सरोकार की मीडिया

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Sunday, April 11, 2010

ऐसा कोई पेड़ नहीं जिसको यह हवा न लगी हो

यह बात सौलह आने सच है कि एक उम्र के बाद कोई भी अछूता नहीं रहता, कोई कम, कोई ज्यादा करता जरूर है क्योंकि शारीरिक परिर्वतन एवं आस-पास के माहौल को देखकर, मन भी उसी दिशा में भटकने लगता है। जिस प्रकार हवा चलने पर सभी पेड़ हवा की दिशा में हिलने लगते है वह लाख कोिशश करें अपने आपकों हिलने से नहीं रोक सकते, उनके हिलना ही पड़ता है। चाहे वो चाहे या न चाहे। हर इंसान को उसी दिशा में चलना पड़ता है जहां सभी जा रहे है, जैसा कर रहे है, करना पड़ता है, मन चाहे या न चाहे, पर मन कुछ समय बाद करने लगता है आखिर मन है जिस प्रकार खाना खाते हुए दिखने पर, मन भी खाना खाने का करने लगता है चाहे आपने खाना खाया हो या नहीं। उसी तरह जो एक व्यक्ति करता है वह काम दूसरा भी शुरू कर देता है। आजकल के पहनावे को ले तो समझ आ जाएगा कि एक व्यक्ति जिस प्रकार के वस्त्रों को पहनकर समाज के सामने आता हे धीरे-धीरे उसी तरह वस्त्रों को कई लोग पहनने लगते है और वह फैशन में आ जाता है।


ऐसी ही इंसान की फिदरत में है जिस तरह की प्रेम कहानी सुनायी जाती है लैला-मजंनू, हीर-राझां, सीरी -फरहाद, रोमियो-जूलियट, जो एक दूसरे के लिए अपनी जान कुरवान कर सकते थे और की भी। मैंने शायद शब्द का प्रयोग इसलिए किया, क्योंकि मेरे पास इसके कोई प्रमाण मौजूद नहीं है जिससे मैं यह साबित कर सकूं कि ये लोग भी थे, जिनकी प्रेम कहानी हम सभी को सुनायी जाती है, सुनायी जाती रहेंगी। उन्ही का अनुसरण करने की कोिशश युवा पीढ़ी भी कर रही है वह अपने नामों को इन नामों के साथ जोड़ने की भरकस कोिशश करते है कुछ कामयाब भी हो जाते है इस कोिशश के चलते यह अपनी गली-मोहल्ले में मशहूर हो जाते है, इसके अलावा और कुछ नहीं होता, केवल मोहल्ले मे बदनामी ही फैलती है कि फलां-फलां का लड़का उस लड़की के पीछे पड़ा है या उस लड़की का सम्बंध किसी लड़के के साथ है वह उससे मिलती है जब यह बात माता-पिता को पता चलती है तब वह यह सिद्ध करने के लिए की हमारा बच्चा सही है, हम अपने बच्चों पर प्रतिबंध लगा सकते है, अपने बच्चों को थोड़ा डांट/मार-पीट देते है या कुछ समय के लिए घर की चार दीवारी में बन्द कर देते है। इसके अलावा वो कुछ नहीं हो सकता। बच्चा करता अपनी मर्जी का ही है, और इन प्रेम कहानी की तरह वह अपने प्यार को परवान चढ़ाता रहता है एक समय के बाद वो अपना सब कुछ प्रेम/प्यार के नाम पर लुटा चुका होता है लड़का अपना समय, धन तथा लड़कियां अपनी इज्जत। इन प्रेम कहानियों का अन्त सबको पता होता है सब जानते है कि इन प्यार करने वालों का कभी मिलाप नहीं हो पाया, न ही इन को हो पाएगा।

लड़कों का क्या है वह कुछ भी कर सकते है लड़की को सीता की भान्ति अग्नि परीक्षा देनी ही पड़ती है, चाहे वो कुछ भी कर लें।

ऐसा ही होता है लड़के का लड़की के साथ सम्बंध क्यों न हो, उसे शादी के लिए लड़की कुंवारी ही चाहिए। जिस कारण से वो हमेशा ही शक करता रहता है कि मेरी पित्न का कहीं किसी के साथ सम्बंध तो नहीं है या था, वह यह नहीं सोचता की जब वो राम नहीं बन सकता, तो सीता की आश कैसे कर सकता है। आज न तो कोई राम है न ही सीता। सबका दामन दागदार है चाहे इसका पता चले या न चलें, यह तो उसकी अन्तर आत्मा ही बता सकती है कि वो कितने पवित्र है।

शादी की रात लड़का अपने जीवन की सारी दास्तान किताब के पन्नों की तरह धीरे-धीरे खोल देता है परन्तु लड़कियां कभी यह नहीं बताती कि उसकी किसी लड़के के साथ दोस्ती थी या सम्बंध। वह शादी के बाद पतिवत्रा बनने की भरकस कोिशश में लगी रहती है। अपनी पुरानी जिन्दगी को किसी कब्र में दफन कर देती है। जब उस प्यार की पूण्यतिथि आती है तो उसे याद कर लिया जाता है, वह उसे पूर्णत: नहीं भूलती। वो अपने पति में भी उसको तलाशती है चाहे साथ खाना हो या सम्बंध बनाते समय, उसकी याद आ ही जाती है कि वो ऐसा करता था वो वैसा करता था, पर उसे भूला नहीं पाती।

लड़कियां लाख कोिशश कर लें वो पहले प्यार को नहीं भूला पाती। प्यार हो या अपने जीवन में घटित कोई भी घटना, इंसान उसे कभी नहीं भूला पाता i

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