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Friday, May 12, 2017

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

पर्यटन पर अपराध का प्रभाव: एक अध्ययन

 पर्यटन हमेशा से किसी समाज के लिए सामाजिक आयोजन रहा है। यह प्रत्येक मनुष्य की प्राकृतिक अभिलाषा से अभिप्रेत होता है यह लोगों में नए अनुभव, कार्य, शिक्षा, ज्ञान और मनोरंजन के लिए होता है। इससे एक दूसरे की संस्कृति और मूल्य को समझने के लिए तथा अन्य सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक हितों की पूर्ति के लिए पर्यटक और मूल संरचना का विकास हुआ है। वैसे पर्यटन के अनेक आयाम हैं। क्योंकि पर्यटक सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाने के साथ-साथ राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में भी महती योगदान देता है।
भारत के संदर्भ में पर्यटन की बात करें तो जर्मन विद्वान मैक्समूलर की एक उक्ति याद आती है, ‘‘अगर मुझसे पूछा जाए, कि इस आसमान के नीचे मानव ने कहां पर अपने सबसे खूबसूरत उपहार को पूरी तरह संवारा है, तो मैं भारत की ओर इशारा करूंगा।’’ यही है भारत की वैभवपूर्ण विरासत। क्योंकि भारत में, पर्यटन उद्योग का विशेष स्थान हैं चूंकि इसमें न केवल उच्च दर पर विकास करने की क्षमता है अपितु अपने अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष संबंधों और अंतर क्षेत्रीय सहक्रियाशीलताओं के माध्यम से कृषि, बागवानी, हस्तशिल्प, परिवहन, निर्माण आदि के साथ अन्य आर्थिक क्षेत्रकों को भी अभिप्रेरित करता है। अर्थात यह देश में दूसरे उद्योगों को बल प्रदान कर करता है और अंतरराष्ट्रीय ऋण चुकाने में सहायता करने के लिए पर्याप्त धन का अर्जन कर करता है। क्योंकि यह देश के लिए तीसरा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा का अर्जक है।
अगर देखा जाए तो पर्यटन आरंभ से ही राष्ट्रों के मध्य सामाजिक आदान-प्रदान की भूकिा निभाने का मुख्य बिंदु रहा है। हालांकि परंपरागत तौर पर पर्यटन को विलासिता माना जाता रहा है, परंतु बदले वैश्विक परिदृश्य में पर्यटन अपेक्षाकृत बड़े सामजिक, सांस्कृतिक-धार्मिक परिप्रेक्ष्य में आता है और उसकी रूचियां भी अलग-अलग होती है। आज पर्यटन ‘‘विलासिता’’ नहीं रहकर आम व्यक्ति की पहुंच में है। यह सामान्य जीवन प्रक्रिया का हिस्सा माना जाने लगा है। पर्यटन स्थल पर पर्यटक नए सामाजिक जीवन के संपर्क में आने से वह दूसरों से सीखता है। इस रूप में लोगों के बीच बेहतर समझदारी पैदा करते हुए पर्यटन उसके सामाजिक विकास के एक साधन के रूप में गहरा प्रभाव डालता है।
पर्यटन किसी देश में रहने वाले लोगों के जीवन-स्तर तथा रहन-सहन की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार लाए जाने के साथ ही रोजगार -सृजन का भी महत्वपूर्ण कार्य करता है। पर्यटन से स्थानीय कर-प्राप्तियों के रूप में अर्थव्यवस्था को जो लाभ होता है, उससे सामाजिक निर्धनता उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, पेयजल तथा स्वच्छता, मनोरंजन के अधिक अवसरों आदि आधारभूत सेवाओं की व्यवस्था को वास्तविकता में साकार किया जा सकता है। यहीं नहीं, सामाजिक असमानताओं को दूर करने की दृष्टि से भी पर्यटन प्रभाव डालता है।
वहीं इस संदर्भ में मैड्रिक में सन् 1994 में हुई विश्व पर्यटन की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय योजना की बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि सामान्यतया सभी पर्यटक ऐसे स्थानों का चुनाव पर्यटन के लिए करते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर होने के साथ ही स्वच्छ और कम आबादी वाले हों। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि कोई पर्यटक न तो वहां की सामाजिक समस्या का और न ही खराब पर्यावरण का शिकार हो।
इस परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट है कि पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, सफाई के साथ ही स्वस्थ एवं सुरक्षित वातावरण विशेष रूप से आवश्यक है। साथ ही पर्यटकों को खतरों एवं बाधाओं का सामना ना करना पड़े। खतरों और बाधाओं का अर्थ सामान्यतया इस बात से लिया जाता है कि वे तत्व, जिनसे भविष्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होने की आशंका हो। क्योंकि ऐसे जितने भी तत्व और कारण जिनसे कि पर्यटक किसी स्थान पर जाने से कतराने लगें, पर्यटन पर जिनसे प्रतिकूल असर पड़े और जिनसे उस स्थान विशेष पर पर्यटन के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगे, वे ही पर्यटन के खतरे और बाधाएं होती है। इस अर्थ में पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का वातावरण, छेड़छाड़ की घटनाएं, पर्यावरण प्रदूषण, यौन उत्पीड़न, जन-अपराध, सुविधाओं का अभाव आदि ही पर्यटन की सबसे बड़ी बाधाएं एवं भविष्य के लिए खतरे हैं। पर्यटन स्थलों पर स्थानीय समुदाय और पर्यटकांे के बीच समन्वय का नहीं होना, स्थानीय लोगों का पर्यटन के प्रति जागरूक नहीं होना, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की होड़ में घरेलू या स्वेदशी पर्यटन की अनदेखी करना आदि बहुत से ऐसे पहलू हैं, जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन को बाधित करते हैं।
वहीं खतरों और बाधाओं के मद्देनजर अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए बम विस्फोटों के बाद अधिकांश देशों ने अपने पर्यटकों को अमेरिका और आसपास के देशों में नहीं जाने की सलाह दे दी थी। पश्चिम में इससे पर्यटन उद्योग लगभग लड़खड़ा गया था। इसी प्रकार कश्मीर के आतंकवाद, अक्षरधाम मंदिर में हुए बम विस्फोट, राजधानी दिल्ली में संसद पर हुए हमले आदि का प्रभाव केवल उस समय तक के लिए ही पर्यटन पर नहीं पड़ा बल्कि इसका पूरा खामियाजा लंबे समय तक देश के पर्यटन उद्योग को भुगतना पड़ा। साथ ही स्थान विशेष पर पर्यटकों से ठगी, लूटपाट, उनके साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी उनके वहां नहीं जाने का सबब बनती हैं।
हमारे यहां अब भी पर्यटन विकास का प्राथमिक क्षेत्र नहीं बन सका है। इसके मूल में पर्यटन की बहुत सी बाधाएं एवं खतरे ही हैं। कमजोर इच्छा-शक्ति, लालफीताशाही, देश में होनेवाली आतंकवादी वारदातें, जन-अपराध, आम जन की उद्योगों के प्रति उदासीनता, केंद्र-राज्य संबंधों के अकसर होने वाली कड़वाहट, अपर्याप्त सुविधाएं, पर्यावरणीय दुष्प्रभाव आदि बहुत सी ऐसी अड़चनें, या यों कहें कि बाधाएं, पर्यटन उद्योग में हैं जिनके कारण व्यापक संभावनाओं के बावजूद पर्यटन का विकास देश में पूरी तरह से नहीं हो सका है।
वैसे इन दिनों पर्यटन उद्योग केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है। पर्यटकों की बारीक सुविधाओं पर दिया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित नतीजे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। देश में यह तीसरा सबसे बड़ा सेवा उद्योग है और भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी छह फीसद से अधिक है। देश के सकल रोजगार में इस क्षेत्र का हिस्सा लगभग नौ फीसद है। जाहिर है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग ने विशिष्ट और लाभकारी मुकाम बना लिया है। उल्लेखनीय यह भी है कि पर्यटन से होने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा विदेशी पर्यटकों से प्राप्त होता है। दर्शनीय पर्यटन स्थलों के कारण भारत की तरफ विदेशी सैलानियो का खासा रुझान रहता है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग पचास लाख विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनसे पर्यटन उद्योग को करीब ग्यारह अरब डॉलर की कमाई होती है। ऐसे में अगर विदेशी पर्यटकों की आमद में कमी होने लगे तो यह निश्चित ही चिंता का विषय है। सन् 2011 में विदेशी पर्यटकों में नौ फीसद बढ़ोतरी हुई थी, जो 2012 में छह और 2013 में तीन फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि 2014 में कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन वर्ष 2015 में संख्या में गिरावट आई। इस साल जनवरी से जून तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पर्यटकों की आवक में सात फीसद बढ़ोतरी देखी गई।
आंकड़ों से इतर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले राज्यों में उनकी आमद में कमी हुई है। हिमाचल के शिमला-मनाली से लेकर आगरा के ताजमहल और ऐतिहासिक किलों और हवेलियों के प्रदेश राजस्थान के सभी पर्यटन स्थलों पर इस वर्ष अब तक विदेशी पर्यटकों की आमद घटी है। अगर इसी तरह से भारत के प्रति विदेशी पर्यटकों का मोहभंग होता रहा, तो आने वाले समय में भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। पर्यटन मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने इस स्थिति के लिए विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और कुशल श्रम शक्ति का अभाव तथा आधारभूत ढांचे की कमी को जिम्मेदार माना है। समिति ने रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों में लगातार गिरावट पर चिंता जताते हुए सरकार से शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
वहीं समाज में तेजी से बढ़ रहे अपराध भी पर्यटन विकास को बाधित करते हैं। डकैती, लूटपाट, गुंडागर्दी जैसी घटनाओं के समाचार जब मीडिया की सुर्खियां बनते हैं तो इससे उस स्थान विशेष के साथ पूरे देश की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। बढ़ते जन अपराध समाज के लिए तो चिंता का विषय बनते ही हैं, पर्यटन पर भी इनका बुरा प्रभाव घटती पर्यटकों की संख्या के रूप में सामने आता है। बसों, ट्रेनों में नशीला पदार्थ खिलाकर यात्रियों से लूट-पाट, छीना-झपटी, पर्यटकों के प्रवेश करते ही पूर्व नियोजित योजना के तहत उन्हें ठगने की साजिश आदि अपराधों से पर्यटन स्थलों पर असुरक्षा का माहौल बनता है। ऐसे में बहुत से देशों की सरकारों द्वारा अपने निवासियों को भारत न जाने की सलाह दी जाने लगी है।
पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं उद्योग के लिए विशेष रूप से खतरा बनकर सामने आ रही हैं। इसी का एक पहलू पर्यटकों का यौन उत्पीड़न भी है। ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी आदि देशों ने तो विशेष रूप से अपने देश के पर्यटकों को भारत के खतरे गिनाने प्रारंभ कर दिए हैं। विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा वेबसाइट के जरिए अपने नागरिकों को दी जाने वाली सलाह में अब भारत में पर्यटकों के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न, शारीरिक प्रताड़ना, छेड़छाड़, गाली-गलौज, अश्लील हरकतों आदि का हवाला देते हुए सावधानी बरतने के लिए कहा जाने लगा है।
विदेशी पर्यटकों की इस उदासीनता की बड़ी वजह उनके साथ होने वाले अपराध हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ हुए अपराधों के कुल 384 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 135 मामले राजधानी दिल्ली में दर्ज हुए। उसके बाद गोवा में 66 और उत्तर प्रदेश में 64 मामले दर्ज हुए। बीते वर्षों में विभिन्न शहरों में सर्वेक्षण में लगभग सत्तर फीसदी ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना था कि हर विदेशी पर्यटक की भारत आने की पहली शर्त पुख्ता सुरक्षा की होती है और मौजूदा हालात इसकी इजाजत नहीं देते। इसी साल अप्रैल में राजस्थान के अजमेर में एक स्पेनिश जोड़े पर कुछ बदमाशों ने हमला कर उसे घायल कर दिया और महिला के साथ बलात्कार की कोशिश की। एक अन्य वारदात में माता-पिता के साथ देहरादून घूमने आई बारह साल की इजरायली लड़की के साथ एक फोटोग्राफर ने बदसलूकी की कोशिश की। पिछले साल जून में दिल्ली के द्वारका में तीस वर्षीय विदेशी महिला से सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट की हुई। वर्ष 2014 में दिल्ली में इक्यावन वर्षीय विदेशी महिला के साथ लूटपाट और दुष्कर्म हुआ था। इसके अलावा, 2013 में मध्य प्रदेश के दतिया में विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात ने देश को शर्मसार किया था।
इस परिप्रेक्ष्य में केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने विदेशी महिला पर्यटकों को स्कर्ट ना पहनने और छोटे शहरों में देर रात को अकेले ना घूमने की सलाह दी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार महेश शर्मा नें, पर्यटकों की सुरक्षा पर आगरा में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बात कही। इसी कड़ी में उन्होंने पत्रकरों को बताया कि विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एअरपोर्ट पर उन्हें एक बुकलेट दी जा रही है, जिसमें क्या करें और क्या ना करें जैसी चीजों का वर्णन किया गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 के मुकाबले 10.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की बात की जाए तो इस संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं विदेशी पर्यटकों के खिलाफ होने वाले अपराधों की बात करें तो महिलाओं पर होने वाले हमले दूसरे और बलात्कार तीसरे सबसे अधिक होने वाले अपराध हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जी का चिंतित होना लाजमी भी है। लेकिन अपराधियों को पकड़ने के और अपराध रोकने के कारगर तरीके खोजने की बजाए, क्या पहनना चहिये, और किस समय पर घूमना चाहिए जैसे सुझाव सामने आने के बाद महिलाओं के प्रति आम सोच एक बार फिर सामने आती है।

यह बात कहने में कोई दोमत नहीं है कि तीन-चार साल में विदेशी सैलानियों के मन में भारत भ्रमण लेकर असुरक्षा का भाव घर करता जा रहा है, जिस वजह से वे भारत की ओर से लगातार मुंह फेरते जा रहे हैं। भारत के अधिकतर पर्यटन स्थलों जैसे दिल्ली, मुंबई, आगरा, वाराणसी, हरिद्वार, अजमेर, जोधपुर, सांची आदि में आपराधिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। राजधानी दिल्ली के हाल सबसे गंभीर हैं। विदेशी पर्यटकों के मन में भारत को लेकर बढ़ रहे असुरक्षा भाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब भारत आते ही अपनी सुरक्षा के लिए मिर्च पाउडर रखने से लेकर बॉडीगार्ड रखने तक खुद ही तमाम तरह के इंतजाम करने लगे हैं। यह स्थिति हमारी पुलिस व्यवस्था पर कठोर टिप्पणी तो है ही, पर्यटन उद्योग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है और दुनिया में भारत की छवि खराब करने वाली भी है। पर्यटन मंत्रालय को इस पर गंभीर होना ही होगा।

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