सरोकार की मीडिया

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Friday, December 3, 2010

महिलाएं भी समाज में सिर उठाकर जी सके

आखिर महिलाओं के शोषण का जन्म क्यों हुआ, इसका मूल कारण क्या रहा होगा, यह एक जटिल प्रश्नह है जो हमारे सामने आज विकराल रूप लिए खडा हैा वैदिक युगीन काल में स्त्री की सामाजिक स्थिति को ऐतिहासिक काल माना गया हैा जहां उसे ‘यत्र नार्यस्तु पूज्योन्ते रमन्ते तत्र देवता’ कहकर महिलाओं को संबोधित किया जाता थाा1 उपनिषेद काल में नारी को पुरूषों के समान दर्जा प्रदान किया गया, ज्यों ज्यों काल का विभाजन होता गया , उसी प्रकार नारी के अधिकारों का भी दोहन होता गया,और नारी समाज के हाशिये पर केवल और केवल अकेली स्त्रीग के रूप में अपने अधिकारों को पाने की चेष्ठार में विशाल दलदल में घसती चली गयीा जिस दलदल से नारी अपने आप को आज तक उबार नहीं पायी है, या फिर पुरूष समाज ने उसे कभी उबरने का मौका ही नहीं दियाा एक जमान था जब समाज मात़ृसत्तात्मरक समाज के रूप में जाना जाता था, स्वंभाव से कोमल, कमजोर होने के चलते पुरूष समाज ने मातृसत्तातत्म क समाज पर धीरे धीरे अपना वर्चस्व कायम कर लिया और नारी को हाशिये पर लाकर खडा कर दियाा पितृसत्तामत्मरक समाज ने नारी पर तरह तरह की वंदिशें लगाकर अपने पुरूष होने का दबदबा स्था‍पित करने का प्रयास किया है, और बहुत हद तक पुरूष नारी को दबाने में कामयाब भी रहा हैा पितृसत्ताात्मरक पुरूष प्रधान समाज ने नारी के अधिकारों का हनन के साथ साथ उन पर हिंसात्मभक प्रवत्ति भी अपनाई हैा जिससे महिलाओं की स्थिति अत्यं त दयनीय हो चुकी हैा महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों की सूची तो बहुत लम्बीर है परन्तुअ दहेज हत्या और बलात्कारर प्रमुख अत्याओचार की श्रेणी में हैा
दहेज हत्या : भारत में दहेज प्रथा अपने चरम पर है दहेज प्रथा ने सभी जातियों को एक कर दिया है आज हर जाति में दहेज की मांग आम बात हो गयी हैा सभी लोग दहेज का लेन देन खुल्ल म खुल्लाह कर रहे हैा चाहे वो किसी भी जाति से ताल्लुक रखता होा दहेज एक ऐसी प्रथा है जिसमें वधु पक्ष वर पक्ष को कन्या दान के एवज में वर पक्ष द्वारा मांगी जाने वाली नकद राशि या वस्तुस है जिसे वधु पक्ष को देने के लिए बाध्य किया जाता हैा यदि शादी के समय वर पक्ष द्वारा की जाने वाली मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो शादी के बाद वधु पर तरह तरह के जुल्मों सितम ढाये जाते है और उन्हें अपने परिवार वालों से धन की मांग को पूरा करने के लिए विवश कर दिया जाता हैा दहेज एक ऐसा कवज है जो वधु की सुरक्षा की गांरटी लेता है जब तक वर पक्ष द्वारा मांगी जाने वाली मांगों की पूर्ति होती रहेगी तब तक वधू ससुराल में अपने आपको सुरक्षित महसूस करती रहेगीा यदि वर पक्ष की मांगों की पूर्ति न नहीं होती तो वधू के साथ मारपीट, ताने मारना, गाली गलौच और तो और उसको अपनी जाने से भी हाथ धोना पडता हैा आंकडों के मुताबिक 1991 में बिहार में 530 दहेज के मामले प्रकाश में आये जिसमें 300 महिलाओं की दहेज के लिए हत्याब कर दी गयी थीा सरकारी आंकडों के अनुसार उत्तर प्रदेश 2222, 32 प्रतिशत, बिहार में 1082 मामले 15.5 प्रतिशत, मध्यर प्रदेश में 685 मामले 9;8 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 442 मामले 6;3 प्रतिशत तथा राजस्थासन में 429 मामले 6;1 प्रतिशत दर्ज हुए, इससे यह साबित होता है कि सांविधान द्वारा निर्मित कानून दहेज अधिनियम 498ए का उल्लंधन बतौर जारी हैा

बलात्कार – ये वास्त व में अत्यंलत दुर्भाग्य की बात है कि सबसे अधिक असुरक्षित, अपमानित ओर पीडामय भारत की स्त्रियों का ही जीवन हैा जहां स्त्रीन अपने आपको कहीं भी पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं महसूस करती है उसे अपने अस्मित का खतरा बाहर वालों से कम सबसे अधिक परिवार, रिश्तेदारों एवं पडोसियों से रहता हैा बलात्कार एक ऐसा कृत्य है जो स्त्री को शारीरिक पीडा के साथ साथ मानसिक रूप से भी आघात करता हैा बलात्कार पीडिता महिला समाज के सामने अपमानित महसूस करती है और स्वसयं को स्त्री होने पर कोसती है क्‍योंकि मैं स्त्री हूं इसलिए मेरे साथ ऐसा हुआ हैा राष्टीैय अभिलेखन ब्यूरों की रिपोर्ट के अनुसार ‘’, भारत में हर 54 मिनट में एक लडकी के साथ्‍ बलात्कार की घटना घटित होती है और हर 26 वे मिनट में छेडछाड जैसी घटनाओं से रूबरू होना पडता हैा यदि आंकडों की बात की जाये तो आंकडें वास्त्व में चौकाने वाले है ‘’नेशनल क्राइम ब्यूटरो की रिपोर्ट के अनुसार, ‘’ सन 2000 में भारत में 16496 बलात्कानर के, 32940 मामले छेडछाड के दर्ज किये गये, यदि राज्योंं की स्थिति की बात की जाये तो सन 2000 में मध्यक प्रदेश में 3737, 22;5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 1865, 11;3 प्रतिशत, बिहार में 1570, 9;5 प्रतिशत, महाराष्‍ट में 1310, 7;9 प्रतिशत, राज्यरस्थान में 1342, 7;5 प्रतिशत एवं दिल्लीर में 435, 2;6 प्रतिशत मामले बलात्कार के दर्ज हुए,इससे एक बात तो साबित होती है की भारत की कानून व्येवस्था् कितनी ठीक है और किस हद तक कार्य कर रही है,यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक समय ऐसा भी आयेगा जब महिलाओं को जन्म देने के बाद भी पूर्व काल की भांति मार दिया जाएगा ताकि उसके साथ ऐसा कृत्यओ न हो ा

एक तरफ मानवाधिकार कानून पर कानून बनाता जा रहा है कि महिलाओं की स्थिति में सुधार हो सके दूसरी तरफ पुरूष उस कानून की धज्जियां उडाता जा रहा हैा इसमें पुलिस की अहम भूमिका है क्योंकि पुलिस भी इन आरोपियों से ले कर इसको छोड देता है और बहुत से केसों में तो पुलिस द्वारा ही नारी की अस्मित लूटने का मामला सामने आता हैा

सरकार को चाहिए कि महिलाओं की स्थिति को पूर्ण रूप से सुधाने के लिए महिला पुलिस की भर्ती अधिक से अधिक करे और पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा की मांग न करते हुए एक नया संगठन या फोर्स का निर्माण करे जिससे महिलाएं सिर उठाकर समाज में जी सकेंा

संदर्भ:- 1- नारी अस्मिता की परख- डॉ; दर्शन पाण्‍डेय
2; भारतीय महिलाओं की दशा
3; भारतीय नारी: वर्तमान समस्‍यायें और भावी समाधान- डा; आर;पी तिवारी
4; नेशनल क्राइम रिकार्डस ब्‍यूरो, गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्‍ली
5; राष्‍टीय अपराध रिकार्डस ब्‍यूरो, भारत सरकार

Monday, October 4, 2010

महिला और मानवाधिकार

आज मानव जाति के समक्ष सबसे बडी समस्याद सम्मा नपूर्वक जीवन यापन की है, पग पग पर ये तिरस्कृ्त, असुरक्षित एवं उत्पीयडित होते हैंA मानव जाति पर जितने कहर इन दिनों ढाये जा रहे हैं शायद पहले कभी सुनने को मिले होंA मानव अधिकारों में पुरूष और महिलाओं को बराबरके अधिकार प्रदान किये गये हैंA स्त्रीर और पुरूष को सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक स्वितंत्रता समान रूप से प्राप्तन हैSA इन स्वातंत्रताओं में महिला एवं पुरूष दोनोंको समान सह अस्तित्व जात पात भेदभाव का उन्मूऔलन साम्‍प्रायिकता का परित्या ग समाहित हैSA महिला स्वभतंत्रता के निमित्तम इन लक्ष्योंप की प्राप्ति हमारे संवैधानिक प्रावधानों में निहितहैSA

महिलाओं को पुरूषों की भांति संविधान में अधिकार प्रदान किये गये हैं परन्तुं पुरूष समाज द्वारा महिला के कमजोर होने और अपने अधिकारों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण उनके अधिकारोंका हनन किया जा रहा हैSA इन अधिकारों के हनन के कारण महिलायें आज सर्वाधिक पीडित हैSA पुरूष द्वारा नारी उत्पीेडन छेडछाड की घटनायें द्रोपदी के चीर की तरह बढ रही हैंSaA आये दिन नारी अपहरण दहेज उत्पीरडन छेडछाड बलात्काडर एवं घरेलू हिंसा की आग में झुलस रही हैSA जितना पुराना भारत का इतिहास हैS] उतना ही पुराना महिला उत्पीरडन का इतिहास हैSA महिलाएं स्वाहभाव से ही अपेक्षाकृत कोमल होती हैंa] और वे अत्या‍चारों का ज्यानदा प्रतिरोध नहीं कर पाती हैंaSA

आज दुनिया भर में जितने भी अपराध होते हैंSa] उनमें अधिकांश किसी महिला के खिलाफ ही होते हैंaSA जैसे जैसे मानव सभ्याता विकसित होती गई] वैसे वैसे महिलाओं के साथ अपराधों की संख्या भी बढती गईA महिलाओं के साथ अपराध सिर्फ अशिक्षित और गरीब वर्ग में ही नहींa] बल्कि उच्चं शिक्षित धनी और प्रतिष्ठित परिवारों में भी होता हैSA महिलाओं के प्रति अपराध कई प्रकार के होते है &

 वैवाहिक हिंसा

 पारिवारिक हिंसा

 दहेज उत्पीिडन एवं हत्याह

 दहेज को लेकर आत्मपहत्याह हेतु प्रेरित करना

 महिला हत्याक

 जबरदस्ती जिस्महफरोशी के दलदल में धकेलना

 लैंगिक भेदभाव और लैंगिक अत्याशचार

 अपहरण के रूप में उत्पीजडन

 भ्रूण हत्याा और लिंग निर्धारण

 विभिन्नत प्रकार का यौन उत्पीाडन

 कार्यस्थ्ल पर यौन उत्पी्डन

 स्कूयल कॉलजों में यौन उत्पी‍डन

 सामाजिक रूप से अपमानित करना

 आर्थिक बंदिशें रखना

महिलाओं के विरूध होने वाले अपराधों के संबंध में भारत सरकार के राष्टीईय अपराध रिकार्ड ब्यू रो क्राइम इन इंडिया द्वारा प्रस्तु त आंकडें चौंकने वाले हैंaA इसके अनुसार महिलाओं के उत्पी डन से संबंधित यौन उत्पीसडन छेडछाड बलात्काार दहेज प्रताडना वैवाहिक तथा हिंसा आदि मामलों में लगातार वृधी हो रही हैA

महिलाओं के प्रति हिंसात्मिक अपराध सबसे प्रमुख हैSA उदाहरण स्व रूप सन 2009 व 10 के आंकडों के अनुसार उत्तरर प्रदेश में औसतन हर 6 दिन में एक महिला की अस्मपत लूटी गई तो करीब हर रोज एक महिला को दहेज के लिए बेघर किया गयाा इस वर्ष अब तक 100 बलात्कािर के मामले दर्ज किए गए 2009 में व उससे पहले 2008 में 49 मामलेदर्ज किए गए थे वहीं अब तक 360 दहेज प्रताडना के मामले दर्ज किए गए जो गत वर्ष की तुलना में 1000 अधिक हैSA नेशनल कमीशन ऑफ विमेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्त र प्रदेश में 2006 में 1372 बलात्का र के मामले दर्ज किए गए जो 2007 में बढकर 1637 और 2008 में 1864 हो गये इसके अलावा महिलाओंके खिलाफ छेडछाड के मामलों में भी खासा वृधी देखी गयी है यह आंकडा भी 2006 में 2182 से बढकर 2009 में 3342 तक पहुंच गयाA

स्त्रीम के विरूध बहुत से मामले सामाजिक मर्यादाओं परिवार की प्रतिष्ठाड के कारण दबा दिये जाते हैं अब भी यह जुवान कुछ भी न कहने के लिए अभिशप्तओ है हमार समाज उसकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है परिवार और विवाह संस्थारओं के दोषपूर्ण ढांचे में नारी शोषित और अपमानित है शादी के बाद यातनाओं का दौर नये सिरे से शुरू हो जाता है अनजान परिवार में जाकर प्रत्ये क सदस्यर को खुश करने की जददोजहद दहेज के ताने सुधड न होने के ताने पति की गुलामी व हर जुल्म सहनेको हर क्षण तैयार रहने जैसी स्थितियां ही अधिकांश लडकियों के वैवाहिक जीवनकी सच्चारई हैA



Monday, August 16, 2010

आजादी के 63 साल बाद फिर भारत एक हो

भारत के लोगों से एकजुट होने का आवहान

आजादी के 63साल पहले गांधी जी ने आवाज दी अंग्रेजों भारत छोडो्। गांधी जी का यह नारा पूरे भारत में एक आजादी की लहर बनकर गूंजने लगा था। आजादी की लडाई का यह अंतिम दौर था। 1942 में उठे इस बंवडर से यह स्पष्ट हुआ कि जब कोई राष्ट् जागता है तो उसकी शक्ति की कोई सीमाएं नहीं रहती। वो आपार शक्ति का स्रोत बन जाता है। एक तरफ तो सारे बडे नेताओं को जेलों में डाल दिया गया था परन्तु् सारा देश एक साथ जाग रहा था। उनका एक मात्र मकसद देश को आजादी दिलाना था। आजाद तो हम हो गये पर यहस जरूर भूल गये कि आजाद होने की सार्थकता आजाद रहने में है।

सभी का एक सपना था स्वंतंत्र भारत हो अपना। लेकिन स्वगतंत्र होने के बाद हमने अपने भारत को छेाटे छोटे टुकडों में, भाषाओं में, जातियों में, संप्रदायों में बांट दिया। अब भारत हमारी पहचान नहीं रहा, हिंदू, मुसलमान, सिख और बौद्ध होना हमारी पहचान बना चुका हैा कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक और राजस्थातन से लेकर असम तक फैला भारत हमें रास नहीं आया,और खालिस्ताबन, बोडोलैंड, आजाद कश्मींर जैसे रूग्णम मानसिकता वाले हमारे अपने भारत की सीमाएं बन गए। जो आंदोलन 1942 को शुरू हुआ था उसको आज तक जीवित रहना चाहिए था उसे जीवित रखने का दायित्वड किसी गांधी का नहीं, हमारा नारा होना चाहिए।

आज इंसान मेरा तेरा अपने स्वार्थ के लिए ही जी रहा है पहले राष्टीयता की भावना राष्ट की रीढ की हड्डी हुआ करती थी अब नहीं रही। वह न तो अब हमें अनुप्राणित करती है,और न ही उद्वेलित। यह वास्तथव में एक चिंता का विषय है कि हमने 63 सालों में क्या खोया, क्या पाया. किसी को इस बात की चिंता नहीं है इस देश के नागरिकों को भी नहीं। आज धर्म और जातीयता के नाम पर दंगे होते है परन्तुी आम आदमी को यह क्यों नहीं लगता कि उसके धर्म उसकी जाति के गौरव, दोनों पर कलंक है। जिस प्रकार धर्माधता दिन प्रति दिन बढती जा रही है उसके खबरों से हम सब अपरिचित नहीं है। यह एक सांप्रदायिकता के नाग की तरह है जो कभी भी हमें डंस सकता है। जिस तरह का अत्याचार पुरूष और खास तौर पर स्त्रियों के प्रति हो रहा है उससे तो यह लगता है कि आजाद भारत सो चुका है वो बेशुद हो चुका है उसको कोई भी फिर से गुलाम बना सकता है।

1942 में उठा नारा एक बार फिर उठना चाहिए इस नारा में अंग्रेजों, भारत छोडों का नारा नहीं बल्कि, क्षेत्रीयता, भारत छोडों, धर्माधता, भारत छोडों, जातीयता, भारत छोडों, सांप्रदायिकता, भारत छोडों का नारा बुलंद होना चाहिए। ताकि भारत स्व तंत्र के 63 साल बाद धर्माधता, जातीयता, क्षेत्रीयता, सांप्रदायिकता, के चुंगल से आजाद हो सके।

63 साल बाद भी आजाद नहीं भारत के बच्चे

कहां सो रहा है बाल श्रम आयोग



कहां है मानवाधिकार आयोग

Tuesday, July 27, 2010

यदि कोई इसका विरोध करें तो वह प्रमाण के साथ अपनी प्रतिक्रिया व्य्क्त कर सकता हैा

मैं जो कहने जा रहा हॅू यदि कोई उसका समर्थन नहीं करता तो अपने तथ्योंं को साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करें; जितनी लड्कियां जिनकी उम्र 25 से 30 साल हो चुकी है और वह कैरियर के या पढाई के नाम पर शादी नहीं करती या पिता द्वारा ला गये रिस्तोंम को मना कर देती है इन लड्कियों को किसी न किसी पुरूषों के साथ शारीरिक संबंध जरूर होता है जिसके कारण ये शादी करने से मां बाप को मना कर देती हैं इन लड्कियों को प्रतिशत लगभग 99 प्रतिशत है जिनका संबंध 25 से 30 वर्ष की आयु में बन जाता है और शारीरिक पूर्ति के चलते ये शादी के लिए मना कर देते है और बहुत सी लड्कियां शादी के पहले पुरूष वर्ग द्वारा छोड् दी गयी होती है वो भी शादी से इंकार कर देती हैा


यदि कोई इसका विरोध करें तो वह प्रमाण के साथ अपनी प्रतिक्रिया व्य्क्त कर सकता हैा

गजेन्द्र शानि 09960540397

Tuesday, July 6, 2010

TAJ MAHAL - THE TRUE STORY"

बी.बी.सी. कहता है...........


ताजमहल...........

एक छुपा हुआ सत्य..........

कभी मत कहो कि.........

यह एक मकबरा है..........





ताजमहल का आकाशीय दृश्य......











आतंरिक पानी का कुंवा............




ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य











गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....




शिखर के ठीक पास का दृश्य.........


आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट.....




प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल........


ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........


पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........


विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....


मकबरे के पास संगीतालय........एक विरोधाभास.........




ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........






निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........




दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....




निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........




कमरों के मध्य 300फीट लंबा गलियारा..


निचले तल के२२गुप्त कमरों मे सेएककमरा...


२२ गुप्त कमरों में से एक कमरे का आतंरिक दृश्य.......






अन्य बंद कमरों में से एक आतंरिक दृश्य..


एक बंद कमरे की वैदिक शैली में

निर्मित छत......




ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....





दरवाजों में लगी गुप्त दीवार,जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था.....




बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए,गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......






बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी.......






बादशाह नामा के अनुसार,, इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया.........








अब कृपया इसे पढ़ें .........



प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........



"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"



प्रो.ओक. अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस

बात में विश्वास रखते हैं कि,--



सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.....





ओक कहते हैं कि......



ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.





अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था,,



=>शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी "ने अपने "बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके ०६ माह बाद,तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए,आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.



इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा

जयसिंह को दिए गए थे.......



=>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए, छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था ,

उदाहरनार्थ हुमायूँ, अकबर, एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं ....



=>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है---------



="महल" शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में

भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता...

यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------



पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...



और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है...



प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि----

मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी,चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....







इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं......

तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था-----



==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है...





==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......





==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......





==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा,के लिखित विवरण से पता चलता है कि,औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......



प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि,ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है.......



आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं,जो आम जनता की पहुँच से परे हैं



प्रो. ओक., जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं.......



==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब....????







राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं....





प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ....





ज़रा सोचिये....!!!!!!





कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत,शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, "तेजो महालय" को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों......?????



तथा......



इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों........???????





आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,,,,,,,,







रूहें लिपट के रोटी हैं हर खासों आम से.....



अपनों ने बुना था हमें,कुदरत के काम से,,,,



फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से......

Friday, June 25, 2010

तो सारा हिंदुस्तान और पाकिस्तान एक कर जाउंगा

अरे दुश्मरनों जरा तो शर्म करो

हमारे भारत पर बुरी नजर ना डालो

यहां रहते है देश के दिवाने

जिनके खून से हम लिखते आजादी के अफसाने

सीमा पार लेके हाथ में बंदूक

हम ओ दुश्मरन को ढूंढ रहे है

अमेरिका, चीन और पाकिस्ता न दूर ही सही

जापान, रशिया इटली और जर्मनी भी नहीं

बिना किसी के मदद से हम जानते है करना हमारी रक्षा

अभी तो हमने हमारे दुश्मदनो को बक्शाी

अगर जान जाए हमारे देश का नशा

ऐसी देगे हम उनको शिक्षा

की मांगते फिरेगें गांव गांव भिक्षा

हमारे देश के सैनिको में उस सावरकर का खून है

जो अंग्रेजो का काला पानी तोड् कर भागा था

हमारे देश के सैनिको में नेताजी का खून है

जिस की ले¶ट राईट सुनक अंग्रेजो के कान के परदे फट गए थें

हमारे सैनिको में उस गांधी का खून है

जिस की सुखी अहिंसा की लकडी को डरकर

अंग्रेज भी देश छेडकर भागे थे

हमारे देश के सैनिको में उस अम्बेंडकर का खून है

जिसकी कलम शाही से इतिहास के पन्नेम रंगे थे

अरे ओ दुश्म नो जरा तो शर्म करे ये फुले और शाहु का देश है

यहा पर अहिंसा और शांति का संदेश देने वाला बुदध भी है

जिसने युदध को त्याशगा था

ये हमारे भारतवासियों की खून की शाही है

इससे कभी मत खेलना

और इतना जरूर जान ले की

इस लिखने वाला भीम का गदा भी इस देश में है

अगर देश के आजादी के लिए भगत सिंह फांसी पर लटक सकते है

गांधी की हत्या की जा सकती है और अम्बेसडकर को मौत आ सकती है

तो हम अपना सर इस लडाई में कटा भी दे

मगर दुश्म नो की सिरो की माला पहनकर दूसरा अगुंलीमाल भी आ सकता है

असे दुश्म्नो जरा तो शर्म करो अगर हमारा गरम खून यहा है

हमारे गरम खून का इम्तिहान ना लो वर्ना कश्मीूरतो दूर ही सही

और एकता चाहते है तो सारा हिंदुस्तान और पाकिस्तान एक कर जाउंगा


                                                                                             राजेश मून, वर्धा