सरोकार की मीडिया

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Monday, May 1, 2017

वाह रे आदमी

वाह रे आदमी

आदमी अच्‍छे रास्‍ते पर नहीं जाता
पर बुरे रास्‍ते पर सभी जाते हैं
इसलिए दारू बचने वाला कहीं नहीं जाता
पर दूध बेचने वाले को घर-घर, गली-गली, कोने-कोने में जाना पड़ता है
और दूध बेचने वाले से बार-बार पूछा जाता है पानी तो नहीं डाला, पानी तो नहीं डाला
पर दारू में खुद पानी मिला-मिलाकर पीते हैं... वाह रे दुनिया...वाह रे दुनिया
वाहे रे दुनिया तेरी रीत...
जो भाग्‍य में है वो भाग कर आएगा
जो नहीं है वो आकर भी भाग जाएगा
जिंदगी...यह जिंदगी को इतना सीरियस लेने की जरूरत नहीं है यारों
यहां से जिंदा बचकर न कोई गया है, न कोई जाएगा
इक सच बात यह भी है कि
अगर जिंदगी इतनी अच्‍छी होती, तो हम ये दुनिया में रोते रोते न आते
मगर मीठा सच यह भी है कि अगर जिंदगी बुरी होती, तो जाते-जाते रूलाकर ना जाते
वारे आदमी... तेरे करेक्‍टर
लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है
पर बेजुबान जीव को मार कर खाता है
यह मंदिर-मस्जिद भी क्‍या गजब की जगह है दोस्‍तों
यहां गरीब बाहर और अमीर अंदर भीख मांगता है
विचित्र दुनिया का कठोर सत्‍य
बारात में दुल्‍हे सबसे पीछे और दुनिया आगे चलती है
मइ्यत में जनाजा आगे और दुनिया पीछे चलती है
यानी दुनिया खुशी में आगे... और दुख में पीछे जाती है
अजब तेरी दुनिया... गजब तेरा खेल
मोमबती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबती बुझाकर जन्‍मदिन मनाना
नई सदी मिल रही है दर्द भरी सौगात
बेटा कहता है बाप से तेरी क्‍या औकात
पानी आंखों का मरा, मरी शर्म और लाज
कहें बहू अब सास से, घर में मेरा राज
भाई भी करता नहीं, भाई का विस्‍वास
बहन पराई हो गई, साली खासमखास
मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश
बापू को बोझ समझे, पत्‍थर लगे गणेश
बचे कहां अब शेष है, दया, धर्म और ईमान
पत्‍थर के भगवान है, पत्‍थर दिल के इंसान
पत्‍थर को लगते हैं छप्‍पन भोग
मर जाते हैं फुटपाथ पर भूखे प्‍यासे लोग
पहन मुखौटा धर्म का, करते दिन भर पाप
भंडारे करते फिरे, घर में भूखा बाप
वाह रे आदमी, वाह रे इंसान

गजब तेरी दुनिया, गजब तेरे ख्‍बाव......

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