सरोकार की मीडिया

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Tuesday, August 11, 2015

दैनिक सरोकार की मीडिया द्वारा एक बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश पॉवर टेक इंजीनियर्स कंपनी विद्युत विभाग को लगा रहा करोड़ों का चूना मिली भगत से चल रहा जिले में गोरखधंधा?


दैनिक सरोकार की मीडिया द्वारा एक बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश
पॉवर टेक इंजीनियर्स कंपनी विद्युत विभाग को लगा रहा करोड़ों का चूना
मिली भगत से चल रहा जिले में गोरखधंधा?
ललितपुर। यदि आपका मीटर भाग रहा है? अधिक रीडिंग दे रहा है? बिजली के ज्यादा बिल से आप परेशान हैं? इसमें कटौती चाहते हैं? वो भी बिना किसी झंझट के, तो परेशान मत हो। आपके जनपद में आ चुके हैं मीटर से छेड़खानी करने वाले। देखते ही देखते जहां आपका मीटर उचित यूनिट निकाल रहा था वहीं मीटर में छेड़खानी के बाद कछुएं की चाल से चलने लगेगा। आप हैरान न हो, यह कोई आम आदमी नहीं है। इसका दावा है यदि कोई भी विद्युत विभाग का अधिकारी मीटर में हुई इस छेड़खानी को पकड़ लेगा तो जितना पैसा मैंने आपसे लिया है उससे दुगना वापस कर देगा। वैसे अब आप लोगों के मन में जिज्ञासा जरूर उत्पन्न हो रही होगी कि यह कौन है? और कितना पैसा लेता है? मीटर को स्लो करने का। तो हम आपको बता दे यह कोई और नहीं बल्कि जो पॉवर टेक इंजीनिर्यस जिसने जनपद में लगभर 2300 से अधिक मीटर लगाए हैं उसी कंपनी का एक कर्मचारी है। जो मात्र 3000 से 5000 रुपए लेकर मीटर में कुछ ऐसा करता है कि मीटर स्लो रीडिंग बताने लगता है। और किसी को पता भी नहीं चलता। जब मीटर की रीडिंग लेने के लिए विद्युत विभाग के कर्मचारी आते हैं तो वह मीटर में दर्ज उक्त कम रीडिंग का बिल बनाकर उपभोक्ता को दे देते हैं। जिससे उक्त कर्मचारी को दिए गए रुपए उपभोक्ता को नहीं अखरते हैं। क्योंकि जहां पहले उसका बिजली का बिल 1000 से 1500 रुपए के आस-पास आता था अब वह 400 से 500 आने लग जाता है। हैं न फायदे का सौदा। 4000 रुपए दीजिए और आप भी करवा सकते है अपनी मीटर को स्लो। तो देर किस बात की। अभी कॉल करें, मीटर लगाने वाले को।

मैं आपसे मजाक नहीं कर रहा हूं। हमारे प्रधान संपादक और संपादक महोदय द्वारा स्टिंग ऑपरेशन कर एक बहुत बड़े घपले का पर्दाफाश किया है। इसमें विद्युत विभाग को करोड़ों रुपए का चुना लगाने पॉवर टेक इंजीनिर्यस कपंनी में कार्यरत रॉबिन पाण्डेय उर्फ गोविंद पाण्डेय निवासी मेरठ, कार्यरत कर्मचारी ललितपुर की वीडियों बनाकर खुलासा किया है। जिसमें वह प्रधान संपादक से मीटर में छेड़खानी करवाने के एवज में 5000 रुपए की मांग कर रहा है। और यह भी दावा कर रहा है कि कोई भी अधिकारी इस मीटर में हुई छोड़खानी को पकड़ेगा तो दुगना वापस करूंगा। मैं ही पूरे जिले में मीटर लगाने का काम कर रहा हूं और जहां भी चैकिंग होती है, अधिकारियों के साथ ही रहता हूं। फिर भी वह लोग मेरी इस कारगुजारी को पकड़ नहीं सकते। और मैं आपको बता दूं कि ललितपुर मैं मैंने अभी तक जितने भी मीटर लगाए है उनमें से लगभग 80 प्रतिशत स्लो रीडिंग देने वाले मीटर लगाए हैं। यह काम मैंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी किया है। इससे मुझे प्रति मीटर 4000 से 5000 रुपए मिल जाता है और उपभोक्ता को प्रति माह बिजली का बिल कम। 
 
विद्युत विभाग को अभी तक बिलिंग नहीं होने के कारण पूर्व व वर्तमान संयोजनधारी उपभोक्ताओं से प्रति माह लगभग 45 लाख रुपए का नुकसान सहना पड़ता था। बिना मीटर के चलते बिलिंग एक या दो माह से नहीं, बल्कि साल दो साल से इसी प्रकार बाधित चल रही है। इसके चलते विद्युत विभाग को एक वर्ष में करोड़ों का घाटा हो चुका है। और हो रहा है। इस घाटे में इजाफा जिले में मीटर लगाने वाली पॉवर टेक इंजीनियर्स कंपनी ने आग में घी डालकर कर दिया है। यानि अब विद्युत विभाग को लाखों का नहीं, करोड़ों का नुकसान सहना पड़ेगा। अगर आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो पॉवर टेक ने जनपद में लगभग 2300 से अधिक मीटर लगाए हैं उनमें से लगभग 70 प्रतिशत मीटर में छेड़खानी की गई है। इसके हिसाब से 1600 से अधिक मीटर में छेड़खानी की गई है। जहां एक घर से रिडिंग के बाद 1000 से 1500 रुपए आता था वहीं वह घटकर 500 से 600 रुपए प्रति मीटर हो जाता है। इससे प्रति घर से लगभग 700 से लेकर 900 रुपए का घटा विद्युत विभाग को सहन करना पड़ता है। यानि प्रति माह लगभग 11 लाख का और एक वर्ष में 13524000 रुपए का चुना पॉवर टेक इंजीरियर्स के कर्मचारी द्वारा विद्युत विभाग का लगाया जा रहा है। और यह सब विद्युत विभाग की नाक के नीचे ही मीटर लगाने वाले कर्मचारी कर रहे हैं। जनपद में इस गोरखधंधा का काम बिना किसी उच्च अधिकारी की मिलीभगत के शायद ही संभव हो सकता है। तभी तो वह बिना किसी डर के अन्य जिलों की भांति यहां भी मीटर में छेड़खानी करके विद्युत विभाग को करोड़ों रुपए का चुना लगाने का काम कर रहा है। यह तो ताजुब की बात है कि अभी तक उसने जितने भी मीटरों में छेड़खानी करके स्लो किया है उनमें से कोई भी पकड़ा क्यों नहीं गया? वैसे एक सवालिया निशान तो विद्युत विभाग में कार्यरत जेईयों व एईयों पर भी लगता है जो इंजीनीयरिंग की डिग्री लेकर जेई व एई के पद पर तैनात होने के बावजूद भी मीटर में हुई छेड़खानी को पकड़ पाने में असक्षम साबित होते हैं। वहीं चंद क्लास पास मीटर लगाने वाले मास्टर माइड ने जेई व एई की डिग्रियों को कहीं पीछे छोड़ दिया है। क्या इनकी डिग्रियां भी.....................।

वहीं मीटर में छेड़खानी के संदर्भ में अजय कुमार सविता सहायक अभियंता मीटर परीक्षण ललितपुर का कहना है कि हमारे यहां से मीटर में किसी भी प्रकार की कोई छेड़खानी नहीं की जाती है। यदि कोई व्यक्ति मीटर से छेड़खानी करता है या करवाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ पॉवर टेक इंजीरियर्स कंपनी में प्रोजेक्ट इंजीनियर्स के पद पर कार्यरत अजीत सिंह से बात करने पर उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी ने जिले भर में लगभग 2300 से अधिक मीटर लगाए हैं और अभी भी कुछ मीटर लगने बाकि हैं। और रही बात मीटर में छेड़खानी की तो हमारे यहां कार्यरत कर्मचारी इस तरह की कोई हरकत नहीं कर सकते। यदि कोई इसमें लिप्त पाया जाता है तो उसे कंपनी हटा देगी। वैसे हमारी कंपनी को इससे कोई भी नुकसान नहीं होगा। चाहे जिस तरह की कार्यवाही प्रशासन द्वारा क्यों न की जाए। क्या चढ़ौत्री नीचे से लेकर ऊपर तक चढ़ चुकी है या चढ़ाई जा रही है? इस बात का खुलासा शायद इस खबर के प्रकाशित होने के बाद चल जाए कि कहां-कहां उक्त पॉवर टेक इंजीनियर्स कर्मचारी ने मीटर में छेड़खानी की है और कौन-कौन अधिकारी उसके इस गोरखधंधे में शामिल हैं?

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