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Monday, October 4, 2010

महिला और मानवाधिकार

आज मानव जाति के समक्ष सबसे बडी समस्याद सम्मा नपूर्वक जीवन यापन की है, पग पग पर ये तिरस्कृ्त, असुरक्षित एवं उत्पीयडित होते हैंA मानव जाति पर जितने कहर इन दिनों ढाये जा रहे हैं शायद पहले कभी सुनने को मिले होंA मानव अधिकारों में पुरूष और महिलाओं को बराबरके अधिकार प्रदान किये गये हैंA स्त्रीर और पुरूष को सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक स्वितंत्रता समान रूप से प्राप्तन हैSA इन स्वातंत्रताओं में महिला एवं पुरूष दोनोंको समान सह अस्तित्व जात पात भेदभाव का उन्मूऔलन साम्‍प्रायिकता का परित्या ग समाहित हैSA महिला स्वभतंत्रता के निमित्तम इन लक्ष्योंप की प्राप्ति हमारे संवैधानिक प्रावधानों में निहितहैSA

महिलाओं को पुरूषों की भांति संविधान में अधिकार प्रदान किये गये हैं परन्तुं पुरूष समाज द्वारा महिला के कमजोर होने और अपने अधिकारों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण उनके अधिकारोंका हनन किया जा रहा हैSA इन अधिकारों के हनन के कारण महिलायें आज सर्वाधिक पीडित हैSA पुरूष द्वारा नारी उत्पीेडन छेडछाड की घटनायें द्रोपदी के चीर की तरह बढ रही हैंSaA आये दिन नारी अपहरण दहेज उत्पीरडन छेडछाड बलात्काडर एवं घरेलू हिंसा की आग में झुलस रही हैSA जितना पुराना भारत का इतिहास हैS] उतना ही पुराना महिला उत्पीरडन का इतिहास हैSA महिलाएं स्वाहभाव से ही अपेक्षाकृत कोमल होती हैंa] और वे अत्या‍चारों का ज्यानदा प्रतिरोध नहीं कर पाती हैंaSA

आज दुनिया भर में जितने भी अपराध होते हैंSa] उनमें अधिकांश किसी महिला के खिलाफ ही होते हैंaSA जैसे जैसे मानव सभ्याता विकसित होती गई] वैसे वैसे महिलाओं के साथ अपराधों की संख्या भी बढती गईA महिलाओं के साथ अपराध सिर्फ अशिक्षित और गरीब वर्ग में ही नहींa] बल्कि उच्चं शिक्षित धनी और प्रतिष्ठित परिवारों में भी होता हैSA महिलाओं के प्रति अपराध कई प्रकार के होते है &

 वैवाहिक हिंसा

 पारिवारिक हिंसा

 दहेज उत्पीिडन एवं हत्याह

 दहेज को लेकर आत्मपहत्याह हेतु प्रेरित करना

 महिला हत्याक

 जबरदस्ती जिस्महफरोशी के दलदल में धकेलना

 लैंगिक भेदभाव और लैंगिक अत्याशचार

 अपहरण के रूप में उत्पीजडन

 भ्रूण हत्याा और लिंग निर्धारण

 विभिन्नत प्रकार का यौन उत्पीाडन

 कार्यस्थ्ल पर यौन उत्पी्डन

 स्कूयल कॉलजों में यौन उत्पी‍डन

 सामाजिक रूप से अपमानित करना

 आर्थिक बंदिशें रखना

महिलाओं के विरूध होने वाले अपराधों के संबंध में भारत सरकार के राष्टीईय अपराध रिकार्ड ब्यू रो क्राइम इन इंडिया द्वारा प्रस्तु त आंकडें चौंकने वाले हैंaA इसके अनुसार महिलाओं के उत्पी डन से संबंधित यौन उत्पीसडन छेडछाड बलात्काार दहेज प्रताडना वैवाहिक तथा हिंसा आदि मामलों में लगातार वृधी हो रही हैA

महिलाओं के प्रति हिंसात्मिक अपराध सबसे प्रमुख हैSA उदाहरण स्व रूप सन 2009 व 10 के आंकडों के अनुसार उत्तरर प्रदेश में औसतन हर 6 दिन में एक महिला की अस्मपत लूटी गई तो करीब हर रोज एक महिला को दहेज के लिए बेघर किया गयाा इस वर्ष अब तक 100 बलात्कािर के मामले दर्ज किए गए 2009 में व उससे पहले 2008 में 49 मामलेदर्ज किए गए थे वहीं अब तक 360 दहेज प्रताडना के मामले दर्ज किए गए जो गत वर्ष की तुलना में 1000 अधिक हैSA नेशनल कमीशन ऑफ विमेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्त र प्रदेश में 2006 में 1372 बलात्का र के मामले दर्ज किए गए जो 2007 में बढकर 1637 और 2008 में 1864 हो गये इसके अलावा महिलाओंके खिलाफ छेडछाड के मामलों में भी खासा वृधी देखी गयी है यह आंकडा भी 2006 में 2182 से बढकर 2009 में 3342 तक पहुंच गयाA

स्त्रीम के विरूध बहुत से मामले सामाजिक मर्यादाओं परिवार की प्रतिष्ठाड के कारण दबा दिये जाते हैं अब भी यह जुवान कुछ भी न कहने के लिए अभिशप्तओ है हमार समाज उसकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है परिवार और विवाह संस्थारओं के दोषपूर्ण ढांचे में नारी शोषित और अपमानित है शादी के बाद यातनाओं का दौर नये सिरे से शुरू हो जाता है अनजान परिवार में जाकर प्रत्ये क सदस्यर को खुश करने की जददोजहद दहेज के ताने सुधड न होने के ताने पति की गुलामी व हर जुल्म सहनेको हर क्षण तैयार रहने जैसी स्थितियां ही अधिकांश लडकियों के वैवाहिक जीवनकी सच्चारई हैA



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