सरोकार की मीडिया

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Friday, August 4, 2017

हिटलर: एक परिचय

हिटलर: एक परिचय
नोट------ ये पोस्‍ट सिर्फ और सिर्फ हिटलर के अलावा इस पोस्‍ट से अगर किसी और की समानता पाई जाती है तो इसे केवल संयोग होगा....
1.हिटलर ने शादी नहीं की थी।
2.हिटलर एक धर्म विशेष के लोगों को देश दुश्‍मन मानता था।
3.हिटलर के समर्थकों को उसकी आलोचना बर्दाशत नहीं होती थी।
4.हिटलर ने बचपन में पेंट करने और रंग बेचने का काम किया था।
5.सारे प्रचार के साधन अखबार, पत्र, पत्रिकाएं हिटलर के प्रचार में लगे थे।
6.हिटलर अपने विरोधियों को देशद्रोही कहता था।
7.हिटलर नाजी पार्टी में साधारण सदस्‍य के तौर पर भर्ती हुआ था और फिर अपने सारे विद्रोहियों को समाप्‍त कर पार्टी का नेता बन गया था।
8.हिटलर ये प्रचार करके सत्‍ता में आया था कि वो देश की सभी समस्‍याओं को चुटकी में खत्‍म कर देगा।
9.हिटलर ने सत्‍ता प्राप्ति के लिए नारा दिया था ‘Good Times Will Come’ मतलब अच्‍छे दिन आएंगे
10.हिटलर की पार्टी जब जीती और वह पहली बार जर्मनी की संसद में गया तब वह खूब रोया।
11.हिटलर ने झूठ बोलकर सत्‍ता हासिल की।
12.हिटलर को सजने संवारने का बहुत शौक था।
13.हिटलर झूठ को सच बताने की कला में माहिर था।
14.हिटलर हमेशा मैं मैं मैं ही किया करता था।
15.हिटलर को रेडियो पर भाषण देने का बड़ा शौक था।
16.हिटलर की एक प्रेमिका थी जिसकी वह जासूसी करवाता था।
17.हिटलर अपने भाषणों में फ्रेंड्स फ्रेंड्स मतलब मित्रों, मित्रों, का उपयोग करता था।
18.हिटलर को फोटो खिंचवाने का बड़ा शौक था।
एक कड़वा सत्‍य
हिटलर जब तक लोकप्रिय रहा, जब तक जर्मनी बर्बाद ना हो गया

जिसको समझ में आए उसे वंदन, न समझ आए उसे अभिनंदन......

Monday, July 31, 2017

नैतिकता की नंगई

नैतिकता की नंगई
सिर्फ लालू और लालू का परिवार ही भ्रष्‍टाचारी हैं बाकि तो सब दूध के धुले हुए हैं.....देखिए एक झलक....
1.  नरोत्‍तम मिश्रा को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... उन पर तो आरोप भी साबित हो गए हैं
2.  सुषमा स्‍वराज को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... वो तो ललित मोदी की हेल्‍पर हैं, और उनकी बेटी ललित मोदी की वकील भी हैं.... और तो और सुषमा ने तो इस भगोड़े के लिए सिफारिशी चिट्ठी भी लिखी थी।
3.  जेटली को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... डीडीसीए वाले मामले में आपके ही सांसद कीर्ति आजाद ने जेटली के बारे में कितने कुछ नहीं कहा।
4.  वसुंधरा को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... वो भी ललित मोदी की हेल्‍पर है, और उनके बेटे की कंपनी में ललित का इनवेस्‍मेंट भी है, ललित मान भी चुका है कि वह वसुंधरा का साथी है।
5.  निहालचंद को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... यह तो बलात्‍कार के मामले में फंसे हैं।
6.  शिवराज सिंह चौहान को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर व्‍यापम और डंपर घोटाले का आरोप भी है और न जाने कितने लोगों को मारवा दिया व्‍यापम में।
7.  ईरानी मैम को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर येल यूनिवर्सिटी से डॉक्‍टरेट करने का आरोप है।
8.  सुशील मोदी क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर ट्रेजरी घोटाले का आरोप है।
9.  गडकरी को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते...इन्‍होंने साफ साफ घोटले किए और ड्राइवर को डायरेक्‍टर तक दिखा दिया.. पूर्ति घोटाला किया और सिंचाई स्‍कैम भी इन्‍हीं के सिर पर है।
10.         उमा भारती को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर तो चार्जशीट भी दाखिल हो गई है।
11.         योगी ठाकुर आदित्‍यनाथ को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर कितने के लंबित हैं जिनकी गिनती ही नहीं है, अटैप्‍ट टू मर्डर भी इन पर लगा है चाहे तो एफिडेविट देख लीजिए...
12.         केशव प्रसाद मौर्या को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इन पर तो मर्डर तक का चार्ज है।
13.         आनंदी बेन पटेल को क्‍यों नहीं हटाते..उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं करवाते... इनकी बेटी अनार पटेल को 400 एकड़ जमीन 92 प्रतिशत छूट पर दे दी गई।
एक तरफ आप तेजस्‍वी को दोषी मानते हैं दूसरी तरफ अपने गिरेवान में क्‍यूं नहीं झांकते.... रहीम को एक दोहा है...
एकै साधे सब सबै,
सब साधे सब जाए।‘’
नैतिकता की नंगई भी समझिए...

यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पर धारा 506, 307, 147, 148, 297, 336, 504, 295, 153अ, और 435 के तहत मुकदमा दर्ज है। यूपी के उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या पर धारा 302, 120बी, 153अ, 188, 147, 148, 153, 352, 188, 323,504, 506, 295, 420, 467, 465, 171, 186, 332, और 341 के तहत मुकदमा दर्ज हैं। वहीं तेजस्‍वी यादव पर धारा 120बी और 420 के तहत मुकदमा दर्ज करया गया.... भाजपा तेजस्‍वी यादव को ही दोषी मानती है क्‍योंकि बाकि सब का फैसला तो अदालत करेगी और तेजस्‍वी यादव का भाजपा... यह नैतिकता का नंगा नाच नहीं तो और क्‍या है.... जब आपका दामन इतना दागदार है तो किस नैतिकता की बात करते फिरते हैं.... सही में नैतिकता है आप में तो.. जिनका जिनका नाम है सब से इस्‍तीफा क्‍यों नहीं ले लेते.... तुम से न हो पाएगा महोदय जी...

Tuesday, July 18, 2017

चूडियां क्‍यों नहीं पहन लेते...

चूडियां क्‍यों नहीं पहन लेते...

पाकिस्‍तान ने आज तो सारी हदें ही पर कर दी.... आज सुबह जब कश्‍मीर के नौशद इलाके में बने स्‍कूल में बच्‍चें पढ़ रहे थे तभी पाकिस्‍तानी सैनिकों ने सीज फायर कर बमों से स्‍कूल पर हमला कर दिया..... जवानों एवं कश्‍मीरी पुलिस ने वहां से 200 बच्‍चों को सही सलामत बाहर निकला और उनको उनके घर पहुंचाया... इस सीज फायर में किसी भी बच्‍चे के हताहत होने की अभी तक कोई खबर नहीं आई है... वैसे देखा जाए तो पिछले 1 साल में पाकिस्‍तानी सैनिक लगभग 239 बार सीज फायर कर चुके हैं और इस सीज फायर में हमारे सैंकड़ों सैनिक शहीद हो चुके हैं... इसके बाद भी सरकार के नुमाइदें हाथों पर हाथ रखकर शायद किसी बड़े हमले की आस में बैठी हुई दिखाई प्रतीत होती है... जब कोई बड़ा हमला हो तब कोई कार्यवाही की जाए... नहीं तो अभी तक कड़ी निंदा से ही काम चल रहा है... आगे भी चलता रहेगा... स्‍कूली बच्‍चों पर हुए हमले पर भी गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री या सरकारी नुमाइंदा कड़ी निंदा कर ही देगा....वहीं कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री ने कहा है कि हथियारों से कश्‍मीर का मुद्दा हल नहीं हो सकता... आपस में बैठकर बात करने से कोई रास्‍ता निकल सकता है... अरे भई कश्‍मीर में बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार तुम्‍हारी है... तो बीजेपी का कोई नुमाइंदा लेकर पाकिस्‍तान से बात करों... जब तुमको पता है कि बात करने से हल निकल सकता है फिर अभी तक क्‍यों सो रही हो...

वैसे तुमकों और सबकों पता है यह पाकिस्‍तान है यह सिर्फ लातों की भाषा समझता हैं इन्‍हें अमन चैन कहां रास आता है... जब भी अमन शांति की पहल भारत की तरफ से की जाती रही है तब-तब पाकिस्‍तान की ओर भारत के सीने पर छुरा खोंपा गया है.... और खामियाजा भारत को ही उठाना पड़ा है... जब पाकिस्‍तान ही नहीं चाहता कि अमन शांति कायम हो फिर बात करने से फायदा ही क्‍या... यदि वह ऐसा चाहता तो हर दिन एक नए आंतकी को भारत पर हमला करने नहीं पहुंचाता... और हर दिन सीज फायर जैसी घटनाओं को अंजाम नहीं देता….. वह तो सिर्फ यह चाह रहा है कि आओं और हमें मारो.... क्‍योंकि यह लातों के भूत हैं बातों से कहां मानने वाले है..... यह उस भैंस के समान है जिसके आगे चाहे जितनी भी बीन क्‍यों न बजाते रहो इसको कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है जब तक इसके कान के नीचे दो चार नहीं लगते रहते... यह समझने वालों में से नहीं है.... वैसे पाकिस्‍तान को इस तरह की हिमाकत करने देने में भारत सरकार का भी हाथ है यदि समय रहते गोली के बदले गोली... का जबाव दिया होता और वक्‍त-वक्‍त पर खुराक देते रहते तो पाकिस्‍तान किसी भी तरह की हिमाकत करने से पहले 100 बार जरूर सोचता... कि यदि हमने ऐसा किया तो भारत चुप नहीं बैठेगा...वहां की सरकार तत्‍काल अपने सैनिकों को कार्यवाही करने का आदेश दे देती है.... पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता, जिससे पाकिस्‍तान के हौंसले बुलंद हो चुके हैं.... वहीं सरकार कोई कार्यवाही करने के वजह निंदा करती है.... इसके अच्‍छा है हाथों में चूडियां पहन लो.... क्‍योंकि तुम और तुम्‍हारी सरकार सिर्फ बकबक करती है कार्यवाही नहीं.... आज स्‍कूली बच्‍चों पर हुए हमले के बाद भी शांत बैठे हो.... कार्यवाही क्‍यों नहीं करते... जब कार्यवाही करते जब यह बच्‍चे पाकिस्‍तान की गोलियों का शिकार हो जाते... लानत है....तुम पर और तुम्‍हारी जैसी सरकारों पर.....चूडियां पहन लो.. और तालियां बजाओं....क्‍योंकि तुम से भी न हो पाएगा.... 

Sunday, July 9, 2017

हमाम में सब नंगे हैं......

हमाम में सब नंगे हैं......


आज अधिकांशत: सभी चैनलों के प्राइम टाइम स्‍लॉट पर एक ही खबर प्रसारित की जा रही थी वो जुड़ी थी बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव से.... सभी चैनलों ने एक स्‍टोरी के रूप में पूरे एक घंटे तक लालू के पूर्व से लेकर वर्तमान तक का चिट्ठा बयां किया... कैसे लालू एक सर्विस क्‍वाटर से लेकर बिहार की सत्‍ता पर काबिज हुए.... कौडियों से करोड़ों तक....उनके व उनके परिवार में किस के नाम कितनी बेनामी संपत्ति है… लालू एक अनसुलझी कहानी.... चलिए मान लेते हैं कि लालू के सत्‍ता का दुरूपयोग करते हुए करोड़ों रूपयों की बेमानी संपत्ति बना ली...... सीबीआई और कानून व्‍यवस्‍था इतने समय से कहां सो रही थी........यह सब तो पहले ही हो जाना चाहिए.... पर नहीं हुआ... ऐसे कौन से कारण रहे है कि लालू के ठिकानों पर पहले सीबीआई छापे नहीं पड़े और अब लगातार छापे पर छापे डाल रही है.... लालू से लेकर उनके परिवार के सदस्‍यों और यहां तक उनके करीबियों तक को नहीं बक्‍सा जा रहा है... सोती हुई सीबीआई आखिर जाग कैसे गई.... क्‍या सीबीआई भी किसी तोते की तरह काम करती है.... जो केंद्र सरकार के पिजड़े में कैद रहती है और जैसा केंद्र सरकार पढ़ाती है ठीक वैसा ही पढ़ता है.....
पर एक बात तो समझ से परे जा रही है कि सभी चैनलों ने एक साथ एक ही दिन एक ही समय पर लालू प्रसाद यादव को मुद्दा बनाकर प्राइम टाइम पर स्‍टोरी प्रसारित की.... मुझे तो यह मीडिया किसी के द्वारा डाली गई हड्डी पर अपनी दुम हिलाता हुआ दिखाई दे रहा है...... यदि ऐसा नहीं है तो बहुत सारे मंत्री, विधायक, सांसद और मुख्‍यमंत्री भी है... जिन पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगते रहे हैं, घोटालें होते रहे हैं.... चल-अचल संपत्ति दिन दूनी रात चौगनी होती भी रही है... मध्‍य प्रदेश में वर्तमान मुख्‍यमंत्री को ही ले लीजिए....व्‍यापम घोटलें में नाम आया, और फिर एक क्‍लीन चिट के बाद मामला रफा-दफा। उनकी पत्‍नी और परिवार के नाम कितनी संपत्ति है कभी किसी मीडिया ने इस बात को उठाया... सीबीआई ने छापे मारे, नहीं ना........दूसरी तरफ गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री जिनके कार्यकाल में गोदरा कांड हुआ... और फिर जांच बैठी और क्‍लीन चिट मिल गई.....उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री जिनके जिन्‍होंने लाल पत्‍थर से हाथियों को स्‍थापित कर दिया, नोट बंदी के बाद उनके पास 100 करोड़ रूपये की संपत्ति मिली... यह संपत्ति तो उनकी पार्टी की थी उनके पास और उनके भाई के पास इस तरह की बेनामी संपत्ति जिसका कोई जोड़ भाग नहीं है.... और तो और ऐसे बहुत सारे मुख्‍यमंत्री रहे हैं या वर्तमान समय में किसी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री हैं उनकी व उनके परिवार और करीबियों की संपत्ति का खुलासा क्‍यों नहीं हो रहा......सीबीआई उनके घरों पर छापे क्‍यों नहीं मार रही... पर सीबीआई कंबल ओंढ कर सोती दिख रही है.. कुछ एक अपवाद स्‍वरूप मामलों को छोड़ दिया जाए... बाकि सभी में सीबीआई हमेशा से प्रश्‍नचिह्न के दायरे में दिखाई प्रतीत हुई है और हो भी रही है..... और मीडिया का क्‍या कहना....

वहीं जब से केंद्र में बीजेपी काबिज हुई है सिर्फ और सिर्फ मोदी भक्‍त की भांति चरण वंदना करती दिख रही है..... और अब तो उत्‍तर प्रदेश में भी बीजेपी राज्‍य है तो योगी की वंदना शुरू हो चुकी है.... महिमा मंडन शुरू हो चुका है..... जब से केंद्र में  बीजेपी आई है तब से अब तक क्‍या मीडिया ने इस बात को दिखाया कि कैसे एक चाय बेचने वाला गुजरात की सत्‍ता तक पहुंचा.... सत्‍ता में आने से पहले उनके और उनके परिजनों के पास कितनी संपत्ति थी और अब कितनी हो गई है....कोई सीबीआई छापे नहीं... ना उनके उपर ना उनके परिजनों के उपर.... क्‍या कभी मीडिया ने इस बात को दिखाया कि हमारे देश के प्रधानमंत्री देश में कम विदेशी दौरों पर अधिक रहते है... उनके विदेशी दौरों में अब तक कितना खर्च हो चुका है…. इस बात को तो नहीं दिखाया... यदि इसी क्रम में उत्‍तर प्रदेश की बात करें तो पहले भी यहां बलात्‍कार होते थे, हत्‍यायें होती थी, लूट खसोट की जाती थी, दबंगों द्वारों गरीबों को शोषण किया जाता था.... इस सरकार में इन सबका ग्राफ कम होने की वजह बढ़ा है.... और मीडिया सोती रही......दिखाना चाहिए था..... यह भी दिखाते कि 15 जून तक सभी गड्ढें भर दिए जाएंगे.... मरहम पट्टी देखी गई... गड्ढें जस के तस बने हुए हैं हां इंद्र देव की कृपा से पानी से भर जरूर गए.....यह सब दिखा देते.....नहीं महिमा मंडन से फुर्सत मिले तो दिखाते.....
बस उसे तो सिर्फ लालू को दिखाना है कि वह कैसे एक सर्विस क्‍वाटर से लेकर बिहार की सत्‍ता पर काबिज हुआ और करोड़ों की बेनामी संपत्ति बना ली....जब संपत्ति बन रही थी तब क्‍या सो रहे थे.... या तब कोई चढ़ावा मिल रहा था जिस कारण मीडिया की बोलती बंद थी.. और अब वो चढ़ावा मिलना बंद हो गया है... लगता तो कुछ ऐसा ही है... नहीं तो देश में और भी बहुत से पूर्व मुख्‍यमंत्री है उनके बार में भी कुछ कुछ दिखा देते... अच्‍छा लगता... ऐसा नहीं लगता कि मीडिया बाजारू के साथ-साथ बिक चुका है.... वैसे इसके सा‍थ साथ कश्‍मीर के मुद्दे पर भी बात करें तो देश की आबाम देख रही है कि वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.... प्रतिदिन दो-चार सैनिक शहीद हो रहे हैं....घायल हो रहे हैं.... और प्रधानमंत्री को विदेश घूमने की पड़ी है.... गृह मंत्री, रक्षा मंत्री कड़ी निंदा करते दिखाई देते हैं... प्रधानमंत्री ट्वीट करके निंदा करते है.....कड़ी निंदा ना हो गई कोई बहुत बड़ी कार्यवाही कर दी......वहीं सैनिक कश्‍मीर के पत्‍थरबाजों में से एक को जीप से क्‍या बांध देते है उन पर हजारों सवालात नेता और मीडिया उठाने लगती है.... वह यह नहीं दिखाती की कश्‍मीर की गठबंधन वाली सरकार किस तरह नाकामयाब साबित हो रही है....

प्रधानमंत्री जी और मीडिया जरा इस पर भी गौर फरमाएं... कश्‍मीर के मुद्दे को हलके में ना ले कि जैसा चल रहा है चलने देते हैं... आप से देश की जनता कड़ी निंदा नहीं एक सही और सटीक इलाज की मांग कर रही है... ताकि दुबारा कोई सांप अपना फन ना उठा सके.... पर ना तो आपकी सरकार और ना ही मीडिया के कानों पर जूं रेंग रही है.. बस विदेश घूम लिया जाए क्‍या पता कल मौका लगे या ना लगे... वहीं मीडिया सिर्फ खबर दिखाती है आज फिर हमला,… 3 सैनिक शहीद, 4 शहीद, 5 शहीद.....यह क्‍यों नहीं दिखाती कि सरकारें नाकामयाब हो रही है कश्‍मीर में हमले को रोकने में.... खैर लालू यादव का जो भी हो वह सब बीजेपी द्वारा करवाया जा रहा है यह बात सब लोग समझ रहे है और मीडिया भी उसका साथ दे रही है....कभी बीजेपी भी अपने दामन में झांक कर देख लेती कि उसका दामन कितना पाक साफ है.... बस इतना कहना चाहूंगा कि हमाम में सब नंगे हैं......

Friday, June 30, 2017

जरा गौर करें और सोचे.....

जरा गौर करें और सोचे.....



सत्‍य युग कि बात की जाए तो देखने को मिलता है कि सत्‍य युग में चारों तरफ सत्‍य विराजमान था, कोई किसी के साथ छलावा, चोरी, हत्‍या आदि नहीं करते थे... ऐसा सिर्फ पढ़ने को मिलता है... यदि इसको विस्‍तार से पढ़ा जाए एवं समझा जाए तो ज्ञात होगा कि सत्‍य युग में भी छलावा, चोरी, हत्‍या आदि कृत्‍य हुआ करते थे... हां इनकी अत्‍याधिकता नहीं थी.... पर छलावा पूर्णत: विद्धमान था.... क्‍योंकि भगवान नृसिंह ने उस समय हिरण्‍यकश्‍यप जो कि राक्षसों का राजा हुआ करता था को छल प्रपंच द्वारा अपने भक्‍त प्रह्लाद की भक्ति के एवज में उसके पिता को ही मार दिया.... कौन पुत्र चाहेगा कि उसके पिता का वध किया जाए चाहे वो जैसा भी हो... सत्‍य युग में तो सत्‍य की पूजा की जाती थी फिर शंखासुर, हरिण्‍याक्ष और हिरण्‍यकश्‍यप जैसे राक्षसों की उत्‍पत्ति कैसे हो गई... जबकि मैंने पढ़ा है कि ब्राह्मा ने इस सृष्टि की उत्‍पत्ति की है और हर चीज को उन्‍होंने स्‍वयं बनाया है... फिर ऐसी क्‍या अवश्‍यकता आन पड़ी जो ब्राह्मा को राक्षस पैदा करने पड़े.....

खैर अब बात करते हैं त्रेता युग कि इस युग में बाली संपूर्ण पृथ्‍वी के तीनों लोकों का राजा हुआ करता था... जिसको भगवान ने वामन अवतार लेकर छल के साथ छला....उन्‍होंने एक अत्यन छोटे स्‍तर के ब्राह्मण ने बाली से तीन वचन मांगें और तीन पग जमीन रहने के लिये दान में माँगी ! इसका निर्णय आप करें ! बाली से उसने तीन वचन में तीनों लोक मांग लिये ! बाली अब मनुष्य द्वारा दान दिये होए पाताल लोक में निवास कर सकता था ! 

इसके साथ ही इस युग में राम का जन्‍म हुआ.... इस युग को राम युग भी कहा जा सकता है.... परंतु इस युग में भी बहुत सी विसंगतियां देखने को मिलती हैं...अपराध देखने को मिलते हैं... जैसे लक्ष्‍मण द्वारा शुपनंखा के अंग विच्‍छेद कर देना....जानवरों पर अत्‍याचार, उनका वध करना, इंद्र द्वारा एक स्‍त्री के साथ बलात्‍कार करना, छल से बालि को मारना……. एक भाई का गद्दी के लिए अपने ही भाई से धोखा करना....अपनी पत्‍नी से अग्नि परीक्षा लेना... और तो और राम राज में भी जाति व्‍यवस्‍था विराजमान थी जिसका उद्धरण धोबी जाति के रूप में मिलता है... जिसके कटाक्ष करने पर राम ने अपनी गर्भवती पत्‍नी को जंगल में भेज दिया.... क्‍या यही राम राज्‍य था.... छल प्रपंच के साथ हत्‍या, बलात्‍कार, औरतों के साथ इस तरह के अत्‍याचार... राक्षसों ने अत्‍याचार किया उनका तो समझ आता है कि वो राक्षस है परंतु भगवानों द्वारा इस तरह के कुकृत्‍य समझ से परे हैं...

अब बात करते हैं द्वापर युग कि... इस युग में कृष्‍ण का जन्‍म होता है... जिसको कहा जाता कि कंस के अत्‍याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए हुआ था... ठीक है मान लेते हैं परंतु इस युग में भी शिशु हत्‍या, लड़कियों के साथ छेड़छाड़, चोरी, छल प्रंपच प्रमुखत: के साथ देखने को मिलते हैं.....एक स्‍त्री के अवैध संबंध और अवैध संबंधों से उत्‍पन्‍न बच्‍चे त्‍याग यानि पैदा होने के बाद उसको फेंक देना.....एक स्‍त्री को पांच-पांच लोगों में बांट देना..... राजकुमारों द्वारा जुआ खेलना और जुएं में अपनी पत्‍नी को दांव पर लगा देना....भरी सभा में एक स्‍त्री को र्निलज्‍य करना..... सत्‍ता के लालच में अपने भाईयों को वन भेज देना... उनको मारने के प्रत्‍यन किए जाना... आदि इस युग में देखे जा सकते हैं.....


यदि तीनों युगों का विश्‍लेषण किया जाए तो ऐसा कोई भी युग नहीं रहा है जिसमें औरतों के साथ अत्‍याचार नहीं हुए हो.... चाहें वो राक्षसों ने किए हो या भगवानों ने... मनुष्‍य की बात छोड़ देते हैं... तीनों युगों में छलावा, धोखधड़ी, लूट, मार, पशुओं पर अत्‍याचार, वध आदि प्रमुखत: के साथ देखे जा सकते हैं... फिर हम कैसे कह सकते हैं कि कलयुग में ही यह सब हो रहा है... क्‍योंकि इन सब युग में यह देखने का कहीं नहीं मिला कि फलां-फलां भगवान द्वारा कुकत्‍य करने पर उसको किसी विधान ने या सर्वोपरि राजा या उच्‍चतर भगवान ने दंड दिया हो.... उसी की प्रवृत्ति कलयुग में देखने को मिलती है.... 

Sunday, June 18, 2017

नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए.....

नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए.....

इबे द्वारा फेसबुक पर महिला वस्‍त्रों के विज्ञापन हेतु इस तरह महिला का इस्‍तेमाल करना (पारदर्शिए) कितना तर्कसंगत है....अब शायद तथाकथित महिलावादी महिलाएं इसे अपना अधिकार समझेगी.... फिर वह पुरूष समाज पर इल्‍जाम लगाएंगी कि पुरूष की सोच गलत है....देखने का नजरिया गलत है.... अब इस तरह एक महिला अपने शरीर को सार्वजनिक दिखाएगी तो क्‍या पुरूष अपनी आंखें बंद कर ले.... फैशन की आड़ में नग्‍नता का इससे बड़ा उदाहरण क्‍या होगा....होगा....जिसमें महिला अपने शरीर का प्रदर्शन कर रही हो.....वैसे यह कोई पहला विज्ञापन नहीं है इस तरह के सैंकड़ों विज्ञापन भरे पड़े हैं.... अब महिलावादी इस मुद्दे पर बात करेंगी कि पुरूष समाज द्वारा बनाया गया विज्ञापन है... ठीक कहा अपने यह किसी न किसी पुरूष द्वारा खींची गई तस्‍वीर और विज्ञापन ही होगा... परंतु आप क्‍यों चंद पैसों के लिए इस तरह की नग्‍नता का प्रर्दशन करने लगती है... क्‍या इसमें आपका स्‍वार्थ नहीं छिपा होगा.... कि कुछ पैसे मिल जाएंगे और फैशन की आड़ में आपके शरीर का प्रदर्शन भी हो जाएगा... खैर स्‍वत्रंत भारत है.... आप कुछ भी कर सकते हैं.... हां फिर नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए......

नोट.... मेरी इस पोस्‍ट व साझा की जाने वाली तस्‍वीर को उद्देश्‍य किसी भी महिला को नीचा दिखना नहीं है....बस एक तर्क की बात रख रहा हूं... किसी को इससे कोई आपत्ति हुई हो तो क्षमा प्रार्थी हूं....

Saturday, June 17, 2017

आधार कार्ड को भी लिंक करें शादी के निमंत्रण पत्र से.....

आधार कार्ड को भी लिंक करें शादी के निमंत्रण पत्र से.....

शायद कुछ दिनों बाद शादी के लिए भी आधार कार्ड चाहिए होगा... जिसे दोनों वर-वधू के आधार कार्ड को एक दूसरे के शादी के निमंत्रण पत्र से लिंक किया जाएगा...और यह शादी के निमंत्रण पत्र को ऑन लाइन किया जाएगा.... जिनके पास आधार कार्ड नहीं होगा वो शादी नहीं कर सकेंगे... यदि वो बिना शादी के निमंत्रण कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करके शादी करते हैं तो उनकी शादी अवैध मानी जाएगी.... इसके लिए दोनों को सजा भी हो सकती है और यह सजा गैरजमानती होगी....सजा के उपरांत उनको अपना आधार कार्ड पुन: लिंक करवाना पड़ेगा और इसके लिए सरकार को शुल्‍क देना होगा तभी शादी वैध मानी जाएगी.... 

इसके फायदे भी होंगे... एक बार शादी होने के उपरांत कोई भी किसी को अविवाहित बता कर शादी नहीं कर सकेगा....साथ ही शादी के नाम पर दिए जाने वाली सारे सामान को (रूपयों को भी ) भी आधार कार्ड से लिंक करवा दिया जाएगा जिससे यह ज्ञात होगा कि फलां फलां ने इतने रूपए की अपनी बेटी की शादी की है और फलां फलां को इतनी रकम शादी के नाम पर मिली है... जिस पर सरकार एक सीमा तक छुट प्रदान कर सकती है और बाकि राशि पर टेक्‍स ले सकती है. इससे बाद में किसी कारण से यदि दोनों के बीच तलाक की नौबत आती है तो वधू पक्ष वर पक्ष से आधार कार्ड की लिंक दिखाकर दिए हुए सामान को वापस ले सकेंगे..... 

Friday, June 16, 2017

सभी गड्ढें भरे जा चुके हैं....

सभी गड्ढें भरे जा चुके हैं....




बधाई हो... उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा जनता से किया गया वादा पूरा हो गया है जी हां 15 जून निकल चुकी है सरकार द्वारा यह कहा गया था कि 15 जून तक सभी गड्ढों को भर दिया जाएगा.... जी हां उत्‍तर प्रदेश सरकार ने 15 जून को अपने सहयोगी इंद्रदेव को आदेश दिया और इंद्रदेव ने यह आदेश आगे स्‍थानतंरण करते हुए अपने अधीन कार्यरत वरूण देव को कहा कि उत्‍तर प्रदेश के सभी गड्ढों को तत्‍काल प्रभाव से भर दिया जाए... और उन्‍होंने थोड़ी सी मेहनत करते हुए लगभग सभी गड्ढों को भर दिया.... अब आप लोग यह कहोगे कि गड्ढों तो जैसे के तैसे बने हुए हैं... अरे भाई जरा गौर से देखिए गड्ढें पानी से भरे जा चुके हैं... उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सिर्फ यह कहा था कि 15 जून तक सभी गड्ढें भर दिए जाएंगे... यह नहीं कहा था कि सड़कों को मट्टी से या डांबर से भरा जाएगा... पानी से भर दिया गया यह काफी नहीं है.... अब आप मुस्‍कुराई क्‍योंकि आप उत्‍तर प्रदेश में हैं... यहां सरकारें वादा करता और वादे अक्‍सर टूट जाते हैं.... जैसे हमारे मोदी ने कहा था 15 लाख सभी के खाते में आएंगे... जी हां 15 लाख आएंगे….. क्‍योंकि मेरे करन अर्जुन जब आएंगे तो 15 लाख भी आ जाएंगे.... 

Tuesday, June 13, 2017

जरा इनके बारे में भी सोचिए मोदी जी....

जरा इनके बारे में भी सोचिए मोदी जी....



जहां एक तरफ तीन तलाक के मुद्दे पर बहस चल रही है और सभी राजनैतिक पार्टियां अगामी लोकसभा चुनाव के चलते अपने अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं.... और तो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी मानना है कि तीन तलाक का मुद्दा मुस्‍लिम बहू-बेटियों के अहित में है... सही कहां प्रधानमंत्री जी... पर आपको तीन तलाक का मुद्दा दिखाई दे गया... आप जहां से जीत कर प्रधानमंत्री बने हैं जरा वहां पर भी गौर फरमाते तो अच्‍छा होता... जी हां... मैं बनारस की बात कर रहा हूं और वहां पर रह रही विधवाओं के संदर्भ में बात करने जा रहा हूं ..... जी.....इस नगर में वधुओं की भांति रह रहीं सैंकड़ों विधवायें पिछले कई वर्षों से समाज की मुख्यधारा से दूर एक गुमनाम जिंदगी बिता रही हैं। इनमें अधिकतर विधवाएं पंचिम बंगाल की हैं, जो पति की मौत के बाद परिवार से निकाल दी गर्इं और देश के कई हिस्सों में भटकने के बाद वृंदावन और बनारस के विभिन्न आश्रमों में पहुंची या खुद परिवार द्वारा यहां जबरन पहुंचा दी गई। ऐसी महिलाओं की संख्या एक अनुमान के अनुसार करीब चार करोड़ के आसपास है। क्‍योंकि पति की मौत के बाद अभिशाप समझ कर परिवार द्वारा निकाल दी गई हैं... जो बड़ी संख्या में विश्वनाथ मन्दिर के आसपास और गंगा के घाटों पर अपने जीवन के भीषण क्षण काटती मिल जाएंगी। और यह भीषण सत्‍य यह भी है कि समाज से तिरस्‍कृत यह विधाएं जब आश्रम में पहुंचती है तो आश्रम के सर्वेसर्वा इन्‍हें दो वक्‍त की रोटी के एवज में बड़े-बड़े उद्योगपतियों के यहां, नेताओं के यहां भेज दी जाती है.... मेरे कहने का साफ-साफ मतलब यह है कि इनसे देह व्‍यापार भी करवाया जाता है.... तो माननीय मोदी जी जब आपको मुस्लिम महिलाओं की इतनी चिंता है तो कुछ चिंता इन विधवाओं की भी कर लीजिए....और इन विधवाओं को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़कर उनको उनका हक दिलाने की कोशिश करें..... 

Sunday, May 28, 2017

टीवी चैनल.... द्वारा खबरों का प्रसारण कुछ इस प्रकार किया जाता है

टीवी चैनल.... द्वारा खबरों का प्रसारण कुछ इस प्रकार किया जाता है

1.    बैकिंग न्‍यूज... बड़ी मशक्‍त के बाद पकड़े गए दो आंतकवादी
2.    गौर से देखिए... एक निर्मोही मां ने कैसे बांधा अपने बच्‍चों को
3.    मां की ममता कहां गई... बांध दिया चारपाई से
4.    अपने बच्‍चों से तंग आकर बांध दिया बच्‍चों को
5.    कैसे कोई मां अपने बच्‍चों के साथ ऐसा कर सकती है
6.    यह कोई आम बच्‍चे नहीं हैं.... रोज करते थे अपनी मां को तंग

इसी प्रकार एक आम खबर को भी बढ़ा चढ़ाकर प्रस्‍तुत कर देते हैं यह टीवी चैनल वाले….. कभी तिल का ताड़ तो कभी ताड़ का तिल बन देते हैं...

अवैध खनन करते हुए दो आरोपियों को धड़ दबोचा

अवैध खनन करते हुए दो आरोपियों को धड़ दबोचा

जैसा कि ज्ञात है कि प्रदेश सरकार ने अवैध खनन पर पूर्णत: रोक लगाने के लिए चाक चौबंध व्‍यवस्‍था की है ताकि प्रदेश में अवैध खनन पर रोक लग सके.... इसके बावजूद भी बिना किसी डर भर के भू-माफिया द्वारा अवैध खनन का कार्य लगातार किया जा रहा है... प्रदेश सरकार की पुलिस अवैध खनन पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए ही थी कि उन्‍हें अपने मुखबिरों से ज्ञात हुआ कि दो व्‍यक्ति अवैध खनन का कार्य कर रहे हैं... प्राप्‍त सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र के दरोगा अपने मयहमराह के साथ मौके पर पहुंच कर छापा मारा..... उक्‍त आरोपियों ने जैसे ही पुलिस बल को अपने पास आते देखा तो भागने की कोशिश करने लगे... जिसमें वह नकामयाब रहे... पुलिस बल ने उन्‍हें चारों तरफ से घेर कर धड़ दबोचा..... उक्‍त आरोपियों के अपना नाम चिंटू..मिंटू बताया है जो कि अपने घर से खेलने के बहाने निकले थे और अवैध खनन की वारदात को अंजाम देने लगे... इन लोगों के पास से पुलिस ने एक जेसीबी मशीन व दो ट्रक बारामद किए.... जिसे वह अवैध खनन के लिए इस्‍तेमाल कर रहे थे... दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत कर लिया है.... वहीं चिंटू... और मिंटू से हमारे संवाददाता की बात हुई तो उन्‍होंने कहा कि हम यहां खेल रहे थे और पुलिस बल ने हमें पकड़कर झूठा आरोप लगा दिया कि हम अवैध खनन में लिप्‍त हैं... अब देखना यह है कि कौन सही और कौन झूठ बोल रहा है। हालंकि दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है और उनको उनके परिवार के हवाले कर दिया है और हिदायत दी है कि आगे से वह अवैध खनन करते हुए पाए गए तो सख्‍त से सख्‍त सजा हो सकती है....
कृपया इसके एक व्‍यंग्‍य के रूप में देखे... इसका किसी भी प्रदेश की सरकार व पुलिस से कोई सरोकार नहीं है यदि किसी भी प्रदेश की सरकार व पुलिस से संयोगवश मिलान होता है तो इसे मात्र एक संयोग समझा जाए.....

Friday, May 12, 2017

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

 पर्यटन हमेशा से किसी समाज के लिए सामाजिक आयोजन रहा है। यह प्रत्येक मनुष्य की प्राकृतिक अभिलाषा से अभिप्रेत होता है यह लोगों में नए अनुभव, कार्य, शिक्षा, ज्ञान और मनोरंजन के लिए होता है। इससे एक दूसरे की संस्कृति और मूल्य को समझने के लिए तथा अन्य सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक हितों की पूर्ति के लिए पर्यटक और मूल संरचना का विकास हुआ है। वैसे पर्यटन के अनेक आयाम हैं। क्योंकि पर्यटक सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाने के साथ-साथ राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में भी महती योगदान देता है।
भारत के संदर्भ में पर्यटन की बात करें तो जर्मन विद्वान मैक्समूलर की एक उक्ति याद आती है, ‘‘अगर मुझसे पूछा जाए, कि इस आसमान के नीचे मानव ने कहां पर अपने सबसे खूबसूरत उपहार को पूरी तरह संवारा है, तो मैं भारत की ओर इशारा करूंगा।’’ यही है भारत की वैभवपूर्ण विरासत। क्योंकि भारत में, पर्यटन उद्योग का विशेष स्थान हैं चूंकि इसमें न केवल उच्च दर पर विकास करने की क्षमता है अपितु अपने अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष संबंधों और अंतर क्षेत्रीय सहक्रियाशीलताओं के माध्यम से कृषि, बागवानी, हस्तशिल्प, परिवहन, निर्माण आदि के साथ अन्य आर्थिक क्षेत्रकों को भी अभिप्रेरित करता है। अर्थात यह देश में दूसरे उद्योगों को बल प्रदान कर करता है और अंतरराष्ट्रीय ऋण चुकाने में सहायता करने के लिए पर्याप्त धन का अर्जन कर करता है। क्योंकि यह देश के लिए तीसरा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा का अर्जक है।
अगर देखा जाए तो पर्यटन आरंभ से ही राष्ट्रों के मध्य सामाजिक आदान-प्रदान की भूकिा निभाने का मुख्य बिंदु रहा है। हालांकि परंपरागत तौर पर पर्यटन को विलासिता माना जाता रहा है, परंतु बदले वैश्विक परिदृश्य में पर्यटन अपेक्षाकृत बड़े सामजिक, सांस्कृतिक-धार्मिक परिप्रेक्ष्य में आता है और उसकी रूचियां भी अलग-अलग होती है। आज पर्यटन ‘‘विलासिता’’ नहीं रहकर आम व्यक्ति की पहुंच में है। यह सामान्य जीवन प्रक्रिया का हिस्सा माना जाने लगा है। पर्यटन स्थल पर पर्यटक नए सामाजिक जीवन के संपर्क में आने से वह दूसरों से सीखता है। इस रूप में लोगों के बीच बेहतर समझदारी पैदा करते हुए पर्यटन उसके सामाजिक विकास के एक साधन के रूप में गहरा प्रभाव डालता है।
पर्यटन किसी देश में रहने वाले लोगों के जीवन-स्तर तथा रहन-सहन की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार लाए जाने के साथ ही रोजगार -सृजन का भी महत्वपूर्ण कार्य करता है। पर्यटन से स्थानीय कर-प्राप्तियों के रूप में अर्थव्यवस्था को जो लाभ होता है, उससे सामाजिक निर्धनता उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, पेयजल तथा स्वच्छता, मनोरंजन के अधिक अवसरों आदि आधारभूत सेवाओं की व्यवस्था को वास्तविकता में साकार किया जा सकता है। यहीं नहीं, सामाजिक असमानताओं को दूर करने की दृष्टि से भी पर्यटन प्रभाव डालता है।
वहीं इस संदर्भ में मैड्रिक में सन् 1994 में हुई विश्व पर्यटन की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय योजना की बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि सामान्यतया सभी पर्यटक ऐसे स्थानों का चुनाव पर्यटन के लिए करते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर होने के साथ ही स्वच्छ और कम आबादी वाले हों। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि कोई पर्यटक न तो वहां की सामाजिक समस्या का और न ही खराब पर्यावरण का शिकार हो।
इस परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट है कि पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, सफाई के साथ ही स्वस्थ एवं सुरक्षित वातावरण विशेष रूप से आवश्यक है। साथ ही पर्यटकों को खतरों एवं बाधाओं का सामना ना करना पड़े। खतरों और बाधाओं का अर्थ सामान्यतया इस बात से लिया जाता है कि वे तत्व, जिनसे भविष्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होने की आशंका हो। क्योंकि ऐसे जितने भी तत्व और कारण जिनसे कि पर्यटक किसी स्थान पर जाने से कतराने लगें, पर्यटन पर जिनसे प्रतिकूल असर पड़े और जिनसे उस स्थान विशेष पर पर्यटन के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगे, वे ही पर्यटन के खतरे और बाधाएं होती है। इस अर्थ में पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का वातावरण, छेड़छाड़ की घटनाएं, पर्यावरण प्रदूषण, यौन उत्पीड़न, जन-अपराध, सुविधाओं का अभाव आदि ही पर्यटन की सबसे बड़ी बाधाएं एवं भविष्य के लिए खतरे हैं। पर्यटन स्थलों पर स्थानीय समुदाय और पर्यटकांे के बीच समन्वय का नहीं होना, स्थानीय लोगों का पर्यटन के प्रति जागरूक नहीं होना, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की होड़ में घरेलू या स्वेदशी पर्यटन की अनदेखी करना आदि बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन को बाधित करते हैं।
वहीं खतरों और बाधाओं के मद्देनजर अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए बम विस्फोटों के बाद अधिकांश देशों ने अपने पर्यटकों को अमेरिका और आसपास के देशों में नहीं जाने की सलाह दे दी थी। पश्चिम में इससे पर्यटन उद्योग लगभग लड़खड़ा गया था। इसी प्रकार कश्मीर के आतंकवाद, अक्षरधाम मंदिर में हुए बम विस्फोट, राजधानी दिल्ली में संसद पर हुए हमले आदि का प्रभाव केवल उस समय तक के लिए ही पर्यटन पर नहीं पड़ा बल्कि इसका पूरा खामियाजा लंबे समय तक देश के पर्यटन उद्योग को भुगतना पड़ा। साथ ही स्थान विशेष पर पर्यटकों से ठगी, लूटपाट, उनके साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी उनके वहां नहीं जाने का सबब बनती हैं।
हमारे यहां अब भी पर्यटन विकास का प्राथमिक क्षेत्र नहीं बन सका है। इसके मूल में पर्यटन की बहुत सी बाधाएं एवं खतरे ही हैं। कमजोर इच्छा-शक्ति, लालफीताशाही, देश में होनेवाली आतंकवादी वारदातें, जन-अपराध, आम जन की उद्योगों के प्रति उदासीनता, केंद्र-राज्य संबंधों के अकसर होने वाली कड़वाहट, अपर्याप्त सुविधाएं, पर्यावरणीय दुष्प्रभाव आदि बहुत सी ऐसी अड़चनें, या यों कहें कि बाधाएं, पर्यटन उद्योग में हैं जिनके कारण व्यापक संभावनाओं के बावजूद पर्यटन का विकास देश में पूरी तरह से नहीं हो सका है।
वैसे इन दिनों पर्यटन उद्योग केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है। पर्यटकों की बारीक सुविधाओं पर दिया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित नतीजे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। देश में यह तीसरा सबसे बड़ा सेवा उद्योग है और भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी छह फीसद से अधिक है। देश के सकल रोजगार में इस क्षेत्र का हिस्सा लगभग नौ फीसद है। जाहिर है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग ने विशिष्ट और लाभकारी मुकाम बना लिया है। उल्लेखनीय यह भी है कि पर्यटन से होने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा विदेशी पर्यटकों से प्राप्त होता है। दर्शनीय पर्यटन स्थलों के कारण भारत की तरफ विदेशी सैलानियो का खासा रुझान रहता है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग पचास लाख विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनसे पर्यटन उद्योग को करीब ग्यारह अरब डॉलर की कमाई होती है। ऐसे में अगर विदेशी पर्यटकों की आमद में कमी होने लगे तो यह निश्चित ही चिंता का विषय है। सन् 2011 में विदेशी पर्यटकों में नौ फीसद बढ़ोतरी हुई थी, जो 2012 में छह और 2013 में तीन फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि 2014 में कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन वर्ष 2015 में संख्या में गिरावट आई। इस साल जनवरी से जून तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पर्यटकों की आवक में सात फीसद बढ़ोतरी देखी गई।
आंकड़ों से इतर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले राज्यों में उनकी आमद में कमी हुई है। हिमाचल के शिमला-मनाली से लेकर आगरा के ताजमहल और ऐतिहासिक किलों और हवेलियों के प्रदेश राजस्थान के सभी पर्यटन स्थलों पर इस वर्ष अब तक विदेशी पर्यटकों की आमद घटी है। अगर इसी तरह से भारत के प्रति विदेशी पर्यटकों का मोहभंग होता रहा, तो आने वाले समय में भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। पर्यटन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने इस स्थिति के लिए विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और कुशल श्रम शक्ति का अभाव तथा आधारभूत ढांचे की कमी को जिम्मेदार माना है। समिति ने रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों में लगातार गिरावट पर चिंता जताते हुए सरकार से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
वहीं समाज में तेजी से बढ़ रहे अपराध भी पर्यटन विकास को बाधित करते हैं। डकैती, लूटपाट, गुंडागर्दी जैसी घटनाओं के समाचार जब मीडिया की सुर्खियां बनते हैं तो इससे उस स्थान विशेष के साथ पूरे देश की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। बढ़ते जन अपराध समाज के लिए तो चिंता का विषय बनते ही हैं, पर्यटन पर भी इनका बुरा प्रभाव घटती पर्यटकों की संख्या के रूप में सामने आता है। बसों, ट्रेनों में नशीला पदार्थ खिलाकर यात्रियों से लूट-पाट, छीना-झपटी, पर्यटकों के प्रवेश करते ही पूर्व नियोजित योजना के तहत उन्हें ठगने की साजिश आदि अपराधों से पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का माहौल बनता है। ऐसे में बहुत से देशों की सरकारों द्वारा अपने निवासियों को भारत न जाने की सलाह दी जाने लगी है।
पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं उद्योग के लिए विशेष रूप से खतरा बनकर सामने आ रही हैं। इसी का एक पहलू पर्यटकों का यौन उत्पीड़न भी है। ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी आदि देशों ने तो विशेष रूप से अपने देश के पर्यटकों को भारत के खतरे गिनाने प्रारंभ कर दिए हैं। विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा वेबसाइट के जरिए अपने नागरिकों को दी जाने वाली सलाह में अब भारत में पर्यटकों के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न, शारीरिक प्रताड़ना, छेड़छाड़, गाली-गलौज, अश्लील हरकतों आदि का हवाला देते हुए सावधानी बरतने के लिए कहा जाने लगा है।
विदेशी पर्यटकों की इस उदासीनता की बड़ी वजह उनके साथ होने वाले अपराध हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ हुए अपराधों के कुल 384 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 135 मामले राजधानी दिल्ली में दर्ज हुए। उसके बाद गोवा में 66 और उत्तर प्रदेश में 64 मामले दर्ज हुए। बीते वर्षों में विभिन्न शहरों में सर्वेक्षण में लगभग सत्तर फीसदी ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना था कि हर विदेशी पर्यटक की भारत आने की पहली शर्त पुख्ता सुरक्षा की होती है और मौजूदा हालात इसकी इजाजत नहीं देते। इसी साल अप्रैल में राजस्थान के अजमेर में एक स्पेनिश जोड़े पर कुछ बदमाशों ने हमला कर उसे घायल कर दिया और महिला के साथ बलात्कार की कोशिश की। एक अन्य वारदात में माता-पिता के साथ देहरादून घूमने आई बारह साल की इजरायली लड़की के साथ एक फोटोग्राफर ने बदसलूकी की कोशिश की। पिछले साल जून में दिल्ली के द्वारका में तीस वर्षीय विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट की हुई। वर्ष 2014 में दिल्ली में इक्यावन वर्षीय विदेशी महिला के साथ लूटपाट और दुष्कर्म हुआ था। इसके अलावा, 2013 में मध्य प्रदेश के दतिया में विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात ने देश को शर्मसार किया था।
इस परिप्रेक्ष्य में केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने विदेशी महिला पर्यटकों को स्कर्ट ना पहनने और छोटे शहरों में देर रात को अकेले ना घूमने की सलाह दी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार महेश शर्मा नें, पर्यटकों की सुरक्षा पर आगरा में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बात कही। इसी कड़ी में उन्होंने पत्रकरों को बताया कि विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एअरपोर्ट पर उन्हें एक बुकलेट दी जा रही है, जिसमें क्या करें और क्या ना करें जैसी चीजों का वर्णन किया गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 के मुकाबले 10.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की बात की जाए तो इस संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं विदेशी पर्यटकों के खिलाफ होने वाले अपराधों की बात करें तो महिलाओं पर होने वाले हमले दूसरे और बलात्कार तीसरे सबसे अधिक होने वाले अपराध हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जी का चिंतित होना लाजमी भी है। लेकिन अपराधियों को पकड़ने के और अपराध रोकने के कारगर तरीके खोजने की बजाए, क्या पहनना चहिये, और किस समय पर घूमना चाहिए जैसे सुझाव सामने आने के बाद महिलाओं के प्रति आम सोच एक बार फिर सामने आती है।

यह बात कहने में कोई दोमत नहीं है कि तीन-चार साल में विदेशी सैलानियों के मन में भारत भ्रमण लेकर असुरक्षा का भाव घर करता जा रहा है, जिस वजह से वे भारत की ओर से लगातार मुंह फेरते जा रहे हैं। भारत के अधिकतर पर्यटन स्थलों जैसे दिल्ली, मुंबई, आगरा, वाराणसी, हरिद्वार, अजमेर, जोधपुर, सांची आदि में आपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। राजधानी दिल्ली के हाल सबसे गंभीर हैं। विदेशी पर्यटकों के मन में भारत को लेकर बढ़ रहे असुरक्षा भाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब भारत आते ही अपनी सुरक्षा के लिए मिर्च पाउडर रखने से लेकर बॉडीगार्ड रखने तक खुद ही तमाम तरह के इंतजाम करने लगे हैं। यह स्थिति हमारी पुलिस व्यवस्था पर कठोर टिप्पणी तो है ही, पर्यटन उद्योग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है और दुनिया में भारत की छवि खराब करने वाली भी है। पर्यटन मंत्रालय को इस पर गंभीर होना ही होगा।