सरोकार की मीडिया

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Tuesday, November 21, 2017

जूते की अभिलाषा

जूते की अभिलाषा

चाह नहीं मैं विश्‍व सुंदरी के पग में पहना जाऊं
चाह नहीं दूल्‍हे के पग में रह, साली को ललचाऊं
चाह नहीं धनिक के चरणों में, हे हरि डाला जाऊं
.सी. में, कालीन में घूमूं, और भाग्‍य पर इठलाऊं
बस निकाल कर मुझे पैरों से, उस मुंह पर तुम देना फेंक

जिस मुंह से भी नेताओं ने जनता से झूठे वादे किए अनेक....

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