सरोकार की मीडिया

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Sunday, June 10, 2012

जल्द ही एक और कत्ल


जल्द ही एक और कत्ल

हां कातिल हूं, मैं
जब से होश संभाला जब से ही
कभी उम्मीदों का
कभी भावनाओं का
कभी दोस्ती का
तो कभी प्यार का
कत्ल ही किया, मैंने
नहीं जानता
ऐसा क्यों और कैसे हुआ?
खोज किया, शोध भी किया
फिर भी नहीं जान पाया
अब इतना दूर निकल आया हूं
कि सोचना का वक्त कहां
हां वक्त पहले कहां था, मेरे पास
मैं, ही वक्त के पीछे भागता रहा
और कत्ल करता रहा
अपनी खुशियों का
भावनाओं का
दोस्ती का
प्यार का
अब मैं, अकेला हो गया हूं
इस वक्त की मार से
अब तो बस एक कत्ल और बाकी है
इस वक्त का
जिसने मुझसे सब कुछ छीन लिया
करूंगा, इसका भी कत्ल करूंगा
वक्त आने पर?????


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