सरोकार की मीडिया

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Sunday, June 5, 2011

बाबा को धरने पर बैठना है तो अकेले बैठकर दिखाए

क्रांतिकारियों का अपनी क्रांति दिखाने के लिए एक सुनहरा अवसर मिल गया है, इस अवसर को तथाकथित क्रांतिकारी भुना सकते है. और अपने आप को क्रांतिकारी साबित भी कर सकते हैं. शायद ऐसा न हो. वैसे जिस तरह का माहौल कल से लेकर आज तक गरमाया है सभी उससे भलीभांति परिचित है, और शायद ये भी कयास लगा रहे होगें कि कल क्या घटित होने की संभावना है.

जिन मुद्दों को लेकर बाबा रामदेव रामलीला मैदान पर अनशन पर बैठे, उनमें से 99 प्रतिशत मुद्दों को सरकार ने मान लिया था. पर हालात को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने रात को कार्रवाही करते हुए बाबा रामदेव को धरना स्थ ल से पकडकर उनको हरिद्वार भेज दिया. ये जो हुआ प्री प्लान था. परंतु इसमें निर्दोष जनता बीच में मारी गई. ये कहावत यहा उचित बैठेगी कि गेंहू के साथ घुन भी पिसता है. वही आलम जनता का भी हुआ. जनता बाबा रामदेव के बोल वचनों में आकर फंस गई और पुलिस की लाठयों का शिकार हुई. ये वाकई सरकार के द्वारा कराया गया निन्दनीय कार्य है. जिसका खामयाजा सरकार को भुगतना पडेगा. वही केन्द्रा में बैठे विपक्षी सरकार भी मौन साधे हुए है. मात्र 24 घण्टों का सत्या ग्रह. क्या साबित करना चाहते है. कि हम भी क्रांतिकारी है और सरकार द्वारा जिस तरह का कार्य किया गया है उसके खिलाफ हैं. नहीं, मात्र विपक्षी हीरों बनने की फिराक में हैं.

मैं बाबा रामदेव से एक बात पूछना चाहता हूँ कि कुछ समय पहले इन्होंने कहा था कि मेरे पास उन लोगों की सूची है जिनका पैसा विदेशी बैंकों में जमा है. कहां है वो सूची. उनमें किन-किन लोगों का नाम है. जिनकों बाबा रामदेव ने अभी तक उजागर नहीं किया. क्याम वो किसी को बचाना चाहते हैं. यदि वो वास्तिव में जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार के खिलाफ खडे हुए हैं तो ठीक है, नहीं तो चोर-चोर मौसेरे भाई का किस्साक यहां उचित बैठेगा. वैसे बाबा रामदेव ने हरिद्वार में अपना अनशन जारी कर दिया है, मेरे अनुसार कल तक हरिद्वार से भी उनका अनशन समाप्त हो जाएगा.

आज मैं उन माक्सववादी, समाजवादी, लेनिनवादी और क्रांतिकारी लोगों की तरफ मुंह तांक रहा हूँ जो अपने आप को उमदा किस्म के जनता के नुमायदे मानते है, और जनता पर हो रहे अत्यालचारों के खिलाफ आवाज उठाते है. फिर क्योंत चुप हैं सभी के सभी.
बाबा रामदेव में यदि कुवत है तो अकेले, बिना पंडाल के, बिना फंखे के और बिना किसी के सहयोग के धरने पर बैठकर दिखाये, तो उनको उनकी औकात समझ में आ जाएगी. कि जिस तरह से गरीब जनता अपने हक की लडाई लडता है तो उस पर क्या -क्या बितती है, ये तो वो ही जानता है. जब बाबा रामदेव कहां चले जाते है. शायद अलोम-विलोम करने.

बाबा को सभी योग गुरू के नाम से जानते है, वो खुद गरीब जनता को लुटते है. तब कहा जाता है बाबा रामदेव का का अनशन. वक्त रहते सभंल जाये तो ठीक है, नहीं तो जो जैसा करेंगा वैसा ही भरेंगा.



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