सरोकार की मीडिया

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Thursday, December 8, 2011

क्योंकि मैं ही प्रथम और मैं ही अंतिम हूं


क्योंकि मैं ही प्रथम और मैं ही अंतिम हूं

क्योंकि मैं ही प्रथम और मैं ही अंतिम हूं

मैं ही सम्मानित और मैं ही तिरस्कृत हूं

मैं ही भोग्या और मैं ही देवी हूं

मैं ही भार्या और मैं ही कुमारी हूं

मैं ही जननी और मैं ही सुता हूं

मैं ही अपनी माता की भुजाएं हूं

मैं बांझ हूं किंतु अनेक संतानों की जननी हूं

मैं विवाहिता स्त्री हूं और कुंवारी भी हूं

मैं जनित्री हूं और जिसने कभी नहीं जना वो भी मैं हूं

मैं प्रसव पीड़ा की सांत्वना हूं

मैं भार्या और भर्तार भी हूं

और मेरे ही पुरूष ने मेरी उत्पत्ति की है

मैं अपने ही जनक की जननी हूं

मैं अपने भर्तार की भगिनी हूं

और वह मेरा अस्वीकृत पुत्र है

सदैव मेरा सम्मान करो

क्योंकि मैं ही लज्जाकारी और मैं ही देदीप्य मान हूं

तीसरी या चौथी सदी ई. पू. नाग हम्मापदी से प्राप्त -पाओलो कोएलो

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