सरोकार की मीडिया

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Sunday, June 18, 2017

नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए.....

नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए.....

इबे द्वारा फेसबुक पर महिला वस्‍त्रों के विज्ञापन हेतु इस तरह महिला का इस्‍तेमाल करना (पारदर्शिए) कितना तर्कसंगत है....अब शायद तथाकथित महिलावादी महिलाएं इसे अपना अधिकार समझेगी.... फिर वह पुरूष समाज पर इल्‍जाम लगाएंगी कि पुरूष की सोच गलत है....देखने का नजरिया गलत है.... अब इस तरह एक महिला अपने शरीर को सार्वजनिक दिखाएगी तो क्‍या पुरूष अपनी आंखें बंद कर ले.... फैशन की आड़ में नग्‍नता का इससे बड़ा उदाहरण क्‍या होगा....होगा....जिसमें महिला अपने शरीर का प्रदर्शन कर रही हो.....वैसे यह कोई पहला विज्ञापन नहीं है इस तरह के सैंकड़ों विज्ञापन भरे पड़े हैं.... अब महिलावादी इस मुद्दे पर बात करेंगी कि पुरूष समाज द्वारा बनाया गया विज्ञापन है... ठीक कहा अपने यह किसी न किसी पुरूष द्वारा खींची गई तस्‍वीर और विज्ञापन ही होगा... परंतु आप क्‍यों चंद पैसों के लिए इस तरह की नग्‍नता का प्रर्दशन करने लगती है... क्‍या इसमें आपका स्‍वार्थ नहीं छिपा होगा.... कि कुछ पैसे मिल जाएंगे और फैशन की आड़ में आपके शरीर का प्रदर्शन भी हो जाएगा... खैर स्‍वत्रंत भारत है.... आप कुछ भी कर सकते हैं.... हां फिर नग्‍नता के नाम पर हाय तौबा मचाना छोड़ दीजिए......

नोट.... मेरी इस पोस्‍ट व साझा की जाने वाली तस्‍वीर को उद्देश्‍य किसी भी महिला को नीचा दिखना नहीं है....बस एक तर्क की बात रख रहा हूं... किसी को इससे कोई आपत्ति हुई हो तो क्षमा प्रार्थी हूं....

Saturday, June 17, 2017

आधार कार्ड को भी लिंक करें शादी के निमंत्रण पत्र से.....

आधार कार्ड को भी लिंक करें शादी के निमंत्रण पत्र से.....

शायद कुछ दिनों बाद शादी के लिए भी आधार कार्ड चाहिए होगा... जिसे दोनों वर-वधू के आधार कार्ड को एक दूसरे के शादी के निमंत्रण पत्र से लिंक किया जाएगा...और यह शादी के निमंत्रण पत्र को ऑन लाइन किया जाएगा.... जिनके पास आधार कार्ड नहीं होगा वो शादी नहीं कर सकेंगे... यदि वो बिना शादी के निमंत्रण कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करके शादी करते हैं तो उनकी शादी अवैध मानी जाएगी.... इसके लिए दोनों को सजा भी हो सकती है और यह सजा गैरजमानती होगी....सजा के उपरांत उनको अपना आधार कार्ड पुन: लिंक करवाना पड़ेगा और इसके लिए सरकार को शुल्‍क देना होगा तभी शादी वैध मानी जाएगी.... 

इसके फायदे भी होंगे... एक बार शादी होने के उपरांत कोई भी किसी को अविवाहित बता कर शादी नहीं कर सकेगा....साथ ही शादी के नाम पर दिए जाने वाली सारे सामान को (रूपयों को भी ) भी आधार कार्ड से लिंक करवा दिया जाएगा जिससे यह ज्ञात होगा कि फलां फलां ने इतने रूपए की अपनी बेटी की शादी की है और फलां फलां को इतनी रकम शादी के नाम पर मिली है... जिस पर सरकार एक सीमा तक छुट प्रदान कर सकती है और बाकि राशि पर टेक्‍स ले सकती है. इससे बाद में किसी कारण से यदि दोनों के बीच तलाक की नौबत आती है तो वधू पक्ष वर पक्ष से आधार कार्ड की लिंक दिखाकर दिए हुए सामान को वापस ले सकेंगे..... 

Friday, June 16, 2017

सभी गड्ढें भरे जा चुके हैं....

सभी गड्ढें भरे जा चुके हैं....




बधाई हो... उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा जनता से किया गया वादा पूरा हो गया है जी हां 15 जून निकल चुकी है सरकार द्वारा यह कहा गया था कि 15 जून तक सभी गड्ढों को भर दिया जाएगा.... जी हां उत्‍तर प्रदेश सरकार ने 15 जून को अपने सहयोगी इंद्रदेव को आदेश दिया और इंद्रदेव ने यह आदेश आगे स्‍थानतंरण करते हुए अपने अधीन कार्यरत वरूण देव को कहा कि उत्‍तर प्रदेश के सभी गड्ढों को तत्‍काल प्रभाव से भर दिया जाए... और उन्‍होंने थोड़ी सी मेहनत करते हुए लगभग सभी गड्ढों को भर दिया.... अब आप लोग यह कहोगे कि गड्ढों तो जैसे के तैसे बने हुए हैं... अरे भाई जरा गौर से देखिए गड्ढें पानी से भरे जा चुके हैं... उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सिर्फ यह कहा था कि 15 जून तक सभी गड्ढें भर दिए जाएंगे... यह नहीं कहा था कि सड़कों को मट्टी से या डांबर से भरा जाएगा... पानी से भर दिया गया यह काफी नहीं है.... अब आप मुस्‍कुराई क्‍योंकि आप उत्‍तर प्रदेश में हैं... यहां सरकारें वादा करता और वादे अक्‍सर टूट जाते हैं.... जैसे हमारे मोदी ने कहा था 15 लाख सभी के खाते में आएंगे... जी हां 15 लाख आएंगे….. क्‍योंकि मेरे करन अर्जुन जब आएंगे तो 15 लाख भी आ जाएंगे.... 

Tuesday, June 13, 2017

जरा इनके बारे में भी सोचिए मोदी जी....

जरा इनके बारे में भी सोचिए मोदी जी....



जहां एक तरफ तीन तलाक के मुद्दे पर बहस चल रही है और सभी राजनैतिक पार्टियां अगामी लोकसभा चुनाव के चलते अपने अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं.... और तो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी मानना है कि तीन तलाक का मुद्दा मुस्‍लिम बहू-बेटियों के अहित में है... सही कहां प्रधानमंत्री जी... पर आपको तीन तलाक का मुद्दा दिखाई दे गया... आप जहां से जीत कर प्रधानमंत्री बने हैं जरा वहां पर भी गौर फरमाते तो अच्‍छा होता... जी हां... मैं बनारस की बात कर रहा हूं और वहां पर रह रही विधवाओं के संदर्भ में बात करने जा रहा हूं ..... जी.....इस नगर में वधुओं की भांति रह रहीं सैंकड़ों विधवायें पिछले कई वर्षों से समाज की मुख्यधारा से दूर एक गुमनाम जिंदगी बिता रही हैं। इनमें अधिकतर विधवाएं पंचिम बंगाल की हैं, जो पति की मौत के बाद परिवार से निकाल दी गर्इं और देश के कई हिस्सों में भटकने के बाद वृंदावन और बनारस के विभिन्न आश्रमों में पहुंची या खुद परिवार द्वारा यहां जबरन पहुंचा दी गई। ऐसी महिलाओं की संख्या एक अनुमान के अनुसार करीब चार करोड़ के आसपास है। क्‍योंकि पति की मौत के बाद अभिशाप समझ कर परिवार द्वारा निकाल दी गई हैं... जो बड़ी संख्या में विश्वनाथ मन्दिर के आसपास और गंगा के घाटों पर अपने जीवन के भीषण क्षण काटती मिल जाएंगी। और यह भीषण सत्‍य यह भी है कि समाज से तिरस्‍कृत यह विधाएं जब आश्रम में पहुंचती है तो आश्रम के सर्वेसर्वा इन्‍हें दो वक्‍त की रोटी के एवज में बड़े-बड़े उद्योगपतियों के यहां, नेताओं के यहां भेज दी जाती है.... मेरे कहने का साफ-साफ मतलब यह है कि इनसे देह व्‍यापार भी करवाया जाता है.... तो माननीय मोदी जी जब आपको मुस्लिम महिलाओं की इतनी चिंता है तो कुछ चिंता इन विधवाओं की भी कर लीजिए....और इन विधवाओं को समाज की मुख्‍यधारा से जोड़कर उनको उनका हक दिलाने की कोशिश करें..... 

Sunday, May 28, 2017

टीवी चैनल.... द्वारा खबरों का प्रसारण कुछ इस प्रकार किया जाता है

टीवी चैनल.... द्वारा खबरों का प्रसारण कुछ इस प्रकार किया जाता है

1.    बैकिंग न्‍यूज... बड़ी मशक्‍त के बाद पकड़े गए दो आंतकवादी
2.    गौर से देखिए... एक निर्मोही मां ने कैसे बांधा अपने बच्‍चों को
3.    मां की ममता कहां गई... बांध दिया चारपाई से
4.    अपने बच्‍चों से तंग आकर बांध दिया बच्‍चों को
5.    कैसे कोई मां अपने बच्‍चों के साथ ऐसा कर सकती है
6.    यह कोई आम बच्‍चे नहीं हैं.... रोज करते थे अपनी मां को तंग

इसी प्रकार एक आम खबर को भी बढ़ा चढ़ाकर प्रस्‍तुत कर देते हैं यह टीवी चैनल वाले….. कभी तिल का ताड़ तो कभी ताड़ का तिल बन देते हैं...

अवैध खनन करते हुए दो आरोपियों को धड़ दबोचा

अवैध खनन करते हुए दो आरोपियों को धड़ दबोचा

जैसा कि ज्ञात है कि प्रदेश सरकार ने अवैध खनन पर पूर्णत: रोक लगाने के लिए चाक चौबंध व्‍यवस्‍था की है ताकि प्रदेश में अवैध खनन पर रोक लग सके.... इसके बावजूद भी बिना किसी डर भर के भू-माफिया द्वारा अवैध खनन का कार्य लगातार किया जा रहा है... प्रदेश सरकार की पुलिस अवैध खनन पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए ही थी कि उन्‍हें अपने मुखबिरों से ज्ञात हुआ कि दो व्‍यक्ति अवैध खनन का कार्य कर रहे हैं... प्राप्‍त सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र के दरोगा अपने मयहमराह के साथ मौके पर पहुंच कर छापा मारा..... उक्‍त आरोपियों ने जैसे ही पुलिस बल को अपने पास आते देखा तो भागने की कोशिश करने लगे... जिसमें वह नकामयाब रहे... पुलिस बल ने उन्‍हें चारों तरफ से घेर कर धड़ दबोचा..... उक्‍त आरोपियों के अपना नाम चिंटू..मिंटू बताया है जो कि अपने घर से खेलने के बहाने निकले थे और अवैध खनन की वारदात को अंजाम देने लगे... इन लोगों के पास से पुलिस ने एक जेसीबी मशीन व दो ट्रक बारामद किए.... जिसे वह अवैध खनन के लिए इस्‍तेमाल कर रहे थे... दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत कर लिया है.... वहीं चिंटू... और मिंटू से हमारे संवाददाता की बात हुई तो उन्‍होंने कहा कि हम यहां खेल रहे थे और पुलिस बल ने हमें पकड़कर झूठा आरोप लगा दिया कि हम अवैध खनन में लिप्‍त हैं... अब देखना यह है कि कौन सही और कौन झूठ बोल रहा है। हालंकि दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है और उनको उनके परिवार के हवाले कर दिया है और हिदायत दी है कि आगे से वह अवैध खनन करते हुए पाए गए तो सख्‍त से सख्‍त सजा हो सकती है....
कृपया इसके एक व्‍यंग्‍य के रूप में देखे... इसका किसी भी प्रदेश की सरकार व पुलिस से कोई सरोकार नहीं है यदि किसी भी प्रदेश की सरकार व पुलिस से संयोगवश मिलान होता है तो इसे मात्र एक संयोग समझा जाए.....

Friday, May 12, 2017

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

 पर्यटन हमेशा से किसी समाज के लिए सामाजिक आयोजन रहा है। यह प्रत्येक मनुष्य की प्राकृतिक अभिलाषा से अभिप्रेत होता है यह लोगों में नए अनुभव, कार्य, शिक्षा, ज्ञान और मनोरंजन के लिए होता है। इससे एक दूसरे की संस्कृति और मूल्य को समझने के लिए तथा अन्य सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक हितों की पूर्ति के लिए पर्यटक और मूल संरचना का विकास हुआ है। वैसे पर्यटन के अनेक आयाम हैं। क्योंकि पर्यटक सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाने के साथ-साथ राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में भी महती योगदान देता है।
भारत के संदर्भ में पर्यटन की बात करें तो जर्मन विद्वान मैक्समूलर की एक उक्ति याद आती है, ‘‘अगर मुझसे पूछा जाए, कि इस आसमान के नीचे मानव ने कहां पर अपने सबसे खूबसूरत उपहार को पूरी तरह संवारा है, तो मैं भारत की ओर इशारा करूंगा।’’ यही है भारत की वैभवपूर्ण विरासत। क्योंकि भारत में, पर्यटन उद्योग का विशेष स्थान हैं चूंकि इसमें न केवल उच्च दर पर विकास करने की क्षमता है अपितु अपने अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष संबंधों और अंतर क्षेत्रीय सहक्रियाशीलताओं के माध्यम से कृषि, बागवानी, हस्तशिल्प, परिवहन, निर्माण आदि के साथ अन्य आर्थिक क्षेत्रकों को भी अभिप्रेरित करता है। अर्थात यह देश में दूसरे उद्योगों को बल प्रदान कर करता है और अंतरराष्ट्रीय ऋण चुकाने में सहायता करने के लिए पर्याप्त धन का अर्जन कर करता है। क्योंकि यह देश के लिए तीसरा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा का अर्जक है।
अगर देखा जाए तो पर्यटन आरंभ से ही राष्ट्रों के मध्य सामाजिक आदान-प्रदान की भूकिा निभाने का मुख्य बिंदु रहा है। हालांकि परंपरागत तौर पर पर्यटन को विलासिता माना जाता रहा है, परंतु बदले वैश्विक परिदृश्य में पर्यटन अपेक्षाकृत बड़े सामजिक, सांस्कृतिक-धार्मिक परिप्रेक्ष्य में आता है और उसकी रूचियां भी अलग-अलग होती है। आज पर्यटन ‘‘विलासिता’’ नहीं रहकर आम व्यक्ति की पहुंच में है। यह सामान्य जीवन प्रक्रिया का हिस्सा माना जाने लगा है। पर्यटन स्थल पर पर्यटक नए सामाजिक जीवन के संपर्क में आने से वह दूसरों से सीखता है। इस रूप में लोगों के बीच बेहतर समझदारी पैदा करते हुए पर्यटन उसके सामाजिक विकास के एक साधन के रूप में गहरा प्रभाव डालता है।
पर्यटन किसी देश में रहने वाले लोगों के जीवन-स्तर तथा रहन-सहन की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार लाए जाने के साथ ही रोजगार -सृजन का भी महत्वपूर्ण कार्य करता है। पर्यटन से स्थानीय कर-प्राप्तियों के रूप में अर्थव्यवस्था को जो लाभ होता है, उससे सामाजिक निर्धनता उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, पेयजल तथा स्वच्छता, मनोरंजन के अधिक अवसरों आदि आधारभूत सेवाओं की व्यवस्था को वास्तविकता में साकार किया जा सकता है। यहीं नहीं, सामाजिक असमानताओं को दूर करने की दृष्टि से भी पर्यटन प्रभाव डालता है।
वहीं इस संदर्भ में मैड्रिक में सन् 1994 में हुई विश्व पर्यटन की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय योजना की बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि सामान्यतया सभी पर्यटक ऐसे स्थानों का चुनाव पर्यटन के लिए करते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर होने के साथ ही स्वच्छ और कम आबादी वाले हों। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि कोई पर्यटक न तो वहां की सामाजिक समस्या का और न ही खराब पर्यावरण का शिकार हो।
इस परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट है कि पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, सफाई के साथ ही स्वस्थ एवं सुरक्षित वातावरण विशेष रूप से आवश्यक है। साथ ही पर्यटकों को खतरों एवं बाधाओं का सामना ना करना पड़े। खतरों और बाधाओं का अर्थ सामान्यतया इस बात से लिया जाता है कि वे तत्व, जिनसे भविष्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होने की आशंका हो। क्योंकि ऐसे जितने भी तत्व और कारण जिनसे कि पर्यटक किसी स्थान पर जाने से कतराने लगें, पर्यटन पर जिनसे प्रतिकूल असर पड़े और जिनसे उस स्थान विशेष पर पर्यटन के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगे, वे ही पर्यटन के खतरे और बाधाएं होती है। इस अर्थ में पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का वातावरण, छेड़छाड़ की घटनाएं, पर्यावरण प्रदूषण, यौन उत्पीड़न, जन-अपराध, सुविधाओं का अभाव आदि ही पर्यटन की सबसे बड़ी बाधाएं एवं भविष्य के लिए खतरे हैं। पर्यटन स्थलों पर स्थानीय समुदाय और पर्यटकांे के बीच समन्वय का नहीं होना, स्थानीय लोगों का पर्यटन के प्रति जागरूक नहीं होना, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की होड़ में घरेलू या स्वेदशी पर्यटन की अनदेखी करना आदि बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन को बाधित करते हैं।
वहीं खतरों और बाधाओं के मद्देनजर अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए बम विस्फोटों के बाद अधिकांश देशों ने अपने पर्यटकों को अमेरिका और आसपास के देशों में नहीं जाने की सलाह दे दी थी। पश्चिम में इससे पर्यटन उद्योग लगभग लड़खड़ा गया था। इसी प्रकार कश्मीर के आतंकवाद, अक्षरधाम मंदिर में हुए बम विस्फोट, राजधानी दिल्ली में संसद पर हुए हमले आदि का प्रभाव केवल उस समय तक के लिए ही पर्यटन पर नहीं पड़ा बल्कि इसका पूरा खामियाजा लंबे समय तक देश के पर्यटन उद्योग को भुगतना पड़ा। साथ ही स्थान विशेष पर पर्यटकों से ठगी, लूटपाट, उनके साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी उनके वहां नहीं जाने का सबब बनती हैं।
हमारे यहां अब भी पर्यटन विकास का प्राथमिक क्षेत्र नहीं बन सका है। इसके मूल में पर्यटन की बहुत सी बाधाएं एवं खतरे ही हैं। कमजोर इच्छा-शक्ति, लालफीताशाही, देश में होनेवाली आतंकवादी वारदातें, जन-अपराध, आम जन की उद्योगों के प्रति उदासीनता, केंद्र-राज्य संबंधों के अकसर होने वाली कड़वाहट, अपर्याप्त सुविधाएं, पर्यावरणीय दुष्प्रभाव आदि बहुत सी ऐसी अड़चनें, या यों कहें कि बाधाएं, पर्यटन उद्योग में हैं जिनके कारण व्यापक संभावनाओं के बावजूद पर्यटन का विकास देश में पूरी तरह से नहीं हो सका है।
वैसे इन दिनों पर्यटन उद्योग केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है। पर्यटकों की बारीक सुविधाओं पर दिया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित नतीजे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। देश में यह तीसरा सबसे बड़ा सेवा उद्योग है और भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी छह फीसद से अधिक है। देश के सकल रोजगार में इस क्षेत्र का हिस्सा लगभग नौ फीसद है। जाहिर है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग ने विशिष्ट और लाभकारी मुकाम बना लिया है। उल्लेखनीय यह भी है कि पर्यटन से होने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा विदेशी पर्यटकों से प्राप्त होता है। दर्शनीय पर्यटन स्थलों के कारण भारत की तरफ विदेशी सैलानियो का खासा रुझान रहता है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग पचास लाख विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनसे पर्यटन उद्योग को करीब ग्यारह अरब डॉलर की कमाई होती है। ऐसे में अगर विदेशी पर्यटकों की आमद में कमी होने लगे तो यह निश्चित ही चिंता का विषय है। सन् 2011 में विदेशी पर्यटकों में नौ फीसद बढ़ोतरी हुई थी, जो 2012 में छह और 2013 में तीन फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि 2014 में कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन वर्ष 2015 में संख्या में गिरावट आई। इस साल जनवरी से जून तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पर्यटकों की आवक में सात फीसद बढ़ोतरी देखी गई।
आंकड़ों से इतर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले राज्यों में उनकी आमद में कमी हुई है। हिमाचल के शिमला-मनाली से लेकर आगरा के ताजमहल और ऐतिहासिक किलों और हवेलियों के प्रदेश राजस्थान के सभी पर्यटन स्थलों पर इस वर्ष अब तक विदेशी पर्यटकों की आमद घटी है। अगर इसी तरह से भारत के प्रति विदेशी पर्यटकों का मोहभंग होता रहा, तो आने वाले समय में भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। पर्यटन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने इस स्थिति के लिए विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और कुशल श्रम शक्ति का अभाव तथा आधारभूत ढांचे की कमी को जिम्मेदार माना है। समिति ने रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों में लगातार गिरावट पर चिंता जताते हुए सरकार से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
वहीं समाज में तेजी से बढ़ रहे अपराध भी पर्यटन विकास को बाधित करते हैं। डकैती, लूटपाट, गुंडागर्दी जैसी घटनाओं के समाचार जब मीडिया की सुर्खियां बनते हैं तो इससे उस स्थान विशेष के साथ पूरे देश की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। बढ़ते जन अपराध समाज के लिए तो चिंता का विषय बनते ही हैं, पर्यटन पर भी इनका बुरा प्रभाव घटती पर्यटकों की संख्या के रूप में सामने आता है। बसों, ट्रेनों में नशीला पदार्थ खिलाकर यात्रियों से लूट-पाट, छीना-झपटी, पर्यटकों के प्रवेश करते ही पूर्व नियोजित योजना के तहत उन्हें ठगने की साजिश आदि अपराधों से पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का माहौल बनता है। ऐसे में बहुत से देशों की सरकारों द्वारा अपने निवासियों को भारत न जाने की सलाह दी जाने लगी है।
पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं उद्योग के लिए विशेष रूप से खतरा बनकर सामने आ रही हैं। इसी का एक पहलू पर्यटकों का यौन उत्पीड़न भी है। ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी आदि देशों ने तो विशेष रूप से अपने देश के पर्यटकों को भारत के खतरे गिनाने प्रारंभ कर दिए हैं। विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा वेबसाइट के जरिए अपने नागरिकों को दी जाने वाली सलाह में अब भारत में पर्यटकों के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न, शारीरिक प्रताड़ना, छेड़छाड़, गाली-गलौज, अश्लील हरकतों आदि का हवाला देते हुए सावधानी बरतने के लिए कहा जाने लगा है।
विदेशी पर्यटकों की इस उदासीनता की बड़ी वजह उनके साथ होने वाले अपराध हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ हुए अपराधों के कुल 384 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 135 मामले राजधानी दिल्ली में दर्ज हुए। उसके बाद गोवा में 66 और उत्तर प्रदेश में 64 मामले दर्ज हुए। बीते वर्षों में विभिन्न शहरों में सर्वेक्षण में लगभग सत्तर फीसदी ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना था कि हर विदेशी पर्यटक की भारत आने की पहली शर्त पुख्ता सुरक्षा की होती है और मौजूदा हालात इसकी इजाजत नहीं देते। इसी साल अप्रैल में राजस्थान के अजमेर में एक स्पेनिश जोड़े पर कुछ बदमाशों ने हमला कर उसे घायल कर दिया और महिला के साथ बलात्कार की कोशिश की। एक अन्य वारदात में माता-पिता के साथ देहरादून घूमने आई बारह साल की इजरायली लड़की के साथ एक फोटोग्राफर ने बदसलूकी की कोशिश की। पिछले साल जून में दिल्ली के द्वारका में तीस वर्षीय विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट की हुई। वर्ष 2014 में दिल्ली में इक्यावन वर्षीय विदेशी महिला के साथ लूटपाट और दुष्कर्म हुआ था। इसके अलावा, 2013 में मध्य प्रदेश के दतिया में विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात ने देश को शर्मसार किया था।
इस परिप्रेक्ष्य में केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने विदेशी महिला पर्यटकों को स्कर्ट ना पहनने और छोटे शहरों में देर रात को अकेले ना घूमने की सलाह दी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार महेश शर्मा नें, पर्यटकों की सुरक्षा पर आगरा में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बात कही। इसी कड़ी में उन्होंने पत्रकरों को बताया कि विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एअरपोर्ट पर उन्हें एक बुकलेट दी जा रही है, जिसमें क्या करें और क्या ना करें जैसी चीजों का वर्णन किया गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 के मुकाबले 10.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की बात की जाए तो इस संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं विदेशी पर्यटकों के खिलाफ होने वाले अपराधों की बात करें तो महिलाओं पर होने वाले हमले दूसरे और बलात्कार तीसरे सबसे अधिक होने वाले अपराध हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जी का चिंतित होना लाजमी भी है। लेकिन अपराधियों को पकड़ने के और अपराध रोकने के कारगर तरीके खोजने की बजाए, क्या पहनना चहिये, और किस समय पर घूमना चाहिए जैसे सुझाव सामने आने के बाद महिलाओं के प्रति आम सोच एक बार फिर सामने आती है।

यह बात कहने में कोई दोमत नहीं है कि तीन-चार साल में विदेशी सैलानियों के मन में भारत भ्रमण लेकर असुरक्षा का भाव घर करता जा रहा है, जिस वजह से वे भारत की ओर से लगातार मुंह फेरते जा रहे हैं। भारत के अधिकतर पर्यटन स्थलों जैसे दिल्ली, मुंबई, आगरा, वाराणसी, हरिद्वार, अजमेर, जोधपुर, सांची आदि में आपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। राजधानी दिल्ली के हाल सबसे गंभीर हैं। विदेशी पर्यटकों के मन में भारत को लेकर बढ़ रहे असुरक्षा भाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब भारत आते ही अपनी सुरक्षा के लिए मिर्च पाउडर रखने से लेकर बॉडीगार्ड रखने तक खुद ही तमाम तरह के इंतजाम करने लगे हैं। यह स्थिति हमारी पुलिस व्यवस्था पर कठोर टिप्पणी तो है ही, पर्यटन उद्योग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है और दुनिया में भारत की छवि खराब करने वाली भी है। पर्यटन मंत्रालय को इस पर गंभीर होना ही होगा।

Thursday, May 11, 2017

यह तो बस शुरूआत है......

यह तो बस शुरूआत है......


उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार और मुखिया अखिलेश यादव के कार्यकाल में जब कभी दंगें हुए तो भारतीय जनता पार्टी इन दंगों को आड़े हाथों लेती रही और इसे सपा सरकार व अखिलेश यादव की नाकाबलियत मानती रही... कि उनके कार्यकाल में कानून व्यवस्था ठप्प हो जाती है... इस संदर्भ में बीजेपी के सभी नेता अपने-अपने भाषण और वक्तव्य में कहा करते थे कि उनकी सरकार होती तो ऐसा नहीं होता.... दंगें नहीं होते, कानून व्यवस्था सूचारू रूप से चलती... तो आज उनके बता दूं कि प्रदेश में उनकी पूर्ण बहूमत की सरकार है जिसे बने हुए अभी जुमा-जुमा 2 माह ही हुए हैं और प्रदेश में बलात्कापर, मार-पीट, लूटमार तो चल ही रहा था अब दंगों की शुरूआत सहारनपुर दंगों से हो चुकी है.... इसका मतलब यह है कि बीजेपी भी कानून व्यूवस्था सूचारू ढंग से चला पाने में असमर्थ प्रतीत हो रही है... क्योंकि दूसरों की कार्य प्रणाली पर लांछन तो कोई भी लगा सकता है.... जब वो चीजेें खुद करनी पड़े तो कोने तलाशते फिरते हैं.... जुमले मारिए और इस दंगें को किसी और पार्टी पर मड़ दीजिए.....किस इस दंगें को करवाने में किसी और पार्टी का हाथ है जो अपनी बीजेपी (योगी सरकार) को नीचा दिखाने के लिए यह सब कर रही है.... हालांकि बीजेपी या उनकी पार्टी का कोई मंत्री ऐसा कोई भी बयान देता है तो इससे यह भी साफ साबित हो जाएगा कि सपा शासनकाल में हुए दंगों में शायद बीजेपी का हाथ न हो..... वैसे मैं सपा का समर्थक नहीं हूं..... जो सपा के पक्ष में और बीजेपी के विपक्ष में नहीं लिख रहा हूं... सपा के शासनकाल में सभी जानते हैं कि कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था की रीड़ तोड़ दी जाती है... ताकि उनके नेता और समर्थक अपनी मनमानी कर सकें... तो उसी के पदचिन्हों पर योगी सरकार भी चलती हुई प्रतीत हो रही है.... क्योंकि देखा जा रहा है कि भगवा धारण करके योगी व बीजेपी के समर्थक अती पर उतारू नजर आ रहे हैं..... खास तौर से मुसलमानों के विपक्ष और विरोध में खड़े नजर आ रहे है.... इस विरोध से सिर्फ और सिर्फ दंगें होगें और कुछ नहीं हो सकता... खैर अभी तो शुरूआत है 4 साल 10 माह बाकि है.........

Sunday, May 7, 2017

कहां गई वो मोमबत्तियां.....

कहां गई वो मोमबत्तियां.....

आज एक शादीशुदा महिला के साथ उसके पति के सामने 8 लोगों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया... जिसे हमारे कुछ मीडिया चैनलों ने मात्र एक छोटी सी खबर बनाकर पेश किया....वहीं कुछ चैनलों को इस खबर से कोई सरोकार नहीं दिखा.... और न ही कहीं कोई मोमबत्तियां दिखाई दी, न कहीं कोई जलूस दिखाई पड़ा, न कोई हो-हल्‍ला.... न न्‍याय की मांग, न कानून में परिवर्तन, न बलात्‍कारियों को फांसी की सजा मांग, न ही न्‍यूज चैनलों पर बड़े-बड़े बुद्धजीवियों द्वारा कोई डिबेट....न चर्चा, न परिचर्चा.... क्‍या यह बलात्‍कार की श्रेणी में नहीं आता... क्‍या बलात्‍कार सिर्फ निर्भया के साथ हुआ था.... जिसे लेकर हजारों लोग दिल्‍ली में तख्‍तियां लेकर न्‍याय की और बलात्‍कारियों को फांसी देने की मांग कर रहे थे...इस महिला के साथ 8 लोगों ने गैंगरेप किया, शायद यह इनकी दृष्टिकोण से बलात्‍कार की श्रेणी में नहीं आता होगा…. तभी तो चारों तरफ सन्‍नाटा पसरा पड़ा है.... या फिर कुछ और कारण तो नहीं है जो निर्भया के साथ हजारों की भीड़ खड़ी हो गई थी... और इस महिला के साथ कोई भी नहीं….शायद यह एक दलित महिला थी, तभी इसकों न्‍याय दिलाने के लिए कोई सामने आता नहीं दिख रहा है....

अभी 5 मई को ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया कांड के सभी दोषियों को फांसी की सजा बरकरार रखी है और इसके बाद यह कांड..... क्‍योंकि उनको भी पता है कि हमारे देश की न्‍याय व्‍यवस्‍था कितनी लचीली है..... कुछ नहीं बस केस चलता रहेगा.... और हम खुले आम घूमते रहेंगे हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.... और यदि 5-10 साल बाद सजा हो भी गई तो सजा कितनी 2-5 साल की होगी.... जिस हम हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चेंलेज कर देंगे फिर वहां भी 2-5 साल केस चलेगा..... हमारा कुछ नहीं होगा.....यही वास्‍तविक हकीकत है..... जो निर्भया के पहले और निर्भया के बाद न जाने कितनी निर्भया इस दंश को झेलने पर मजबूर होंगी.... क्‍योंकि सिर्फ निर्भया ही थी जिसके पीछे एक हजूम दिखा बाकि तो सब ऐसे ही थी... क्‍योंकि किसी नेता ने कहा था बलात्‍कार होना आम बात है और किसी अन्‍य नेता ने कहा था कि बच्‍चों से गलतियां हो जाती है.... और सबको पता है बच्‍चे गलतियां करते रहते हैं..... पर एक दलित महिला के साथ हुए गैंगरेप के बाद लगता है कि हमारे समाज का कुछ नहीं हो सकता.... क्‍योंकि पीडिताओं को कभी न्‍याय नहीं मिल सकता और दोषियों को न ही सजा...

Monday, May 1, 2017

वाह रे आदमी

वाह रे आदमी

आदमी अच्‍छे रास्‍ते पर नहीं जाता
पर बुरे रास्‍ते पर सभी जाते हैं
इसलिए दारू बचने वाला कहीं नहीं जाता
पर दूध बेचने वाले को घर-घर, गली-गली, कोने-कोने में जाना पड़ता है
और दूध बेचने वाले से बार-बार पूछा जाता है पानी तो नहीं डाला, पानी तो नहीं डाला
पर दारू में खुद पानी मिला-मिलाकर पीते हैं... वाह रे दुनिया...वाह रे दुनिया
वाहे रे दुनिया तेरी रीत...
जो भाग्‍य में है वो भाग कर आएगा
जो नहीं है वो आकर भी भाग जाएगा
जिंदगी...यह जिंदगी को इतना सीरियस लेने की जरूरत नहीं है यारों
यहां से जिंदा बचकर न कोई गया है, न कोई जाएगा
इक सच बात यह भी है कि
अगर जिंदगी इतनी अच्‍छी होती, तो हम ये दुनिया में रोते रोते न आते
मगर मीठा सच यह भी है कि अगर जिंदगी बुरी होती, तो जाते-जाते रूलाकर ना जाते
वारे आदमी... तेरे करेक्‍टर
लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है
पर बेजुबान जीव को मार कर खाता है
यह मंदिर-मस्जिद भी क्‍या गजब की जगह है दोस्‍तों
यहां गरीब बाहर और अमीर अंदर भीख मांगता है
विचित्र दुनिया का कठोर सत्‍य
बारात में दुल्‍हे सबसे पीछे और दुनिया आगे चलती है
मइ्यत में जनाजा आगे और दुनिया पीछे चलती है
यानी दुनिया खुशी में आगे... और दुख में पीछे जाती है
अजब तेरी दुनिया... गजब तेरा खेल
मोमबती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबती बुझाकर जन्‍मदिन मनाना
नई सदी मिल रही है दर्द भरी सौगात
बेटा कहता है बाप से तेरी क्‍या औकात
पानी आंखों का मरा, मरी शर्म और लाज
कहें बहू अब सास से, घर में मेरा राज
भाई भी करता नहीं, भाई का विस्‍वास
बहन पराई हो गई, साली खासमखास
मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश
बापू को बोझ समझे, पत्‍थर लगे गणेश
बचे कहां अब शेष है, दया, धर्म और ईमान
पत्‍थर के भगवान है, पत्‍थर दिल के इंसान
पत्‍थर को लगते हैं छप्‍पन भोग
मर जाते हैं फुटपाथ पर भूखे प्‍यासे लोग
पहन मुखौटा धर्म का, करते दिन भर पाप
भंडारे करते फिरे, घर में भूखा बाप
वाह रे आदमी, वाह रे इंसान

गजब तेरी दुनिया, गजब तेरे ख्‍बाव......