सरोकार की मीडिया

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Tuesday, February 13, 2018

श्रीकृष्‍ण और शिव को पूजना बंद कर दे.... इन्‍होंने भी प्रेम किया था


श्रीकृष्‍ण और शिव को पूजना बंद कर दे.... इन्‍होंने भी प्रेम किया था
आज वेलेंटाइन डे है.... उत्‍तर प्रदेश में रहने वाले सभी प्रेमी-प्रेमिकाओं को चेतावनी दी जाती है कि वह किसी बहाने से घर से बाहर न निकले.... क्‍योंकि कल बजरंग दल, शिवसेनाऔर अब तो योगी सरकार द्वारा गठित रोमियों स्‍कॉट वाले आपका इंतजार कर रहे होगें.. क्‍योंकि आप तो जानते ही हैं कि भारत में प्रेम करना कितना बड़ा अपराध माना जाता है....... वो भी एक लड़का और लड़की का प्रेम.....इसकी इजाजत भारत में रह रहे यह तथाकथित ठेकेदार नहीं देते...... पहले तो यह बजरंग दल, शिवसेना वाले ही प्रेमी-प्रेमिकाओं को परेशान करते थे अब तो योग सरकार ने रोमियों स्‍कॉट का गठन कर इन प्रेमी-प्रेमिकाओं की मुश्किलें और बड़ा दी हैं क्‍योंकि यह लड़के-लड़कियों को सुरक्षा तो मुहैया करवा नहीं सकते, बस यह लोग सिर्फ प्रेमी-प्रेमिकाओं को परेशान कर सकते हैं उनके साथ बदसलूकी करने की जैसे इनको आजादी मिल गई है.... हां यह और कुछ नहीं कर सकते... किसी महिला की आबरू नहीं बचा सकते.... तब तो कहीं से कन्‍नी काट कर तमाशा देखते नजर आ जाएंगे.....मुझे बजरंग दल वाले, शिवसेना वाले एक बात अपने-अपने गिरवाने में झांक कर अपने-अपने मां-बाप की कसम खा कर बताए कि क्‍या कभी उन्‍हें लड़की से प्रेम नहीं हुआ होगा.... फिर यह दिखावा क्‍यों.... आपको तो इन प्रेम करने वालों की रक्षा करनी चाहिए. उनको प्रताडित नहीं करना चाहिए..... साथ ही उन लड़कों को दंडित करें जो बुरी नीयत रखते हैं लड़कियों के प्रति, उन्‍हें तंग करते हैं, परेशान करते हैं......तब शायद आपका होना सार्थक प्रतीत हो... वैसे यदि आप सब को प्रेम करने वालों से इतनी एलर्जी  है  तो फिर श्रीकृष्‍ण को पूजना बंद कर दे... शिव को पूजना बंद कर दे.... इन्‍होंने भी प्रेम किया था....  

Wednesday, February 7, 2018

शीघ्र ही बनेगा पकौड़ा मंत्रालय : (पकौड़ा मंत्री ऑफ इंडिया)


शीघ्र ही बनेगा पकौड़ा मंत्रालय : (पकौड़ा मंत्री ऑफ इंडिया)

मोदी जी भारत सरकार में जल्‍दी ही एक नया विभाग पकौड़ा मंत्रालय बनाने जा रहे हैं। जिसे लेकर मोदी ने आज लोकसभा व राजसभा के दोनों सदनों में अपनी 4 साल की सफल योजनाओं को गिनवाते हुए  कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 4 सालों में जो भी योजनाओं को लागू किया है उससे देश को लाभ पहुंचा है। और हमारी सरकार द्वारा शीघ्र ही बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए एक नया मंत्रालय गठित करने जा रही है। मोदी ने आगे अपने भाषण में कहा कि इस मंत्रालय में कई तरह की रोजगार योजनाओं का संचालन किया जाएगा। जिसमें एक योजना राष्‍ट्रीय पकौड़ा रोजगार योजना होगी, तो वहीं दूसरी प्रधानमंत्री चाय-पकौड़ा उज्‍ज्‍वल भविष्‍य रोजगार योजना भी होगी।
मोदी के भाषण के उपरांत बीजेपी (भारतीय जनता के पकौड़े) द्वारा पीएम की योजना की सराहना करते हुए कहा कि पकौड़ा मंत्रालय बनने के बाद इसके अंतर्गत कई बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। आगे यह भी कहा कि मंत्रालय को हरी झंडी मिलते ही पकौड़ा मंत्रालय शीघ्र ही पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं से आवेदन पत्र आमंत्रित कर सकती है। इसके लिए पकौड़ा मंत्रालय ने शौक्षणिक योग्‍यता 10वीं पास से लकर पीएच.डी तक रखी है साथ ही आवेदन शुल्‍क भरने के लिए पी.एम. (पकौड़ा मंत्री ऑफ इंडिया) अतिशीघ्र आवेदन भरने वाले के खाते में 15 लाख की धनराशि हस्‍तांतरण करने वाले हैं।
वैसे पीएम द्वारा पकौड़ा मंत्रालय की चर्चा देश में ही नहीं विदेशों में भी जोर-शोर से हो रही है। जिसको ध्‍यान में रखते हुए प्रतिद्वंद्वी चीन वालों ने भारत के बाजार में सस्‍ते पकौड़े लाने की योजना बनानी शुरू कर दी है। साथ ही पाकिस्‍तान के आंतकवादियों ने भी भारत में जहर से भरे पकौड़ों को भेजने की कवायतें तेज कर दी हैं। वहीं देश में हल्‍दीराम भुजियावाला भी शीघ्र ही अपना नाम बदल कर हल्‍दीराम पकौड़ेवाला करने वाला है और तो और पकौड़े के बाजार में मुनाफे को देखते हुए रामदेव बाबा भी जल्‍द ही पतांजलि पकौड़ा बाजार में लाने की फिराक में दिखाई दे रहे हैं।  वैसे लगता है कि आने वाले समय में एक घोटाला और होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हां यह घोटाला पकौड़ा घोटाला हो सकता है। जिस पर 2019 के बाद सीबीआई से लेकर तमाम तरह की जांच एजंसियों को लगना पड़ेगा... ताकि वास्‍तविक पकौड़ा मंत्रालय द्वारा किए गए पकौड़ा घोटाले का पता लगाया जा सके। हालांकि जिस तरह की स्थिति देखी जा रही है उसके यहीं कहावत सार्थक प्रतीत होती है कि ‘’अंधरे नगरी चौपट राजा...टके सेर पकौड़ा, टके सेर खाजा’’


Tuesday, February 6, 2018

बेरोजगार बनाम पकौड़े

बेरोजगार बनाम पकौड़े

जब से सरकार और सरकार के रहनुमाओं द्वारा कहा गया है कि बेरोजगारों को पकौड़े बनाने चाहिए.. तो एक बात सरकार यह बताए कि पकौड़े कहां पर बेचे.. क्‍योंकि उसके लिए एक जगह/दुकान की आवश्‍यकता होती है... तो क्‍या सरकार सभी बेरोजगारों को एक-एक दुकान मुहैया करवा रही है....और यह भी बता दे कि जब सारे बेरोजगार युवा पकौड़े बनाएंगे तो फिर उन बने हुए पकौड़ों को खरीदेगा कौन... क्‍या सरकार ने बने हुए पकौड़ों को खरीदकर विदेश भेजने की कोई योजना अपने जहन में बना रखी है... ताकि बेरोजगार द्वारा निर्मित पकौड़ों को खपाया जा सकें...या फिर सरकार ने संसद में सांसदों और विधायकों को दी जाने वाली सब्‍सीडी खत्‍म करके, लोकसभा और राज्‍य सभा में यह विधियक पारित करने की योजना बना ली है कि अब से लोकसभा और राज्‍य सभा के सत्रों के दौरान सिर्फ और सिर्फ पकौड़े मिलेंगे... इसके अतिरिक्‍त उन्‍हें यदि कुछ और चाहिए होगा तो 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ लेना होगा.... इसके साथ-साथ जितने भी विदेश मंत्रियों का भारत आगमन होगा उन सभी का स्‍वागत भी पकौड़ों से ही किया जाएगा...साथ ही जब-जब सरकार के मंत्रियों द्वारा प्रेसवार्ता की जाएगी या फिर किसी तरह का कोई कार्यक्रम या रैली का आयोजन किया जाएगा तो उसमें भी पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को सिर्फ पकौड़े ही खिलाए जाएंगे... तभी तो बन हुए पकौड़ों की खपत हो सकती है... वैसे इसके बाद भी यदि पकौड़े बच जाए तो सरकार द्वारा प्रति महीने के हिसाब से मुआवजा देने के प्रावधान के बारे में अरूण जेटली आगामी बजट सत्र में घोषणा कर सकते हैं... तो युवा तैयार हो जाए पकौड़े बनाने के लिए...... 

Friday, February 2, 2018

सोचने वाली बात......

सोचने वाली बात......
1.       प्रवीण तोगड़िया के बच्चे हैं, कभी उसको किसी उपद्रव में शामिल देखा हैं?
2.       स्मृति ईरानी के बच्चे शाखा क्यों नहीं जाते...??
3.       सुब्रमण्यन स्वामी के बच्चों की लाईफ सेट है....??
4.       सुशील मोदी के बच्चे बजरंग दल में नजर नहीं आते....??
5.       कभी सुना कि आडवाणी के घर का कोई बच्चा भगवा झंडा अदालत में लहराता पकड़ा गया...??
6.       वसुंधरा राजे भी कभी मंदिरों में नजर नहीं आती...??
7.       नरेंद मोदी के घर के कितने लोग सड़क पर हिंदूवादी भीड़ में निकलते हैं...??
8.       रमन सिंह के बच्चे बिना किसी हिंदू आंदोलन के जुड़े सांसन बन जाते हैं..??
9.       विनय कटियार का बेटा क्या किसी उन्मादी भीड़ में था..??
10.     कल्याण सिंह के बहू, बेटी, नाती सब सांसद विधायक बन गए जो कभी सड़कों पर उतरे ही नहीं...??
11.     शिवराज सिंह चैहान के बच्चे को वंदेमातरम् पूरा गीत नहीं आता...??
12.     मुरली मनोहर जोशी की दोनों बेटियां क्या करती हैं...??
13.     पूनम महाजन हो या पंकजा मुंडे, बाप की वजह से सांसद व विधायक हैं..??
14.     अमित शाह के बेटे को आप सब जानते ही हो..??

पागल हो जाने से पहले सोचिए कि राजस्थान की आदलत परिसर पर भगवा झंडा फहराने से लेकर, बाबरी के गुंबद तक चढ़े और मर रहे, गिरफ्तार हो रहे, लाठी-गोली खा रहे नौजवानों में इनके परिवार से कौन था...?? और आप अपने बच्चों को इनके और इनकी विचारधारा के हाथों इस्तेमाल होने दे रहे हैं...? थोड़ा दिमाग लगाइए, ये सिर्फ यूज एंड थ्रो की राजनीति है साहब....अपने बच्चों को इस जहर से बचाइए.....बाकि आप स्वयं बुद्धजीवी है।

Wednesday, January 24, 2018

एक बार पुन: विचार करें- पद्मावत के रिलीज पर

एक बार पुन: विचार करें- पद्मावत के रिलीज पर

पद्मावती ऊर्फ पद्मावत को रिलीज करने की आखिर जरूर ही क्‍या है, एक फिल्‍म रिलीज नहीं होगी तो तारा सिंह पाकिस्‍तान नहीं जाएगा.... अरे भाई वो तो जाएगा ही जाएगा...वैसे रिलीज नहीं होगी तो कौन सा पहाड़ टूट जाएगा.... आखिर न्‍यायालय रिलीज करने पर इतना जोर क्‍यों दे रही है... जबकि वो देख रही है कि किस तरह के हालात पनप रहे है, चारों तरफ करणी सेना वाले उत्‍पात मचा रहे हैं.. आगजनी कर रहे हैं, हाईवे जाम कर रहे हैं, सरकारी बसों को आग के हवाले किया जा रहा है। यहां तक की अम्‍बुलेंस को भी नहीं बक्‍सा जा रहा। क्‍योंकि उनके पता है उनका कुछ नहीं होने वाले, सरकार उनका सहयोग करेगी ही करेगी क्‍योंकि कुछ राज्‍यों में विधानसभा के चुनाव आने वाले हैं और वो सहयोग नहीं करेगी तो एक बहुत बड़े तबके का वोट बैंक उनके हाथों से निकल जाएगा। यह बात तो माननीय न्‍यायालय को भी ज्ञात है। बावजूद वो एक फिल्‍म को रिलीज करवा रही है......वैसे भारत देश में हर साल लगभग 500 फिल्‍में बनाई जाती हैं जिनमें से कुछ सिनेमा घरों की दहलीज पर पहुंचकर करोड़ों रूपयों का कारोबार करती हैं तो बहुत सारी फिल्‍में सिनेमा घरों की दहलीज पर तो पहुंचती है परंतु एक दो दिन की शोभा बनकर उतर जाती है। वहीं बहुत सारी फिल्‍में कचड़े के डिब्‍बे में चली जाती हैं। ऐसा हर साल होता है। फिर एक फिल्‍म पर इतना हंगामा क्‍यों.... जिस प्रकार का माहौल पैदा हो रहा है चारों तरफ सरकारी संपत्ति का नुकसान किया जा रहा है इसका भुगतान क्‍या माननीय न्‍यायालय करेगी या फिर संजय लीला भंसाली करेंगे.... यह बात समझ से परे है। माननीय न्‍यायालय ने तो आदेश दे दिए कि 25 जनवरी को पूरे देश में फिल्‍म रिलीज की जाए... परंतु उन्‍होंने हालात का जायजा क्‍यों नहीं लिया कि कुछ प्रदेश की सरकार अगामी चुनाव के चलते हाथों में झुनझुना थामें बैठी है। जिसे केवल इन लोगों के लिए बजाया जा रहा है ताकि वो उनके पक्ष में उनकी पार्टी को वोट दे..... नहीं तो अभी तक जिन राज्‍यों में चुनाव होने वाले हैं वहां के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री ने अभी तक इस मुद्दे पर अपना वक्‍तव्‍य क्‍यों नहीं दिया कि माननीय न्‍यायालय ने जब आदेश पारित कर दिया है तो राज्‍यों में कानून व्‍यवस्‍था को दुरूस्‍त करते हुए फिल्‍म रिलीज होगी ही होगी.... फिर चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। इस मामले पर न तो गृह मंत्री और न ही प्रधानमंत्री ने करणी सेना से शांति बनाए रखने और फिल्‍म के रिलीज होने पर कोई अपील की। क्‍या देश में उत्‍पन्‍न हालात उनको दिखाई नहीं दे रहे....दे भी रहे हो तो क्‍या फर्क पड़ता है.. घूमने से फुर्रत मिले तो इस बात पर विचार किया जाए...

वैसे माननीय न्‍यायालय को चाहिए था कि इस फिल्‍म के रिलीज होने पर रोक ही लगा देते तो मामला रफा-दफा हो जाता, पद्मावत फिल्‍म में चाहे कुछ हो परंतु एक तबके को लगता है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है और यह उनके धर्म, उनकी भावना और उनकी माता (जो अभी तक नदारत थी) को ठेस पहुंचा रही है तो रोक लगा देनी चाहिए... क्‍योंकि अभी तो सिर्फ करणी सेना वाले इस फिल्‍म का विरोध कर रहे हैं कहीं दूसरे समुदाय के लोग (मुस्लिम वर्ग)भी इस फिल्‍म के विरोध में न उतर आए....तब मामला फिर कुछ और ही रूप इख्तियार कर लेगा... तो देश के लिए हितकारी साबित नहीं होगा.... हालांकि सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह के मैंसेज फिल्‍म पद्मावत को लेकर आ रहे हैं कि इस फिल्‍म को पाकिस्‍तान में रिलीज करवा देना चाहिए.....पाकिस्‍तान का मामला ही खत्‍म हो जाएगा, क्‍योंकि करणी सेना अपने भी देश में अपने लोगों के साथ जिस तरह का उत्‍पात मचा रही है सोचों वो पाकिस्‍तान के साथ क्‍या करेगी....खैर जो भी हो हालात तो मद्देनजर रखते हुए माननीय न्‍यायालय को एक बार पुन: विचार करना चाहिए और इस फिल्‍म पर रोक लगा देनी चाहिए.... न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.....। 

Monday, December 4, 2017

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर


महापौर(ईवीएम)
कुल पद-16 
निर्वाचन परिणाम-16
भाजपा जीती-14
हारी-2

नगर पंचायत अध्यक्ष(बैलेट पेपर)
कुल पद-438
निर्वाचन परिणाम-437
भाजपा जीती-100
भाजपा हारी-337

नगर पंचायत सदस्य(बैलेट पेपर)
कुल पद-5434
निर्वाचन परिणाम-5390
भाजपा जीती-662
भाजपा हारी-4728

नगर पालिका परिषद अध्यक्ष(बैलेट पेपर)
कुल पद-198
निर्वाचन परिणाम-195
भाजपा जीती-68
भाजपा हारी-127

नगर पालिका परिषद सदस्य(बैलेट पेपर)
कुल पद-5261
निर्वाचन परिणाम-5217
भाजपा जीती-914
भाजपा हारी-4303
भाजपा को ईवीएम का सहारा है।

Sunday, December 3, 2017

जहर बेचता हूं.......

जहर बेचता हूं.......

एक काम के सिलसिले में उरई जाना हुआ, जब मैं घर से निकला तो मैंने उरई जाने के लिए राप्‍ती सागर एक्‍सप्रेस ट्रेन पकड़ी, जो अपने निर्धारित समय से 4 घंटे की देर से चल रही थी। सुपरफास्‍ट, शताब्‍दियों और माल गाडियों से पीटने-पीटाने के उपरांत आखिर ट्रेन आ ही गई। चूंकि तत्‍काल जाना पड़ा तो आरक्षण था नहीं, और जनरल बोगियों की हालत ऐसी थी जैसे इन बोगियों में यात्री नहीं भेड़-बकरियां यात्रा कर रही हो... तो जनरल बोगी में न चढ़ते हुए आरक्षिण बोगी में घुस गया। कुछ समय के उपरांत टिकट चेकिंग करने वाला टीसी आया जिसने टिकट पूछा... तो जनरल का टिकट उसकी ओर बढ़ा दिया। जिसको देखकर उसने तत्‍काल प्रभाव से कहा....यह तो जनरल टिकट है और आप आरक्षित बोगी में है तो फाइन भरना पड़ेगा... कुछ देर भहस के उपरांत उसने फाइन न लेते हुए जनरल और आरक्षित के बीच का डिफरेंट बना दिया। चूंकि आरक्षित सीटें पहले से ही भरी हुई थी तो सीट मिलना असंभव था। इसके बाद मैं एक साइट लोवर सीट पर गया जहां पहले से ही एक या‍त्री लेटा हुआ था। जैसे ही मैंने उससे आग्रह किया तो उसने थोड़ा ना नुकुर के बाद मुझे थोड़ी सी जगह दे दी। कुछ समय के बाद हम दोनों में बातें शुरू हो गई। पहले बातों का सिलसिला आम बातों से शुरू हुआ... कहां जाना है कितना समय लगेगा बगैरा-बगैरा। जबाव में मैंने उससे कहा कि यदि ट्रेन लेट नहीं हुई तो लगभग 3 घंटे लगेगें... जिसके प्रति उत्‍तर में उसने सिर्फ सिर को हिलाकर उत्‍तर देना मुनासिब समझा। फिर एक सन्‍नाटा छा गया....
कुछ समय के उपरांत उस सन्‍नाटे को मैंने ही तोड़ा और उससे पूछा कि आप कहा जा रहे हैं और आप क्‍या करते हैं.... पहले सवाल का जबाव मिला कि मैं लखनऊ जा रहा हूं और दूसरे सवाल के जबाव ने मानों अचरच में डाल दिया। जब उसने कहा कि मैं जहर (स्‍लो प्‍वाइजन) बेचता हूं.... तरह-तरह का जहर.... जिसे बड़े-बड़े उद्योगपति निर्मित करते हैं और हम थोड़े से मुनाफे के लिए बेचते हैं। उसकी यह बात समझ में नहीं आई कि जहर बेचते हैं और किस तरह का जहर.... तब उसने बात साफ की कि मैं एक पान की गुमटी चलाता हूं... जहां मैं तरह-तरह की तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी बेचने का काम करता हूं। जिसे लोग अपने शौक के लिए इस्‍तेमाल करते हैं.....दिन भर में मेरे पास सैंकड़ों लोग आते हैं... और यह जहर मांगते हैं.... कोई राजश्री मांगता है, कोई करमचंद, कोई गुरू, कोई विमल, कोई रजनीगंधा, कोई कैप्‍टन, कोई गोल्‍ड फैलेक मांगते हैं और हम इसी तरह के और भी जहर हम अपनी दुकान पर बेचते हैं।
वैसे सभी जानते हैं कि यह जहर है जो उनके शरीर को एक बार में खत्‍म नहीं करेगा अपितु धीरे-धीरे उस दशा में ले आएगा जहां उसके शरीर में पाई जाने वाली कोशिकाएं इतनी क्षीण हो जाती है कि वह शरीर में उत्‍पन्‍न रोगों से लड़ने में असक्षम प्रतीत होगी। जब यह कोशिकाएं बीमारियों में लड़ने में असक्षम हो जाती है तो मनुष्‍य का शरीर विभिन्‍न-विभिन्‍न रोगों से ग्रस्‍त हो जाता है और आखिरकर उसकी मौत हो जाती है।
उसके इस प्रतिउत्‍तर से मैं भौंचक्‍का सा हो गया... कि इस पान गुटमी वाले ने कितना सही और सटीक जबाव दिया। उसने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मैं किसी के घर जहर देने नहीं जाता.. लोग स्‍वयं ही मेरे पास आते हैं। जिस तरह शराब बेचने वाला घर-घर जाकर शराब नहीं बेचता, वह स्‍वयं ही शराब की दुकानों पर जाता हैं और शराब खरीदते हैं पीते हैं और अपने आपको बर्बाद करते हैं। जबकि उनको पता है कि शराब के सेवन से उनके शरीर को नुकसान पहुंचेगा उसी प्रकार हम लोग कहीं नहीं जाते यह लोग स्‍वयं ही हमारे पास आते हैं और जहर की मांग करते हैं..... फर्क सिर्फ इतना है कि इन पुडियों पर जहर की जगह उन कंपनियों के ब्रांड का नाम लिखा होता है। यदि जहर भी लिखा होगा तो खरीदने वाले उसे भी खरीद कर खाते..... वहीं सरकारों को देखिए करोड़ों रूपया विज्ञापनों पर खर्च करती है कि इसके सेवन से ऐसा हो जाएगा....इसके सेवन से वैसा हो जाएगा... पर कभी सरकारों ने सोचा है कि यदि इनको हटा ही दिया जाए तो सारे फसाद की जड़ ही खत्‍म... पर वह नहीं चाहती क्‍योंकि उनको इन सब की बिक्री पर दुगना टैक्‍स मिलता है, और फिर इनसे ही डॉक्‍टरों की दुकानें, दवाईयों की दुकाने और इन पर कार्य करने पर लाखों लोगों का घर भी तो इसी से चलता है.. तो वह कैसे इनकी बिक्री पर रोक लगा सकती है। वह तो सिर्फ खानापूर्ति करती है और विज्ञापनों पर रूपया खर्च करके समझती है कि हमने तो अपनी इतिश्री कर दी अब आप जाने.... हम भला लोगों को खाने-पीने से कैसे रोक सकते हैं। अरे भई जब बिकेगा ही नहीं तो लोग खाएंगे कहां से.... तुम बिकवा रहे  हो तो लोग खा रहे हैं।

उनकी इन बातों से मन सोचने पर जरूर मजबूर हो गया कि सरकार करोड़ों रूपया इन विज्ञापनों पर खर्च करती है पूर्णत: प्रतिबंध क्‍यों नहीं लगा देती.... यदि देखा जाए तो करोड़ों दुकानों पर यह जहर खुले आम बेचा जा रहा है... हां कुछ समय पहले सरकार ने गुटखा पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया था परंतु हुआ यह कि पहले लोग गुटखा फाड़ कर सीधे ही खा लेते थे  पर अब उसको मिलाते और हिलाते देखा जा सकता है। खैर मेरा स्‍टेशन आ गया था.. तो हमने उससे विदा ली और उरई  स्‍टेशन पर उतर गया। परंतु उसकी यह बात आज भी मेरे जहन में कौंध रही है कि मैं तो जहर बेचता हूं.......