन्‍या दान... क्‍या गजब कर रहे हो, गाय भैंस दान करों तोसमझ में आता है कन्‍यादान कर रहे हो.. यह दान.. स्‍त्री कोई वस्‍तु है यह असभ्‍य शब्‍द संस्‍कृत के बंद होने चाहिए... मगर यदुष्टिर धर्म राज थे.. और दांव पर लगा दिया अपनी पत्‍नी को भी, हद का दीवानापन रहा होगा.. पहुंचे हुए जुआंरी रहे होगें.. इतना भी होश नहीं रहा.... और फिर भी धर्मराज धर्मराज बने रहे.. ...इससे कुछ अंतर नहीं आया.. इससे उनकी प्रतिष्‍ठा में कोई अंतर नहीं आया.. भीष्‍म पितामह को ब्राह्म ज्ञानी समझा जाता था...मगर ब्रह्म ज्ञानी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे.. गुरू द्रोण को ब्रह्मज्ञानी समझा जाता था मगर द्रोण भी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे.. अगर कौरव अधार्मिक थे दुष्‍ट थे, तो कम से कम भीष्‍म पितामाह में इतनी हिम्‍मत होनी चाहिए थी वह बाल ब्रह्मचारी थे .. और इतनी भी हिम्‍मत नहीं.. तो खाक ब्रह्मचर्य था उनमें.. किस लोलुपता के कारण गलत लोगों को साथ दे रहे थे, और द्रोण तो गुरू थे अर्जुन के भी.. और अर्जुन को बहुत चाहा भी था.. लेकिन धन तो कौरवों  के पास था.. पद कौरवों के पास था.. संभावना भी यही थी की वही जीतेंगे.. राज्‍य उनका था, पाडंव तो भिखारी हो गए थे... इंच भर जमीन भी कौरव देने को राजी नहीं थे...और कसूर कुछ कौरवों का हो ऐसा कुछ लगा नहीं... जब तुम ही दांव पर लगाकर सब हार गए... तो मांगते किस मुंह से थे... मांगने की बात ही गलत थी... खुद ही हार गए अब मांगना क्‍या है... लेकिन गुरू द्रोण भी अर्जुन के साथ खड़े न हुए..... खड़े हुए उनके साथ जो गलत थे.. यही गुरूद्रोण एकलव्‍य का अगूंठा कटवा कर आ गए थे... अर्जुन के हित में.. क्‍योंकि तब संभावना थी कि अर्जुन सम्राट बनेगा... तब इन्‍होंने एकलव्‍य को इंकार कर दिया था शिक्षा देने से.. क्‍योंकि वह शुद्र था.. और तुम कहते हो मौजूदा हालत पसंद नहीं... उस गरीब का कसूर क्‍या था.. अगर उसने मांग की थी, प्रार्थना की थी, मुझे भी स्‍वीकार कर लो शिष्‍य की भांति...मुझे भी सीखने का अवसर दे  दो..लेकिन नहीं, एक शुद्र को कैसे सीखने का अवसर दिया जा  सकता है। मगर  एकलव्‍य अनूठा युवक रहा होगा... अनूठा इसलिए कह  रहा  हूं  कि  उसका खून  नहीं खौला...  खून  खौलता  तो  साधारण युवक कहलाता... सभी युवक  का  खौलता है इसमें कोई खास  बात  नहीं थी.. मगर  उसका नहीं खौला.....  शांत मन से  इसे  स्‍वीकार कर लिया.. एकांत जंगल में  जाकर गुरू द्रोण की  प्रतिमा  बना  ली और  उसी  प्रतिमा के  सामने धनुष विद्या का अभ्‍यास करता रहा.. उस गुरू के  सामने धनुष  विद्या  का  अभ्‍यास करता रहा जिसने उसे  शुद्र होने के कारण शिष्‍य नहीं बनाया था..  अपमान न लिया, अहंकार पर चोट तो लगी होगी लेकिन शांति से, समता से  पी गया... धीरे-धीरे खबर  फैलने  लगी... कि  वह  बड़ा विश्‍वनाथ हो गया है तो गुरूद्रोण को बैचनी होने लगी और खबर यह भी आने लगी थी कि वह अर्जुन उसके सामने कुछ भी नहीं...और अर्जुन पर ही सारा दांव था...अगर अर्जुन  सम्राट बने और सारे जग में सबसे बड़ा धनुषधर बने तो उनकी भी प्रतिष्‍ठा होगी.. कि उनका शिष्‍य उनका शागिर्द  ऊंचाई पर पहुंच जाए तो गुरू भी ऊंचाई पर पहुंच जाएगा....उनका सारा का  सारा स्‍वार्थ अर्जुन में  था.. और एकलव्‍य अगर  आगे  निकल जाए  तो बड़ी बेचैनी की बात  थी..तो यह बेशर्म आदमी जिसको ब्रह्म ज्ञानी कहा जाता था यह गुरू द्रोण जिसने इंकार कर दिया था एकलव्‍य को शिक्षा देने से... यह उससे दक्षिणा लेने  पहुंच गया.. शिक्षा देने से इंकार करने वाला गुरू जिसने दीक्षा ही  नहीं दी.. वो दक्षिणा लेने  पहुंच गया..
 हालात बड़े अजीब रहे होगें... शर्म भी  कोई चीज होती है इज्‍जत भी कोई बात होती है.. आदमी की नाक भी होती है गुरूद्रोण नाक कटे आदमी रहे होंगे..  किस मुंह से जिसको दुत्‍कार दिया था.. दक्षिणा लेने पहुंच गया उसके पास... फिर भी कहता हूं  एकलव्‍य अदभुत युवक था, दक्षिणा देने  के लिए  राजी हो गया...  उस गुरू को जिसने दीक्षा ही नहीं दी  कभी... दुत्‍कार दिया था... और कहा था कि तू शुद्र है.. हम शुद्र को शिष्‍य की तरह स्‍वीकार नहीं कर सकते.. तू  शुद्र है हम तुझे शिक्षा नहीं दे सकते.....बड़ें मजे की बात है कि जिस शुद्र को शिष्‍य की तरह स्‍वीकार नहीं कर सकते थे.. उस शुद्र की दक्षिणा कैसे स्‍वीकार कर सकते हो... मगर उसमें षड्यंत्र था, चालबाजी थी.. उसने चरणों में गिरकार एकलव्‍य ने कहा मैं गरीब हूं मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है फिर भी मैं आपको जो भी है मेरे पास सबकुछ  देने  को  राजी हूं.. जो  आप  मांगें.. तो क्‍या मांगा गुरू द्रोण ने...दाहिने हाथ का अगूंठा....हां जी दाहिने हाथ का  अगूठा काट कर हमको दे  दो.. यहां जालसाजी, अमानवीयता, कपट, कुटनीति की कोई सीमा नहीं रही....और यह तो  ब्रह्मज्ञानी थे उस  गरीब से  उसको अगूठा ही मांग लिया.... शिक्षा दी नहीं और दक्षिणा में अगूंठा मांग लिया.. हालात बुरे थे.. यहां हमेशा से सारे कलों की वर्तमान और अतीत की स्थिति बदतर थी.. यानि. हालात हमेशा से खराब थे . .
फिर भी आज रामराज्‍य की पुन: कल्‍पना की जा रही है... यानि सत्‍ताधारी चाहते हैं कि पुन: वो ही स्थिति बने जो रामराज्‍य में  आम जन की थी...शुद्रों की थी... बाजार में बेची जाने वाली एक वस्‍तु जो कहीं भी किसी के  द्वारा खरीदी और  बेची जा  सके.. और अधिकार की बात तो आप एक सिरे से भूल ही जाओं क्‍योंकि राम राज्‍य आएगा तो आपको तैयार होना पड़ेगा कानों में पिघलता हुआ शीशा  डालवाने  के  लिए..... औरतों को  बाजार में  बिकने के लिए.....औरतों के साथ अत्‍याचार के लिए... क्‍योंकि राम राज्‍य में  यही होता आया है...यही  चाहते हैं  तो  राम राज्‍य आना चाहिए....

Monday, February 19, 2018

विवाह संस्‍था के नियमों में बदलाव हो

विवाह संस्‍था के नियमों में बदलाव हो

यदि महिलाएं अपने सास-ससुर और पति से परेशान हैं, दहेज व घरेलू हिंसा जैसे कृत्‍यों से प्रताडित होती हैं। तो फिर उनको अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए... और अपने घरवालों से मांग करनी चाहिए कि विवाह जैसी संस्‍था में बदलाव करें, या फिर यह बदलाव वह स्‍वयं भी कर सकती हैं कि शादी के बाद लड़की ससुराल नहीं जाएगी...यदि शादी करना है तो लड़के को ससुराल में रहना पड़ेगा। यानि लड़का ससुराल जाएगा, लड़की नहीं..यदि यह बदलाव होता है तो फिर लड़कियां अपने परिजनों के साथ ही रहेगी... और फिर उसके ऊपर लड़का या लड़के के घरवाले अत्‍याचार नहीं कर सकेंगे...दहेज व घरेलू हिंसा से मुक्ति मिल जाएगी.... तो मांग करें और बदलाव करें विवाह जैसी संस्‍थाओं के नियमों में....

ब्लॉग निर्माण

ब्लॉग निर्माण


लिखना हम में से कई लोगों को पसंद होता है| जैसे-जैसे हमारा जीवन अनुभव बढ़ता जाता है वैसे-वैसे हमारे मन में विभिन्न प्रकार की विचार जन्म लेते हैं| कई बार हमें अपनी मन की बात इतनी पसंद आ जाती है कि हम उसे दुनिया को भी बताना चाहते हैं| इसके लिए हमारे पास विभिन्न माध्यमों के विकल्प हैं जिसका प्रयोग करके हम अपनी मन की इच्छा को सभी के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं|पहले लोग इस के लिए डायरी का इस्तेमाल करते थे लेकिन उस में मुश्किल यह है कि हम जो भी लिखते हैं वह बस हमारे और डायरी  बीच ही सीमित रह जाता है और उसे सुनाने के लिए किसी को तैयार करना भी एक मुश्किल काम ही होता है|क्योंकि सब की रुचियाँ एक सी नहीं होती| ऐसे में आज के टेक्निकल दौर में अपने विचारों की अभिव्यक्ति और अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए ब्लॉग  से अच्छा और क्या माध्यम हो सकता है? जहाँ आपको अपने ही जैसे लिखने की रूचि वाले कई लोगों से संपर्क का अवसर मिलता है|
ब्लॉग' वेब-लॉग का संक्षिप्त रूप है, जो अमरीका में '1997' के दौरान इंटरनेट में प्रचलन में आया। प्रारंभ में कुछ ऑनलाइन जर्नल्स के लॉग प्रकाशित किए गए थे, जिसमें इन्टरनेट के भिन्न क्षेत्रों में प्रकाशित समाचार, जानकारी इत्यादि लिंक होते थे, तथा लॉग लिखने वालों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ भी उनमें होती थीं। इन्हें ही ब्लॉग कहा जाने लगा। ब्लॉग लिखने वाले,ज़ाहिर है, ब्लॉगर कहलाने लगे। प्राय: एक ही विषय से संबंधित आँकड़ों और सूचनाओं का यह संकलन ब्लॉग तेज़ी से लोकप्रिय होता गया। ब्लॉग लिखने वालों के लिए प्रारंभिक दिनों में कंप्यूटर तकनॉलाजी के कुछ विषय मसलन एचटीएमएल भाषा का जानकार होना आवश्यक था। परंतु इसमें संभावनाओं को देखते हुए ब्लॉग लिखने और उसको प्रकाशित करने के लिए कुछ वेबसाइटस ने मुफ़्त और अत्यंत आसान औज़ार उपलब्ध किए जिसमें ब्लॉग लिखने के लिए आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाओं का ज्ञान आवश्यक नहीं होता है। इस कारण, देखते ही देखते '1997-98' के महज़ दर्जन भर ब्लॉग से बढ़कर दस लाख से अधिक का आँकड़ा पार करने में महज़ चार साल लगे। फिर ब्लॉग, विश्व की हर भाषा में, हर कल्पनीय विषय मैं लिखे जाने लगे। ब्लॉग को विश्व के आम लोगों में भारी लोकप्रियता तब मिली जब अफ़गानिस्तान पर अमरीकी हमले के दौरान एक अमरीकी सैनिक ने अपने नित्यप्रति के युद्ध अनुभव को ब्लॉग पर नियमित प्रकाशित किया। उसी दौरान एंड्रयू सुलिवान के ब्लॉग पृष्ठ पर आठ लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई, जो संबंधित विषयों के कई तत्कालीन प्रतिष्ठित प्रकाशनों से कहीं ज़्यादा थी। एंड्रयू अपने ब्लॉग के मुख पृष्ठ पर लिखते भी हैं - क्रांति ब्लॉग में दर्ज होगी, अब तो कुछ ऐसे ब्लॉग भी है जो इतने ज़्यादा लोकप्रिय है कि इनका सिंडिकेशन किया जाता है।
अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या हम भी ब्लॉग बना सकते हैं? जी हाँ बिल्कुल वो भी फ्री सेवा में| लेकिन मुश्किल यहाँ आ कर बढ़ जाती है जब हमारे मन में यह सवाल उत्पन्न होने लगता है कि आखिर इस को बनायें कैसे? परेशान होने की आश्यकता नहीं है क्योंकि आगे हम ब्लॉग निर्माण की ही बात करने जा रहे हैं|
सबसे पहली बात कि हम ब्लॉग किस प्लेटफार्म पर बनाएंगे? अगर आप वाकई  अपने विचारों, रचनाओं या टेलेन्ट के प्रदर्शन के लिए ब्लॉगिंग के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो महज दस मिनट के भीतर अपना ब्लॉग बना सकते हैं। ऐसे ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म्सकी कमी नहीं है जो सामान्य यूज़र को बहुत आसानी से नया ब्लॉग बनाने और उसे मेन्टेन करने की सुविधा देते हैं। ब्लॉग के लिए न डोमेन नेम दर्ज कराने की जरूरत है और न ही इंटरनेट पर वेब होस्टिंग स्पेस लेने की। इसके लिए बस किसी ब्लोगिंग प्लेटफार्म की आवश्यकता है| इस लिए ज़रूरी समझता हों की कुछ ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म्स की के बारे में भी बताते चलूँ|
ब्लॉगर डॉट कॉम : सबसे लोकप्रिय ब्लॉग प्लेटफार्मों में से एक, ब्लॉगर भारतीय ब्लॉगरों के लिए रोजमर्रा की बात बन चुकी है। अगर आप गूगल की किसी सेवा का इस्तेमाल करते हैं तो अपने उसी लॉगिन नेम और पासवर्ड से ब्लॉगर पर भी लॉग.इन कर सकते हैं। यहाँ एक से अधिक ब्लॉग बनाने, सामूहिक ब्लॉग चलाने, आरएसएस फीड्स देखने.पढ़ने, हिंदी में टाइप करने जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। डैशबोर्ड के जरिए ब्लॉग एडमिनिस्ट्रेश भी आसान हो जाता है। ब्लॉगर के ब्लॉग गूगल सर्च इंजनों में बेहतर रेटिंग पाते हैं इसलिए उनकी विजिबिलिटी ज्यादा है।
वर्डप्रेस डॉट कॉम : वर्डप्रेस ब्लॉगर की ही तरह ब्लॉगों के संचालन का बेहतरीन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। लेकिन ब्लॉगर के उलट, वह आपके ब्लॉग में नई सुविधाएं जोड़ने और उसे ज्यादा प्रोफेशनल लुक देने का मौका भी देता है। ब्लॉगर पर उपलब्ध ब्लॉग डिजाइन बहुत सिम्पल हैं, जबकि वर्डप्रेस पर उनकी ज्यादा बड़ी वैरायटी मौजूद है जो ज्यादा सुंदर और शालीन भी दिखते हैं। इसमें ब्लॉग शुरू करना ब्लॉगर जितना आसान नहीं है लेकिन एक बार ब्लॉग बन जाए तो फिर वहां उपलब्ध हजारों प्लग.इन्स, थीम्स और विजेट्स की मदद से उसे इम्प्रेसिव बनाया जा सकता है।
माईस्पेस डॉट कॉम : पश्चिमी देशों के युवाओं तथा किशोरों के बीच बेहद लोकप्रिय इस वेबसाइट को ब्लॉगिंग और सोशियल नेटवर्किंग के पायोनियर्स में गिना जाता है। यहां अपने विचार प्रकट करने के साथ.साथ दोस्तों के साथ गपशप भी संभव है और पसंदीदा संगीत,वीडियोज़, गेम्स और दिलचस्प लेखों को पोस्ट करने और दूसरों के साथ शेयर करने का आनंद भी लिया जा सकता है। माईस्पेस आपको अपनी अएनलाइन आइडेंटिटी तैयार     करने    का      मौका   देता     है। 
लाइवर्जनल डॉट कॉम : ऊपर दिए गए सभी प्लेटफॉर्म्स की ही तरह लाइवर्जनल भी पूरी तरह फ्री है। यहाँ ब्लॉगर जैसे फीचर्स तो मौजूद हैं ही (जैसे. सामूहिक ब्लॉग, कमेंट्स आदि), कुछ इनोवेटिव सुविधाएं भी हैं, जैसे पोल, कैलेंडर, अएनलाइन कम्युनिटी और फेसबुक जैसे कुछ सोशियल नेटवर्किंग फीचर्स। यह ओपन सोर्स पर आधारित है। 
मूवेबल टाइप डॉट कॉम : कुछ हद तक वर्डप्रेस जैसा महसूस होने वाला मूवेबल टाइप दो तरह से ब्लॉग होस्टिंग की सुविधा देता है. फ्री सेल्फ होस्टिंग पैकेज और अएनलाइन ब्लॉग होस्टिंग सव्िरस। पहला अएप्शन उन लोगों के लिए है जो अपनी निजी वेबसाइट पर मूवेबल टाइप का कोड इस्तेमाल कर ब्लॉग चलाना चाहते हैं। दूसरा उनके लिए जो ब्लॉगर या वर्डप्रेस की ही तरह मूवेबल टाइप द्वारा इंटरनेट पर उपलब्ध कराए गए फ्री वेब स्पेस पर ब्लॉग बनाना और चलाना चाहते हैं। एक से ज्यादा ब्लॉग बनाने, फाइलों को मैनेज करने, यूज़र्स के अलग.अलग रोल तय करने, आपकी सामग्री को कैटेगरीज में बांटकर दिखाने जैसी सुविधाएँ इसे अलग पहचान देती हैं।
भारत में ब्‍लॉग बनाने के लिए ब्‍लॉगर.कॉम सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय है।इसी लिए हम इसी की बात करेंगे और इस पर कैसी ब्लॉग निर्माण किया जा सकता है उस को बताएँगे|  यह ब्लॉग बनाने का बहुत आसान विकल्‍प है और इसके द्वारा बहुत आसानी से सारे संसार में अपनी बात पहुँचाई जा सकती है। ब्‍लॉग बनाने की सुविधा नि:शुल्‍क उपलब्‍ध है। इसके लिए सिर्फ एक इंटरनेट कनेक्‍शन, एक अदद कम्‍प्‍यूटर और एक ‘ईमेल आईडी’ की आवश्‍यकता होती है। यह ईमेल एकाउंट किसी भी वेबसाइट का हो सकता है।
सबसे पहले ब्‍लॉग बनाने के लिए इंटरनेट ब्राउजर में www.blogger.com टाइप करें। खुलने वाले पेज पर ‘यूजरनेम’और ‘पॉसवर्ड’ वाले खानों में अपने पहले से बनाए हुए ईमेल (यदि ईमेल एकाउंट न हो, तो पहले उसे बना लें) का यूजरनेम और पॉसवर्ड लिखें और ‘साइन-इन’ कर दें। उसके बाद सामने आने वाले फार्म में जरूरी जानकारी भरें और आगे बढ़े।
आगे बढ़ने पर आपसे ब्‍लॉग का नाम पूछा जाएगा। यह हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों में हो सकता है।इस में आप की मर्जी है की आप अपने ब्लॉग की किया नाम दे रहे हैं|
ब्‍लॉग के नाम के बाद अगला कॉलम ‘ब्‍लॉग एड्रेस’ का होता है। इसमें http:// तथा .blogspot.com पहले से लिखा होता है, उसके बीच में आप मनचाहा एड्रेस भर सकते हैं। यदि आप ‘सैरसपाटा’ नामक ब्‍लॉग बनाना चाहते हैं, तो आपके ब्‍लॉग का पता हो जाएगा  http://sairsapata.blogspot.com। लेकिन यदि इस नाम को पहले से किसी व्‍यक्ति ने रजिस्‍टर्ड करा रखा होगा, तो आप उसमें कुछ घटा बढ़ा  भी सकते हैं अथवा अन्‍य कोई अंक वगैरह जोड़ कर भी ट्राई कर सकते हैं। जो पता यहां पर स्‍वीकृत हो जाएगा,वही आपके ब्‍लॉग का ‘यूआरएल’ कहलाएगा और उसे टाइप करके पूरे विश्‍व में आपका ब्‍लॉग देखा जा सकेगा।
ब्‍लॉग का नाम, पता के बाद दूसरे स्‍टेप में आपसे ‘टेम्‍पलेट’ चुनने के लिए कहा जाएगा। टेम्‍पलेट का मतलब होता है, ब्‍लॉग का रंग-रूप। वहाँ पर जो भी डिजाइन उपलब्‍ध हों, उसमें से कोई एक चुन लें और ‘कन्‍टीन्‍यू’ करें। वर्तमान में आप अपने ब्‍लॉग के ‘पोस्टिंग’ मोड में हैं। ब्‍लॉग के नाम के नीचे जहाँ पर पोस्टिंग लिखा हुआ दिख रहा है, उसके दाईं ओर क्रमश: ‘कमेंट्स’ और ‘सेटिंग’ लिखा हुआ है। आप ‘सेटिंग’ विकल्‍प का चयन कर लें।‘सेटिंग’ मोड में सर्वप्रथम ‘बेसिक’ टैब होता है। उसमें पेज के नीचे की ओर ‘इनेबल ट्रांसलिटरेशन’ होता है। उसे ‘यस’ कर दें तथा किये गये संशोधन को ‘सेव’ कर लें। उसके बाद  सेटिंग के ‘फॉरमेटिंग’ टैब का चयन करें। इसमें ‘टाइम ज़ोन’ के सामने दिये गये विकल्‍पों में (GMT+05.30) India Standard Time तथा ‘लैंग्‍वेज’ में ‘हिन्‍दी’ का ऑप्‍शन चुन लें। ऐसा करने के बाद पेज के नीचे मौजूद ‘सेव’ ऑप्‍शन को क्लिक करके सभी सेटिंग को सुरक्षित कर लें।
ब्‍लॉग की सेटिंग संशोधित करने के बाद ‘पोस्टिंग’ और ‘सेटिंग’ वाली लाइन के ऊपर बाईं ओर नजर डालें। वहां पर ईमेल आईडी के बगल में ‘डैशबोर्ड’ लिखा नजर आएगा। इसे क्लिक करें,जिससे ब्‍लॉग का ‘डैशबोर्ड’ खुल जाएगा। ‘डैशबोर्ड’ में आप द्वारा बनाये गये  (सभी) ब्‍लॉग के उपलब्‍ध ऑप्‍शन, आपकी ब्‍लॉग सम्‍बंधी प्रोफाइल और आप द्वारा ‘फालो’(पसंद) किये गये अन्‍य ब्‍लॉगों की ताजी पोस्‍टें (लेख) प्रदर्शित होते हैं। डैशबोर्ड में बाईं ओर दिये ‘एडिट प्रोफाइल’ का चयन करें और जरूरत के अनुसार जानकारी भरकर अपनी प्रोफाइल अपडेट कर लें। यदि आपके पास अपने फोटो की डिजिटल इमेज हो, तो उसे भी यहां पर ‘अपलोड’ कर दें। इससे डैशबोर्ड में आपका फोटो दिखने लगेगा। संशोधन करने के बाद नीचे की ओर दिये ‘सेव’ बटन को दबा कर इन्‍हें सुरक्षित कर लें।
अब आप पुन: डैशबोर्ड में जाएँ। वहाँ पर ब्‍लॉग के नाम के नीचे पोस्टिंग, कमेंट्स, सेटिंग,डिजाइन, मोनेटाइज, स्‍टैट्स आदि विकल्‍प दिख रहे होंगे। ‘पोस्टिंग’ के द्वारा नया लेख लिखने और पुरानी पोस्‍ट को ‘एडिट’ (संशोधित) करने का काम किया जाता है। ‘कमेंट्स’ के द्वारा ब्‍लॉग पर आने वाली टिप्‍पणियों को मैनेज किया जाता है। ‘सेटिंग’ विकल्‍प के द्वारा ब्‍लॉग की तकनीकी व्‍यवस्‍था बदली जाती है। ‘डिजाइन’ के द्वारा ब्‍लॉग की बनावट संशोधित की जाती है तथा ‘मोनेटाइज’ के द्वारा ब्‍लॉग पर विज्ञापन लगाए जाते हैं। उसके बाद ‘स्‍टैटस’ का विकल्‍प है, जिसमें ब्‍लॉग पर आने वाले सभी पाठकों का विस्‍तृत विवरण दर्ज रहता है।
कैसे करें हिन्‍दी टाइपिंग? 
ब्‍लॉग में लिखना आरम्‍भ करने के लिए ‘डैशबोर्ड’ में‍ स्थित ‘पोस्टिंग’ विकल्‍प को चुनें और ‘न्‍यू पोस्‍ट’ के ‘कम्‍पोज’ मोड का चयन करके अपनी मनचाही बात लिखना शुरू कर दें। इस समय आपके ब्‍लॉग में ‘ट्रांसलिटरेशन’ सुविधा ऑन है, जिसके द्वारा आप रोमन अक्षरों का प्रयोग करके हिन्‍दी में लिख सकते हैं। जैसे अगर आपको लिखना है-‘मेरा भारत महान’। इसके लिए आप अपने कीबोर्ड से ‘टेक्‍स्‍ट एरिया’ में ‘meraa bhaarat mahaan’ लिखें, वह अपने आप ‘मेरा भारत महान’ में बदल जाएगा।
अगर आप को किसी वजह से ब्लॉग पसंद ना आया हो और उसे डिलीट करना चाहते हैं तो परेशान होने की ज़रुरत नहीं है बल्कि उस के लिए भी option मौजूद है आप सिर्फ यह करना होगा की | ‘बेसिक  टैब’ पर जाएं पूरी तरह से सुनिश्चित करें कि आप सही ब्‍लॉग पर हैं और आप स्‍थायी रूप से इस ब्‍लॉग को अपने खाते से निकालना चाहते हैं| फिर "delete blog" क्‍लिक करें. आपके ब्‍लॉग पर अपलोड किए गए फ़ोटो को छोड़कर, सब कुछ हटा दिया जाएगा|
जब हम ने ब्लॉग बना लिया और नियमित रूप से पोस्ट करना भी शुरू कर दिया है तो दिल में यह चाहत ज़रूर होती है कि हम जो लिख रहे हैं वह पाठकों तक भी पहुंचना चाहिए|अगर आप सिर्फ पोस्ट कर रहे हैं और इस खुशफ़हमी में हैं की लोगों तक मेरी बात पहुँच रही है तो शायद आप ग़लतफ़हमी में मगन हैं|अगर आप चाहते हैं की हमारे ब्लॉग के viewers की संख्या बढ़े तो इसके बहुत से तरीक़े हैं, इसमें सबसे उपयुक्त माध्यम  ब्लॉग एग्रीगेटर है| यहाँ पर बहुत से ब्लोगों का संकलन मौजूद रहता है|जिसमें आप भी अपने ब्लॉग को रजिस्टर कर सकते हैं| इस से आप को पाठक मिल जायेंगे और आप जो भी लिखेंगे वह तुरंत ही लोगों तक पहुँच जायेगा| हिंदी के कुछ ब्लॉग एग्रीगेटर के बारे में आप को अवगत कर देना चाहते हैं जहाँ पर आप ब्लॉग निर्माण के बाद उसको रजिस्टर कर सकते हैं|
     13.  ब्लॉगलॉग
इसी प्रकार प्रमुख सर्च इंजनों से जुड़ें, ई-मेल सब्सक्रिप्शन टूल लगाएं, अपने ब्लॉग रोल में अच्छे ब्लॉग्स को जगह दें, अच्छे ब्लॉग्स के फोलोअर बनें, सोशल नेटवर्किंग साइट्स और चैटिंग प्रोफाइल में ब्लॉग की जानकारी दें जहाँ पर अपने ब्लॉग का लिंक शेयर कर सकते हैं| ऐसी ही कुछ बेसिक बातें हैं जिन्हें आसानी के साथ काम में लाया जा सकता है| ब्लॉग viewers का फ़ायदा यह है कि जब बहुत से पाठक हमारी बातों को पढेंगे और  अपनी प्रतिक्रिया भी प्रदान करेंगे तो हमें इस से प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी उत्सुकता लिखने में बढ़ती चली जाएगी| दूसरा अहम फ़ायदा यह है की अगर हमारे ब्लॉग  में google एडसेन्स सर्विस मौजूद है तो इस से हमारा इनकम भी होता रहेगा| google 'एडसेन्स' एक ऐसा कायर्क्रम है जिसके लिए कोई भी वेबसाइट या ब्लॉग संचालक आवेदन कर सकता है। छोटी सी प्रक्रिया के बाद गूगल से एक कोड दिया जाता है जिसे अपने वेब.पेज में पेस्ट करने के बाद आपको गूगल द्वारा स्थानांतरित किए जाने वाले विज्ञापन मिलने लगते हैं। जिस पेज पर जैसी सामग्री, उसी तरह का विज्ञापन गूगल द्वारा स्वचालित ढंग से दिखाया जाता है। लेकिन एक उलझन है। आपको पैसे तब मिलते हैं जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है।जाहिर है अगर आप के पेज के visiters की संख्या ज़्यादा होगी तभी अधिक लोग उस विज्ञापन को क्लिक करेंगे|
संदर्भ :